#Emergency 25 जून "काला दिवस" का अध्याय....!

25 जून "काला दिवस" का अध्याय....!

जमुई।।25 जून 1975 तक भारत दुनियां का सबसे बड़ा लोकतंत्र था।लेकिन 25 जून 75 की मध्य रात्रि में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गाँधी ने देश में इमरजेंसी (आपातकाल) लागू करके देश को आधिनायक तंत्र में परिवर्तित कर दिया।समाचार पत्रों की स्वाधीनता छीन ली गई। न्याय पालिका की स्वतंत्रता कुंठित कर दी गयी।जनता के मौलिक अधिकार कुचल दिये गये। नागरिक स्वतंत्रताएं समाप्त कर दी गयी और लोगों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई, इसलिए 25 जून को "काला दिवस" कहते हैं।26 जून 75 के पूर्व जनता इस देश का मालिक थी। परन्तु 26 जून 75 से इनका यह अधिकार छीन लिया गया और लोकशाही के स्थान पर एक व्यक्ति की तानाशाही कायम हो गयी।याद रहे मार्च 1975 में ही लोकसभा का कार्यकाल पूरा हो चुका था। किन्तु इमरजेंसी के बहाने इसका कार्यकाल बढ़ाकर चुनाव टाल दिये गए।संविधान में मनमाने ढंग से संशोधन कर देश में तानाशाही को स्थायित्व देने की कोशिश की गई। सरकार की क्ररता का आलम यह कि एक सच्चे देश भक्त को,जिसने देश की आजादी के खातिर जेल की दीवार फांदकर बाहर आ गये और 42 के स्वतंत्रता आंदोलन को रफ्तार दी।आजाद भारत में गांधी विचारक और समाज सुधारक 74 आंदोलन के नायक लोक नायक जय प्रकाश जैसे देश भक्त को जेल में डाल दिया।सैकड़ों राजनेताओं और हजारों छात्रों, नौजवानों एवं नागरिकों पर मीसा, डी०आई०आर० जैसे कड़े कानून थोप कर विभिन्न जेलों में बंद कर दिये गये। इनका कसूर इतना ही था कि भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठायी थी और सत्ता की क्रूरता के आगे सिर झुकाने को तैयार नहीं थे।अतएव आज के युवा पीढ़ी को और सामाजिक कार्यकताओं को जे०पी० आंदोलन के महत्व को समझना होगा। 1974 आंदोलन आज भी प्रासंगिक हैं। हम सबों को जमीनी सच स्वीकारना होगा ताकि सबकों अधिकार मिले,कोई उपेक्षित या वंचित नहीं रहे राजनीति जन सेवा की परिधि मे आये, झूठ के दिखावे में नहीं।
लेखक-राजेश कुमार सिह,प्रखर समाजवादी नेता व जे०पी० सेनानी,जमुई हैं।
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