देश के 4करोड़ 70 लाख बच्चे प्रदूषित हवा में सांस लेने को बाध्य हैं। - रिपोर्ट

वायु प्रदूषण


18 सांसदों ने पर्यावरण मंत्री से राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम को बिना देरी अधिसूचित करने की मांग की

नई दिल्ली।। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के 18 सांसदों ने पर्यावरण मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन को पत्र लिखकर वायु प्रदूषण से निपटने के लिये तुरंत राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम (NCAP) को अधिसूचित करने और उसे लागू करने की मांग की है। ग्रीनपीस इंडिया के प्रतिनिधि लगातार इन सांसदों से मिलकर अपील कर रहे थे कि वे पर्यावरण मंत्री से इस राष्ट्रीय कार्यक्रम को पारदर्शी तरीके से लागू करने की मांग करें।
सांसदों ने अपने पत्र में राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम को तुरंत लागू करने और उसमें लोगों की भागीदारी, सूचना को सार्वजनिक करने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की गुजारिश की है। सांसदों ने इस कार्यक्रम को बहुत मह्तवाकांक्षी माना है लेकिन पांच साल में 50 फीसदी उत्सर्जन कम करने के स्पष्ट लक्ष्य नहीं होने के प्रति अपनी चिंता भी जाहिर की है।
8 मार्च 2018 को, पर्यावरण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि चार हफ्ते के भीतर राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम को पूरा कर लिया जायेगा। चार हफ्ते की यह समय सीमा खत्म हो चुकी है लेकिन मंत्रालय की तरफ से अभी तक किसी भी तरह की औपचारिक सूचना इस संदर्भ में नहीं दी गयी है।
ग्रीनपीस की सीनीयर कैंपेनर रचेल पर्लिन कहती हैं, “यह बहुत ही अच्छी बात है कि सासंद वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में साथ आ रहे हैं। मगर सरकार 35 और 50 फीसदी उत्सर्जन कम करने के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को लेकर सचमुच गंभीर है तो उसे प्रस्तावित राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम को तत्काल लागू किए जाने की जरुरत है।”
ग्रीनपीस इंडिया की एयरोक्लिप्स 2 रिपोर्ट में भी यह तथ्य सामने आया था कि देश के 280शहरों में से 80 प्रतिशत शहरों की हवा सांस लेने लायक नहीं है। इस रिपोर्ट के अनुसार 4करोड़ 70 लाख बच्चे प्रदूषित हवा में सांस लेने को बाध्य हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि 58करोड़ लोगों की हवा को नापने के लिये वायु निगरानी सिस्टम की व्यवस्था ही नहीं है।
रचेल आगे कहती हैं, “जाड़े का मौसम शुरू होने से पहले राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम को लागू करना ज़रुरी है। इसके लिये पर्यावरण मंत्रालय को व्यापक कार्यक्रम शुरू करना चाहिए,जिसमें सभी की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो सके।’’

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