आयुर्वेद संकाय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी

आयुर्वेद संकाय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी

वाराणसी।। पिछले कुछ समय में आयुर्वेद संकाय ने शिक्षा, चिकित्सा एवं सामाजिक स्वास्थ्य के बारे में कुछ नये आयाम स्थापित किया है जो आप के माध्यम से जनता तक पहुंचाना अनिवार्य है जिससे कि इस विधा का पूर्ण लाभ जनता को मिल सके।

1. आयुष्मान भारत के मिशन में प्रयास

यहां वैलनेस सेंटर लागातार 8 महिने से कार्य कर रहा है जिसमें स्वस्थ मनुष्यों का स्वास्थ्य परीक्षण कर के उन्हें रहन-सहन एवं खान पान में परिवर्तन प्रकृति के अनुरूपस करने का सुझाव दिया जाता है। इसी कड़ी में काय चिकित्सा विभाग ने एक मानसिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना भी की है जो अवसाद की पहचान करके उनकी चिकित्सा सुनिश्चित करेंगा। इस कड़ी में वैलनेस सेन्टर एक वर्क स्टेशन बनाने का प्रयास कर रहा है जहां ऐसे रोगियों को भिन्न-भिन्न कार्य जैसे चरखा काटना, डिजाईन बनाना बायोफीडबैक के माध्यम से संगीत सुनकर प्रसन्न रहना एवं एक रोग से ग्रसित रोगियों का समुदायिक मिलन की व्यवस्था की जा रही है। इस कार्य को जनता के सहायोग से करने का प्रस्ताव है।

आयुर्वेद संकाय ने टेलीमेडिसिन की दिशा मे भी नये आयाम स्थापित किया है, देश के उन सभी ग्राम-पंचायतों में जहां भारत सरकार द्वारा (Common Service Centre) CSCs network की स्थापना की गयी है वहां पर VEL के सहयोग से रोगियों की चिकित्सा करेंगे। इस कार्य हेतु BHU एवं aCSCe Governance Services India Limited के बीच MoU की संस्तुति PPC द्वारा कर दी गयी है। इस माध्यम से हम लोग भारत सरकार के आयुष्मान भारत के मिशन को साकार होने में सहयोग करने का प्रयास करेंगे।

आयुर्वेद संकाय ने समाज को स्वस्थ रखने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है जिसमें संकाय ने केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित University Centre for Teacher Education, BHU for Collaborative Research & Training के साथ एक करार किया है जिसमें UP सरकार के प्राइमरी स्कूलों के अध्यापकों की ट्रेनिंग के दौरान एक दिन आयुर्वेद की विधा से दिनचर्या, ऋतुचर्या, यम, नियम, भोजन का समय एवं भोजन के चयन के बारे में भी विशेष जानकारी प्रदान की जायेगी। जिससे वे अपने स्कूल के बच्चों के माध्यम से प्रत्येक परिवार तक इस विधा के प्रचार-प्रसार में सहयोग से लोगों का स्वस्थ किया जायेगा। इस दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार से मदद मांगी गयी है।

इसी प्राकर CMO के माध्यम से ANM, GNM, आंगनबाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं को भी आयुर्वेद की जीवन शैली को उनकी भोजपुरी भाषा में अवगत कराया जायेगा, जिससे आयुर्वेद की पहुंच घर-घर तक पहुंचाई जा सके।

2. शिक्षा के क्षेत्र में प्रयास

इस दिशा में पहली बार आयुर्वेद संाकय के काय चिकित्सा विभाग ने DST-FIST कार्यक्रम में भागीदारी की है। संकाय प्रमुख ने बताया की यदि सफलता मिली तो 3,00,00,000, का अनुदान विभाग को मिल जायेगा।

संकाय में पहले चल रहे DST-PURSE कार्यक्रम में एक सेन्ट्रल लैबोरेटरी की स्थापना की जा रही है तथा संकाय के अध्यापक विज्ञान आधारित प्रयोगों पर विशेष ध्यान देंगे। जिससे आयुर्वेद के मूल आधार को वैज्ञानिक धरातल पर रख कर विश्व पटल पर रखा जा सकेगा। संकाय में स्थित Advance Centre for Genomic Medicine द्वारा Contractual Research हेतु प्रस्ताव पारित हुआ है जिससे आयुर्वेद की छोटी-छोटी कम्पनियां भी अपनी दवाओं का मानकीकरण करा कर विश्व में व्यापार कर सकती हैं।

