जम्मू- कश्मीर:भाजपा ने समर्थन वापस लिया,महबूबा ने राज्यपाल को सौंपा इस्तीफ़ा

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नई दिल्ली।।भाजपा द्वारा आज पीडीपी से समर्थन वापस ले लिए जाने के बाद जम्मू - कश्मीर में तीन साल पुरानी महबूबा मुफ्ती सरकार गिर गई। सरकार गिरने के बाद राज्य में एक बार फिर राज्यपाल शासन लागू होना तय है। 

राज्य में सख़्ती की नीति नहीं चल सकती। - महबूबा मुफ़्ती

जम्मू कश्मीर की पहली महिला मुख्यमंत्री रहीं महबूबा मुफ़्ती ने गठबंधन तोड़ने के लिए बीजेपी की ये कहते हुए आलोचना की है कि राज्य में सख़्ती की नीति नहीं चल सकती। 

उन्होंने श्रीनगर में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''ये सोचकर बीजेपी के साथ गठबंधन किया था कि बीजेपी एक बड़ी पार्टी है, केंद्र में सरकार है। हम इसके ज़रिए जम्मू कश्मीर के लोगों के साथ संवाद और पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध चाहते थे, उस समय अनुच्छेद 370 को लेकर घाटी के लोगों के मन में संदेह थे लेकिन फिर भी हमने गठबंधन किया था ताकि संवाद और मेलजोल जारी रहे।''

अपने पिता मुफ़्ती मोहम्मद सईद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ''मुफ़्ती साहब ने जिस मक़सद के लिए ये गठबंधन किया था, उसके लिए हमने अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश की, संवाद और मेलजोल के लिए आगे भी हमारी कोशिश जारी रहेगी। 

क्या बीजेपी की ओर से गठबंधन तोड़ने पर आपको झटका लगा, इस सवाल पर महबूबा मुफ़्ती ने कहा, ''शॉक नहीं लगा, गठबंधन सत्ता के लिए नहीं किया था। अब हम कोई और गठबंधन नहीं तलाशना चाहते।''

भाजपा ने पीडीपी पर ठीकरा फोड़ा।


माधव ने आनन - फानन में बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों को बताया , ‘‘ राज्य की गठबंधन सरकार में बने रहना भाजपा के लिए जटिल हो गया था। ’’

माधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से विचार - विमर्श करने के बाद गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया गया।

कश्मीर घाटी के हालात में सुधार नहीं होने के लिए भाजपा ने पीडीपी पर ठीकरा फोड़ा। माधव ने पिछले हफ्ते श्रीनगर के कड़ी सुरक्षा वाले प्रेस एनक्लेव इलाके में जानेमाने पत्रकार शुजात बुखारी की अज्ञात हमलावरों द्वारा की गई हत्या का भी जिक्र किया। उसी दिन ईद की छुट्टियों पर जा रहे थलसेना के जवान औरंगजेब को अगवा कर लिया गया था और फिर उनकी हत्या कर दी गई थी। ये दोनों घटनाएं ईद से दो दिन पहले हुईं।

माधव ने कहा , ‘‘ यह ध्यान में रखते हुए कि जम्मू - कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और राज्य में मौजूदा हालात पर काबू पाना है , हमने फैसला किया है कि राज्य में सत्ता की कमान राज्यपाल को सौंप दी जाए। ’’

भाजपा नेता ने कहा कि आतंकवाद , हिंसा और कट्टरता बढ़ गई है और जीवन का अधिकार , स्वतंत्र अभिव्यक्ति का अधिकार सहित नागरिकों के कई मौलिक अधिकार खतरे में हैं।

अक्षमता, घमंड और नफ़रत हमेशा विफल होती है।


कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने एक ट्वीट में लिखा है, ''बीजेपी-पीडीपी के अवसरवादी गठबंधन ने जम्मू कश्मीर को आग में झोंक दिया, कई निर्दोष लोग मारे गए जिनमें हमारे बहादुर सैनिक भी शामिल हैं। ''

''भारत को इसकी सामरिक क़ीमत चुकानी पड़ी है और इसकी वजह से यूपीए की कई वर्षों की कड़ी मेहनत बर्बाद हो गई। राष्ट्रपति शासन के दौरान भी क्षति जारी रहेगी। अक्षमता, घमंड और नफ़रत हमेशा विफल होती है।''

  • नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर ने कहा कि भाजपा ने जिस समय पर यह फैसला किया है , उससे उन्हें हैरानी हुई है। 
  • अपनी पार्टी को राज्यपाल शासन लागू करने और फिर जल्द चुनाव कराने के पक्ष में बताते हुए उमर ने कहा , ‘‘ हमें 2014 में जनादेश नहीं मिला था और 2018 में भी हमारे पास जनादेश नहीं है। ’’ 
  • कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने यहां कहा कि भाजपा ने पीडीपी के साथ सरकार बनाकर ‘‘ बड़ी भूल ’’ की थी। 
  • उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पार्टी भाजपा को क्षेत्रीय पार्टी पीडीपी के साथ गठबंधन नहीं करना चाहिए था। 
  • आजाद ने पत्रकारों से कहा , ‘‘ क्षेत्रीय पार्टियों को अपने बीच ही गठबंधन करने देना चाहिए था। ’’ 

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