देश का अंतिम ही नहीं प्रथम नागरिक भी छुआछूत से अछूता नहीं !

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लितों के घर जाकर भोजन करने का ढोंग करने वाले आज भी चुप हैं?यानी मौन समर्थन है उनके प्रति जो दलित मजदूर को फेक कर रोटी देते हैं,जो दलित माँ-बेटी को सरकारी नल का पानी पीने से रोकते हैं। ये लोग अब भी मौन हैं जब देश के प्रथम व्यक्ति जिन्हें राष्ट्रपति होने के बावजूद जगन्नाथ पूरी मंदिर के अदना सा सेवादारों के कारण अपमान सहना पड़ा। बराबर के हक़ की बात तो दूर की कौड़ी है,इक्कीसवीं सदी में भी छुआछूत की व्यवस्था को मानने वाले लोग आज भी दलितों को इंसान नहीं मानते।



न्यूज डेस्क।।ओडिशा में पुरी यात्रा के दौरान राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी के साथ जगन्नाथ पुरी  मंदिर के कुछ सेवकों द्वारा अनुचित व्यवहार किया गया और गर्भ गृह में जाने से रोका गया। 

ज्ञात हो की,18 मार्च को राष्ट्रपति और उनकी पत्नी जगन्नाथ पुरी मंदिर दर्शन के लिए आए थे। राष्ट्रपति के कड़े सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए कुछ सेवक वीवीआईपी कपल के पास पहुंच गए। इन सेवकों ने कथित रूप से उन्हें धक्का दिया और कोहनी भी मारी,और गर्भ गृह में जाने से रोका था। इससे राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को काफी परेशानी हुई थी। 

राष्ट्रपति भवन ने जारी किया नोटिस 

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार इस मामले में 19 मार्च को राष्ट्रपति भवन से एक सख्त नोटिस जारी किया गया और इसमें उन कारसेवकों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया जिन्होंने राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के साथ अनुचित व्यवहार किया। इस नोटिस के बाद 20 मार्च को श्री जगन्नाथ मंदिर एडमिनिस्ट्रेशन ने बैठक की और उसके मिनट्स तैयार किए।

गर्भगृह में जाने से रोका 

मंदिर के मुख्‍य प्रशासक और आईएएस अधिकारी प्रदिप्‍ता कुमार महापात्रा ने इस बात का खंडन किया कि राष्‍ट्रपति और उनकी पत्‍नी के साथ दुर्व्‍यवहार हुआ। उधर, मंदिर सूत्रों ने बताया कि कुछ सेवकों ने कथित रूप से राष्‍ट्रपति कोविंद का रास्‍ता ब्‍लॉक कर दिया था। उस समय राष्‍ट्रपति गर्भगृह के अंदर पूजा करने जा रहे थे। मंदिर प्रशासन ने दोषी सेवकों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया है। 

सुरक्षा में हुई चूक 

इस बीच कुछ अन्‍य मंदिर अधिकारियों का कहना है कि राष्‍ट्रपति के प्रोटोकॉल में मामूली चूक हुई थी। उन्‍होंने कहा कि कुछ सेवक राष्‍ट्रपति से बात करना चाहते थे, इस वजह से वह उनके पास पहुंच गए। राष्‍ट्रपति के साथ सुरक्षा चूक की यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब तीन महीने पहले ही जगन्‍नाथ मंदिर के सेवकों के दर्शानार्थियों के साथ दुर्व्‍यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई थी। 

दो घंटे तक आम लोगों के लिए दर्शन थे बैन 

कांग्रेस के नेता सुरेश रौतरे ने कहा कि 18 मार्च को दर्शनार्थियों के लिए मंदिर सुबह 6 बजकर 35 मिनट से लेकर 8 बजकर 40 मिनट तक के लिए बंद कर दिया गया था ताकि राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को कोई परेशानी न हो। मंदिर के अंदर सिर्फ कुछ कारसेवक और सरकारी अधिकारी मौजूद थे। समझ नहीं आया कि इसके बावजूद जिला प्रशासन वीवीआईपी मेहमानों की सुरक्षा क्यों नहीं कर पाया? अभी तक तो मंदिर में सिर्फ आम दर्शनार्थियों के साथ ही कारसेवक अभद्रता करते थे और अब उन लोगों ने राष्ट्रपति को भी नहीं बख्शा।
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