संकाय को 25 अतिरिक्त अध्यापक के पद UGC द्वारा प्रदान किया गया है। यह इतिहास में पहली बार हुआ है, जो इतना अधिक पद आयुर्वेद विकास हेतु एक साथ आयुर्वेद संकाय में सृजित हुआ है। इससे अब हम BAMS की UG Seats की संख्या 60 से बढ़ाकर 100 करने का प्रयास करेंगे साथ ही PG Seats, 60 बढ़ाने के लिये UGC को प्रस्ताव भेजा जा रहा हैं। वहां से मंजूरी मिलने पर सीटों की संख्या 60 हो जायेगी।

छात्रों को अच्छी शिक्षा देने हेतु संकाय के अध्यापकों ने अलग-अलग समूह का गठन किया है जो उनको शास्त्र में पारंगत करने की दिशा में कार्य कर रहा है जो छात्रावासों में कार्य करेंगे। इसमें सीनियर छात्र भी सहयोग कर रहे हैं।

Tele Education के क्षेत्र में भी संकाय ने उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय से एक डवन् किया है जिसके अन्तर्गत हमारे अध्यापक विडियो कान्फ्रेन्सिंग के द्वारा उनकी कक्षा में शिक्षा प्रदान करेंगे। 

3. स्किल इंडिया मिशन के क्षेत्र में प्रयास

संकाय ने युवाओं को कार्य कुशल बनाने के क्षेत्र में कई ट्रेनिंग कार्यक्रम करने जा रहा है। अभी जुलाई में 3 ट्रेनिंग कार्यक्रम प्रस्तावित है जिनमें 1. लेबोरेटरी सहायक, 2. पंचकर्म मालिश की वैज्ञानिक तकनीक एवं 3. घर-घर में उपलब्ध मसाले एवं पास पड़ोस में उपलब्ध पौधों का प्रयोग करके दवाई बनाने की विधि बताई जाएगी। इस प्रयास से जनता सस्ती दवा घर में ही रोजाना बना कर सेवन करने में सक्षम हो जायेगी। मालिश की ट्रेनिंग में मर्म की विशेष जानकारी दी जायेगी जिसमें नाई समाज एवं सौन्दर्य व्यवस्था चलाने वाले लोगों को वरीयता दी जाएगी। इस दिशा में कुछ नये पाठ्यक्रम भी चलाने का प्रस्ताव विद्दवत परिषद के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है जो NSDC के माध्यम से चलाया जायेगा।

4. योग दिवस के संबंध में

प्रो0 त्रिपाठी ने बताया की इस वर्ष आयुर्वेद संकाय ने चतुर्थ अन्तराष्ट्रीय योग दिवस के अवसरा पर एक विशेष पोस्टर बनाया है जिसमें दिनचर्या के साथ-साथ अश्टांगयोग में वर्णित यम तथा नियम को भी विशेष रूप से बताया गया है। 

इसमें सुबह नाश्ते के साथ दोपहर एवं रात्रि के भोजन के बारे में वात, पित्त तथा कफ के शमन हेतु औषधियुक्त सूप का भी वर्णन किया गया है। आप के द्वारा बताया गया की समाज में सिर्फ आसन एवं प्राणायाम को ही योग के रूप में प्रचलित किया जा रहा था। परन्तु यम तथा नियम का पालन न करने से योग का सम्पूर्ण लाभ मिल ही नहीं सकता। साथ ही समाज में इसकी जानकारी के लिये आज तक कोई जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया था। आयुर्वेद संकाय का इस दिशा में पहला प्रयास है।

पत्रकार वार्ता को आयुर्वेद संकाय प्रमुख प्रो0 यामिनी भूषण त्रिपाठी, काय चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 जे0एस0 त्रिपाठी, प्रो0 चन्द्रशेखर पाण्डेय, डा0 एन0एस0 त्रिपाठी, डा0 सुशील कुमार दुबे ने सम्बोधित किया।
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