एनसीएल- फिर हुआ दुर्घटना,गोरबी खदान में बीईएमएल का डोजर हुआ जलमग्न

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सिंगरौली (मध्य प्रदेश)।।इसे एनसीएल प्रबंधन की लापरवाही कहें या कुदरत का कहर, एनसीएल की खदानों में दुर्घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही है। एक के बाद एक हादसे एनसीएल की प्रोजेकटों में घटित हो रहा है।

ताजा मामला एनसीएल गोरबी ब्लॉक बी परियोजना का है जहां कल शाम करीब 5:00 बजे ब्लॉक बी की तुर्रा साइडिंग में बीईएमएल डोजर क्रमांक 11777 रास्ता साफ नहीं दिखने के कारण जलमग्न हो गया। उसे ऑपरेटर देवधारी चला रहे थे। गनीमत यह रही की इस हादसे में वह बाल-बाल बच गए। 

हादसे के बाद सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया परंतु डोजर पूरी तरह जल मग्न हो जाने के कारण उसे तुरंत निकाला नहीं जा सका। जिसे अगले दिन सोमवार सुबह कड़ी मशक्कत के बाद निकाला गया। 

श्रमिकों ने लगाया लापरवाही का आरोप

वहां कार्य कर रहे श्रमिकों का आरोप है कि इसमें माइनिंग विभाग की घोर लापरवाही सामने आई है। बताते चलें कि एनसीएल गोरबी ब्लॉक बी में करीब 8 डोजर कार्य में लगे हैं। जिसमें से मात्र 3 अभी चालू हालत में है बाकी सभी में मेंटेनेंस का कार्य चल रहा है। उसमें भी 1 कल जलमग्न हो जाने से मात्र 2 डोज़रों के सहारे कार्य किया जा सकेगा, जिससे सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। श्रमिकों का आरोप है कि अगर उस सकरे इलाके में इतना जल भरा हुआ था तो माइनिंग के लोगों ने इसकी जानकारी ऑपरेटर को क्यों नहीं दी और क्यों जानबूझकर उस मार्ग से डोजर को भेजा गया यह अपने आप में सवाल खड़े करता है।

लापरवाही या नाम बनाने का लालच

आए दिन एनसीएल के किसी न किसी खदानों में कुछ ना कुछ हादसे पेश आते रहते हैं। इसे प्रबंधन की लापरवाही कहें या ज्यादा उत्पादन करके कोल इंडिया में नाम कमाने की होड़, पर इससे एक बात तो साफ़ है कि खदानों में हो रहे इस प्रकार के हादसे अधिकारियों की लापरवाही दर्शाते हैं। साथ ही हर समय खदानों में काम कर रहे श्रमिकों की जान पर बनी रहती है। 

हादसे पहले भी हुए,लेकिन प्रबंधन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया

पहले भी गोरबी ब्लॉक बी के रीजनल स्टोर में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लग गई थी। उसके बाद खदान में एक डंपर जलकर खाक हो गया था। वहीं पूर्व में भी अन्य खदान में भी एक व्यक्ति बुरी तरह झुलस गया था।
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सुरक्षा के नाम पर लाखों ख़र्च नतीज़ा सिफ़र

यूँ तो एनसीएल प्रबंधन सुरक्षा मानकों के लिए लाखों करोड़ों रुपए खर्च करने की बात कहता है। वही सुरक्षा सप्ताह मना कर लोगों को सुरक्षात्मक ढंग से कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करता है परंतु इस प्रकार के हादसे यह सवाल खड़ा करते हैं कि एनसीएल प्रबंधन द्वारा सुरक्षात्मक दृष्टि अपनाने की बात कहीं कागजों तक तो सीमित नहीं।
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