भारत कला भवनमें ‘पावस’ का स्वागत

भारत कला भवनमें ‘पावस’ का स्वागत

वाराणसी।। वर्षा आगमन के स्वागत में भारत कला भवन के मुख्य कक्ष में लगार्इ गर्इ प्रदर्शनी ‘पावस’ का शुभ उद्घाटन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति माननीय प्रो0 राकेश भट्नागर ने द्वीप प्रज्जवलित कर किया। इसके पूर्व संस्थान के निदेशक प्रो0 अजय कुमार सिंह ने पुष्प गुच्छ दे कर कुलपति का स्वागत किया। क्रमश इस प्रदर्शनी पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया भारत कला भवन के अनूठे संकलनों से वर्षा ऋतु पर कुल 36 लघु चित्रों को प्रदशार्थ चयन कर योजना बद्ध रीति से 17वीं शताब्दी से 20वीं शताब्दी के क्रम में व्यवस्थित किया गया हैं इस प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण भागवतपुराण के कथा प्रसंगों पर आधारित चित्र श्रृंखला है।
संस्थान के सहायक संग्रहाध्यक्ष, श्री दीपक भरथन एवं डॉ. राधाकृष्ण गणेशन् कुलपति को प्रदर्शनी अवलोकन करया। इस अवसर पर कुलपति ने आयोजकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि मौसम के अनुकूल एक प्रासंगिक विषय पर की गर्इ इस प्रदर्शनी से हमारे काव्य, साहित्य, संगीत, कला एवं संस्कृति पर प्रकाश डालता है और हम अपनी विरासत के बारे में जान पाते हैं। साथ ही उन्होंने अध्यापकों एवं विद्यार्थियों से अपील की कि उन्हें इस प्रकार की प्रदर्शनी अवश्य देखनी चाहिए। प्रदर्शनी के इस अवसर पर कुल सचिव श्री नीजर त्रिपाठी, वित्ताधिकारी श्री श्याम बाबु पटेल, संयुक्त कुलसचिव श्री संजय कुमार, डॉ0 सविता शर्मा, डॉ0 आर0पी0सिंह, डॉ0 देवेन्द्र बहादुर सिंह, डॉ प्रियंका चन्द्रा, श्री विनोद कुमार, श्री मुकुन्द प्रसाद आदि गणमान्य नागरिक के साथ काफी संख्या में विद्यार्थी एवं दर्शक उपस्थित थे। 

स्वागत पावस

षड़्ॠतुओं में वर्षा ऋतु का अपना अलग ही आनन्द है। वर्षाकाल में प्रत्येक वर्ष मेघ अपने उसी परम्परागत, पुरातन, परिपक्व अवस्था में, अपने ताजगी भरे, रंगमय अलकरण के साथ प्रकट होते हैं।
वर्षा आगमन के स्वागतोत्सव में भारत कला भवन संग्रहालय के चित्रकला विभाग के संकलनों से 36 लघुचित्र श्रृंखला को यहां प्रदर्शनार्थं चयनित किया गया है। इस प्रदर्शनी को योजनाबद्ध रीति से 17वीं शताब्दी से 20वीं शताब्दी के क्रम में व्यवस्थित किया गया है, जिसमें ‘वर्षा’ का मुख्य रूप से प्रतिनिधित्व है, जो भागवत के पौराणिक कथाओं पर आधारित एक प्रधान तत्व है। इस कथा के अन्तर्गत राधा-कृष्ण के प्रेम-प्रसंगों को रागमाला चित्रों में विभिन्न रूपों में 20वीं सदी के चित्रकारों द्वारा यथार्थ चित्रण किया गया है। ये सभी चित्र वर्षा पर आधारित विभिन्न शैलियों में निर्मित चित्र हैं जिनमें मुगल, पहाड़ी, मालवा, राजस्थानी, दकनी से लेकर 20वीं शताब्दी के बंगाल शैली के चित्र हैं।

केशव दास, बिहारी, जय देवसदृश मध्यकालीन कवियों द्वारा रचित अद्भुत प्रेम-प्रसंगों की काव्यमय साहित्य ने तत्कालीन भारतीय चित्रकारों को भी इसके अंकन हेतु प्रेरित किया। वर्षा की काव्यमय प्रस्तुति से भी बढ ़कर चितेरों ने मानसून के विविध अवस्थाओं एवं क्रीड़ाओं के मनोभावों का उत्कृष्ट अंकन किया है। कहीं बादलों के माध्यम से प्रेमी-प्रेमिकाओं की विरह पीड़ा का चितेरों ने कुशल अंकन किया है, तो कहीं राधा-कृष्ण को एकान्त में प्रेमालाप करते हुए, एक-दूसरे के प्रति उनके समर्पण भाव को बखूबी दर्शाया है।
मानव जीवन में वर्षा कभी-कभी विशेष भूमिका में होती है। पहाड़ी एवं मालवा शैली में निर्मित शिशु-परिवर्तन के चित्र ऐसी ही भूमिका का प्रतिनिधित्व करते है, जिसके अन्तर्गत कृष्ण एवं देवी योग माया का परिवर्तन करने निकले वसुदेव के यमुना पार करने वाले दृश्य से वर्षा की महत्ता झलकती है, वहीं देवराज इन्द्र द्वारा की गर्इ घनघोर वर्षा प्रलय से लोगों के संरक्षणार्थ श्री कृष्ण का गोवर्धन धारण करने की पृष्ठ भूमि में वर्षा ही प्रमुख बिन्दु है। इस विषय पर गढ़वाल, मे वाड़, मालवा तथा पहाड़ी शैली में निर्मित अत्युकृष्ट चित्र यहां प्रदर्शित हैं।

संस्कृत महाकवि काली दास द्वारा 4थी-5वीं शताब्दी में रचित ‘मेघदूतम’ नामक काव्य ग्रन्थ पर भी कर्इ चित्रकारों ने चित्र श्रृंखला तैयार की है, जहां विरह में भी पीड़ित नायक-नायिका के संदेश वाहक के रूप में मेघ को दर्शाया गया है। इस श्रंृखला में रामगोपाल विजय वर्गीय एवं शैलेन्द्र नाथ डे के चित्र यहां प्रदर्शित हैं जिसमें मेंघों के घुमड़ते विविध स्वरूपों, रंगों के द्वारा मानव के मनो भावों, रागों, रसों को वर्षा के मनमोहक वातावरण में दर्शाया गया है। रागमाला श्रृखंला में ऐसे रंगमय वातावरण अवलोकनीय है। वीथिका में समकालीन बंगाल चित्रकारों के वर्षा से सम्बन्धित चित्र भी यहाँ प्रदर्शित हैं जिसमें अवनीन्द्र नाथ टैगोर, गगनेन्द्र नाथ टैगोर तथा नंदलाल बोस केवॉश तथा रेखा चित्र है। इसके अतिरिक्त सुप्रसिद्ध हिन्दी कवियित्री महादेवी वर्मा की ‘दीप शिखा’ नामक वर्षा ऋतु से संबन्धित एक काव्य चित्र यहां प्रदर्शित है, जो प्रकृति से प्रेरित उनकी एक श्रेष्ठ कृति है।

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