काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भारत अध्ययन केन्द्र में आज प्रोफेसर सदानन्द शाही के सम्पादन में प्रकाशित पुस्तक 'जनपदीय अध्ययन की भूमिका' का लोकार्पण

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भारत अध्ययन केन्द्र में आज प्रोफेसर सदानन्द शाही के सम्पादन में प्रकाशित पुस्तक 'जनपदीय अध्ययन की भूमिका' का लोकार्पण

वाराणसी।।काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भारत अध्ययन केन्द्र में आज प्रोफेसर सदानन्द शाही के सम्पादन में प्रकाशित पुस्तक 'जनपदीय अध्ययन की भूमिका' का लोकार्पण करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राकेश भटनागर ने कहा कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में भारत अध्ययन को कार्यरत देखकर मुझे हार्दिक खुशी हुई।विदेशी विश्वविद्यालयों में तो इन्डोलॉजी के विभाग होते हैं लेकिन भारतीय विश्वविद्यालयों में ऐसा नहीं है। भारत अध्ययन केंद्र की स्थापना के रूप में विश्वविद्यालय अनूठा है। प्रो भटनागर ने जनपदीय अध्ययन की दृष्टि को भारत अध्ययन का पूरक बताते हुए कहा कि भारत की विविधता को समग्रता में समझने के लिए जनपदों का अध्ययन आवश्यक है। इस केंद्र को इस प्रकार कार्य करना चाहिए की पूरे विश्व से भारत के विषय में जिज्ञासु अध्येता भारतीय ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, जीवन दर्शन और कला इत्यादि से परिचित होने यहाँ आएँ।

इस अवसर पर लेखकीय वक्तव्य देते हुए प्रो सदानन्द शाही ने कहा कि वासुदेवशरण अग्रवाल तथा जनपदीय अध्ययन के मनीषियों ने ​जनपदों को गरिमा के साथ देखने और समझने का विवेक दिया और बताया कि हमारी देशी भाषाएं और उन्हें बरतने वाला जनपद वास्तव में कल्पवृक्ष है। प्रो शाही ने कहा कि औपनिवेशिकता के दुष्प्रभाव से इस कल्पवृक्ष से हमारा नाता टूट गया है। इस टूटे हुए रिश्ते को जोडने का नाम ही ​जनपदीय अध्ययन है।

इस अध्ययन से हमें अपने देश को जानने पहचानने में मदद मिलेगी। महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलाधिपति प्रो कमलेशदत्त त्रिपाठी ने कहा कि जनपदों का 66 अध्ययन वास्तव में समूचे भारत का अध्ययन है। उन्होंने कहाकि भारत में जो जन समूह सत्ता से वंचित हैं और हाशिए पर हैं जनपदीय अध्ययन उन्हें सत्ता में भागीदार बनाता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो अवधेश प्रधान ने कहा कि बीसवीं सदी के आरम्भ में जब भारत ने अपने को सभी क्षेत्रों में जानना शुरू किया उसी दौर में भारत को जानने की प्रविधि के रूप में जनपदीय अध्ययन का विकास हुआ।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कला संकाय प्रमुख प्रो उमेश चन्द्र दुबे ने जनपदीय अध्ययन और लोकभाषाओं में निहित ज्ञान,कला कौशल की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस अवसर आयुर्वेद संकाय के प्रो वी के जोशी, संस्कृत संकाय प्रमुख प्रो चंद्रमा पांडेय, प्रो युगल किशोर मिश्र, IGNCA की वाराणसी शाखा के निदेशक डॉक्टर विजय शंकर शुक्ल, प्रो मृदुला सिन्हा, प्रो शुभा राव, हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो अशोक सिंह, प्रो विद्योत्तमा मिश्रा, प्रो बलिराज पांडेय, प्रो आफताब अहमद आफाकी, विश्वविद्यालय की विनयाधिकारी प्रो रोयना सिंह सहित अनेक शोधछात्र छात्रायें मौजूद थे।

कार्यक्रम का आरम्भ समृता यादव, बाबी यादव और सौम्या वर्मा द्वारा प्रस्तुत कुलगीत गायन से हुआ। भारत अध्ययन केन्द्र के समन्वयक प्रो सदाशिव कुमार द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए भारत अध्ययन केन्द्र का परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद प्रकाश डॉ अमित पांडेय ने किया।
Reactions:

Post a Comment

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget