61साल पुराना यूजीसी होगा खत्म,बनेगा उच्च शिक्षा आयोग

यूजीसी, शिक्षा, मानवसंसाधन मंत्रालय,


नई दिल्ली।।मोदी सरकार ने 61साल पुराने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को खत्म कर भारत के उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना के लिए एक मसौदा बिल तैयार किया है।  नया नियामक बनाने से पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 7 जुलाई, 2018 तक सभी शिक्षाविदों और जनता से ड्राफ्ट बिल के लिए सुझाव आमंत्रित किए गए है। ये सुझाव विभाग की वेबसाइट पर 7 जुलाई तक 5 बजे से पहले दिए जा सकते है। 

केंद्र सरकार मानसून सत्र में हायर एजुकेशन रेग्यूलेटरी काउंसिल (एचईआरसी) नाम से तैयार इस बिल को संसद में पेश करेगी। इस बिल के कानून बन जाने के बाद देश भर में उच्च शिक्षा के लिए बने आयोग और परिषद खत्म हो जाएंगे। 

यह देश में मौजूद सभी विश्वविद्यालयों और संस्थानों के लिए एक गाइड की तरह काम करेगा। इसके साथ ही नए कोर्स के बारे में भी सभी को सुझाव भी देगा।

हायर एजुकेशन रेग्यूलेटरी काउंसिल (एचईआरसी) के पास किसी भी विश्वविद्यालय या फिर तकनीकी संस्थान को अनुदान देने का अधिकार नहीं होगा। अनुदान के लिए आयोग केवल एचआरडी मंत्रालय को सिफारिश कर सकेगा। 

नए बिल में यह साफ नहीं किया गया है कि राज्य सरकारों के आधीन में आने वाले विश्वविद्यालयों और बीएड कराने वाले शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान इस बिल के दायरे में आएंगे या नहीं। 

ड्रॉफ्ट के अनुसार अनुपालन नहीं करने पर जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है। वर्तमान में, यूजीसी जनता को सूचित करने के लिए अपनी वेबसाइट पर फर्जी संस्थानों के नाम जारी करता है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है।

रेग्यूलेटर देश भर में नए संस्थान स्थापित करेगा जहां पर अच्छी क्वालिटी की उच्च शिक्षा छात्र-छात्राओं को मिलेगी। रेग्यूलेटर शोध और पढ़ाई के नए मानक तय करेगा। 

रेग्यूलेटर प्रत्येक वर्ष सभी विश्वविद्यालयों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों की परफॉर्मेंस का भी अध्य्यन करेगा। 

रेगुलेटर के पास अकादमिक गुणवत्ता मानकों को लागू करने की शक्तियां होंगी। 
उसे फर्जी संस्थानों को बंद करने का आदेश देने का अधिकार भी होगा। 

यूजीसी में प्रत्येक कोर्स के लिए बनी अलग-अलग कमेटी HECI के दायरे में आ जाएंगी। अगर गुणवत्ता नहीं रखी तो रेग्यूलेटर उस संस्थान में छात्रों के एडमीशन पर रोक भी लगा सकेगा। 

इस अथॉरिटी में 10 लोगों की नियुक्ति की जाएगी, जिसमें शिक्षा जगत के नामी व्यक्ति को चेयरमैन, दो उप चेयरपर्सन, तीन सदस्य जो कि आईआईटी/आईआईएम/आईआईएससी में पांच साल तक निदेशक रहे और तीन सदस्य ऐसे जो कि किसी राष्ट्रीय या राज्यों के विश्वविद्यालय में कुलपति रहे हों।
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