क्या परियोजनाओं की गोद में बैठकर सिंगरौली वासियों का विकास संभव है?

क्या परियोजनाओं की गोद में बैठकर सिंगरौली वासियों का विकास संभव है?


अब्दुल रशीद।।नीति आयोग के रिपोर्ट के अनुसार सिंगरौली देश के अतिपिछड़े 100जिलों में तीसरे स्थान पर है। सिंगरौली कि बदहाली का इससे बड़ा सबूत क्या होगा? इस बदहाली को समझने और बदहाली मिटाने आए केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर ने कहा, कलंकों को मिटाना है तो सच्ची भावना के साथ गरीब बस्तियों में हमें 100 दिवस देना होगा। 

केंद्रीय मंत्री के बात से यह बात तो तय है के बगैर ज़मीन पर काम किए सिर्फ भाषण से इस क्षेत्र का विकास असंभव है। तो क्या अब जन प्रतिनिधि सिंगरौली वासियों के दर्द को समझने उनके दर पर जाएंगे।

मंत्री जी, जिस एनसीएल के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में आप सिंगरौली के विकास की बात कर रहें हैं उसी कम्पनी के अधीनस्थ ओबी कंपनियां सिंगरौली(उर्जान्चल) के बेरोजगार युवाओं के साथ इतना अच्छा व्यवहार करती है के एक निलंबित मजदूर काम मांगते मांगते कंपनी के कार्यालय के सामने आग लगा के मर जाता है।
  • सवाल यह है के कंपनियों और जनप्रतिनिधियों का सिंगरौली के गरीब जनता के प्रति इतना असंवेदनशील रवैया क्यों?
  • इतनी परियोजनाओं के बाद बेरोजगारी क्यों?
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