केरल - महिलाओं ने ऐसे जीता "बैठने का अधिकार"

Right-to-Sit,बैठने का अधिकार


आज़ाद भारत मे यह बात ग़ैरमामूली लग सकती है या फिर कुछ के लिए ये शायद चकित करने वाला हो सकता है, लेकिन केरल की कुछ महिलाओं के लिए यह जंग में जीतने से कम नहीं है।ये वो महिलाएं हैं जिन्हें अपने वर्किग ऑवर में बैठने की इजाज़त नही थी।

इन महिलाओं ने राज्य सरकार को उस नियम में बदलाव लाने के लिए मजबूर कर दिया, जिसके तहत रिटेल आउटलेट में नौकरी के दौरान उन्हें बैठने से रोका जाता था।महिलाओं ने इसके ख़िलाफ अभियान चलाया था।

नियम में बदलाव के बाद अब उन्हें अनिवार्य रूप से बैठने की जगह मिलेगी। साथ ही महिलाओं को शौचालय जाने के लिए भी पर्याप्त समय दिया जाएगा।

इस प्रस्ताव के मुताबिक़ अब महिलाओं को उनके काम करने की जगह पर रेस्ट रूम की सुविधा दी जाएगी और अनिवार्य रूप से कुछ घंटों का ब्रेक भी मिलेगा। और जिन जगहों पर महिलाओं को देर तक काम करना होता है, वहां उन्हें हॉस्टल की भी सुविधा देनी होगी।

इन नियमों का उल्लंघन होता है तो व्यवसाय पर दो हज़ार से लेकर एक लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

आठ साल बाद मिला बैठने काअधिकार 


महिला अधिकार के इस मुद्दे को साल 2009-10 में कोझिकोड की पलीथोदी विजी ने उठाया था।

"केरल की तपती गर्मी में महिलाएं पानी तक नहीं पी पाती थीं क्योंकि उन्हें दुकान छोड़ कर जाने की इजाज़त नहीं होती थी। यहां तक की उन्हें शौच के लिए जाने तक का वक़्त नहीं दिया जाता था। वो अपनी प्यास और शौच रोक कर काम करती थीं, जो कई बीमारियों को जन्म देती थी।"

इस तरह की महिलाएं एकजुट हुईं और उन्होंने संघ का निर्माण किया। 

पुरुषों को भी मिल फायदा

केरल सरकार के बनाए नए नियमों का फायदा सिर्फ महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी मिला है। अब वो भी अपनी नौकरी के दौरान बैठ सकेंगे।जल्द ही सरकार इस संबंध में एक नोटिफिकेशन जारी करने वाली है।
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