नही होगा उत्तर प्रदेश में बिजली का निजीकरण, योगी सरकार ने लिया यू-टर्न।

नही होगा उत्तर प्रदेश के बिजली का निजीकरण, योगी सरकार ने लिया यू-टर्न।


वाराणसी ब्यूरो अजीत नारायण सिंह।।
आंदोलन कर रहे बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों की मेहनत आखिर रंग लाई। उनकी एकजुटता के आगे सरकार को झुकना पड़ा। गुरुवार को सरकार ने 5 शहरों और 7 जनपदों की बिजली निजी हाथों में सौंपने का फैसला वापस ले लिया। सरकार ने किसी भी तरह का कोई निजीकरण न करने का बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को लिखित आश्वासन दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद बिजली विभाग के अभियंताओं और कर्मचारियों में खुशी का माहौल पैदा हो गया। अभियंताओं का कहना है कि अब वे पूरे मनोयोग से बिजली आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने और विभागीय राजस्व बढ़ाने में जुट जायेंगे।

आखिरकार सरकार को निजीकरण का फैसला वापस लेना पड़ा। 

प्रदेश के आखिरकार सरकार को निजीकरण का फैसला वापस लेना पड़ा।  ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, पावर कारपोरेशन के चेयरमैन और प्रमुख सचिव, ऊर्जा आलोक कुमार, पावर कारपोरेशन की प्रबंध निदेशक अरुणा यू और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे समेत प्रतिनिधिमंडल के मध्य गुरुवार को काफी देर तक निजीकरण के मुद्दे पर मंथन हुआ। 
दोनों पक्षों ने निजीकरण के फायदे और नुकसान पर अपनी-अपनी राय व्यक्त की। बिजली संगठन के प्रतिनिधियों के आगे सरकार के सभी बिंदु बेकार साबित हुए और आखिरकार सरकार को निजीकरण का फैसला वापस लेना पड़ा। 
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को लिखित तौर पर आश्वासन दिया कि 5 शहरों और 7 जनपदों समेत प्रदेश के किसी भी जनपद का निजीकरण नहीं होगा। टेंडर प्रक्रिया को निरस्त किया जाता है। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि एक समिति बनाकर विभाग के राजस्व को बढ़ाने में सहायता ली जाएगी, जिस पर प्रतिनिधिमंडल ने सहमति जताई। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति ने आंदोलन का फैसला वापस ले लिया है।

समझौते की मुख्य बातें..

1- सात जनपदों रायबरेली, कन्नौज, इटावा, उरई, मऊ, बलिया और सहारनपुर के निजीकरण के लिए जारी टेंडर वापस ले लिए गए हैं।
2- कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लिए बिना उप्र में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा।
3- उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही सुधार के लिए कर्मचारियों और अभियन्ताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्रवाई की जाएगी।
4- अन्य लम्बित समस्याओं का द्विपक्षीय वार्ता द्वारा समाधान किया जाएगा।
5- वर्तमान आंदोलन के कारण किसी भी कर्मचारी और अभियन्ता के विरुद्ध किसी भी प्रकार के उत्पीड़न की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उल्लेखनीय है कि रायबरेली, कन्नौज, इटावा, उरई, मऊ, बलिया और सहारनपुर के निजीकरण के टेंडर गत फरवरी माह में जारी किए गए थे। जिन्हें मार्च माह में निजी क्षेत्र को हैंडओवर किया जाना था।

अभियंताओं ने कहा राजस्व बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

निजीकरण का फैसला वापस होने के बाद अभियंताओं का कहना है कि अब वह बिजली विभाग का राजस्व बढ़ाने पर पूरा ध्यान केंद्रित करेंगे। शहर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर खास ध्यान देंगे। इसके अलावा अभी तक जो भी काम रुका हुआ था उसे गति दी जाएगी। बकाएदारों पर वसूली की कार्रवाई तेजी से शुरू की जाएगी। इसके अलावा नए कनेक्शन लेने वालों को कनेक्शन दिए जाएंगे। समय पर बिलिंग का कार्य पूरा कराया जाएगा, जिससे सरकार को लाभ हो।

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