Emergency- एक गलत फैसला अनेक बेमिसाल कार्यों को हाशिए पर पहुंचा दिया

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देश से बड़े दल नहीं होते। देश के सम्मान से बड़ा दल का सम्मान नहीं होता।

राजेश बादल
जब लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने आंदोलन छेड़ा ,हम लोग कॉलेज में पढ़ते थे। विचारों की खलबली ने पत्रकारिता में ला दिया। प्रतिपक्ष और प्रेस की आवाज़ पर अंकुश कतई जायज़ नहीं ठहराया जा सकता। इस एक काम ने इंदिरा गांधी के देशहित में किए।

1956 के अकाल की विभीषिका कौन भूल सकता है। लाखों लोग भुखमरी के शिकार थे। अमेरिका ने अपमानित करते हुए लाल गेँहू भेजना चाहा था । इंदिरागांधी की बदौलत देश आज हरित क्रांति के बाद अनाज उत्पादन में आत्म निर्भर है। बैंकों का राष्ट्रीयकरण और राजाओं का प्रिवीपर्स बंद करने का साहसिक फैसला इंदिरा गांधी ही ले सकती थी।

आत्मसमर्पण पर हस्ताक्षर करते पाकिस्तानी लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाज़ी साथ में भारत के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा, 16 दिसम्बर, 1971।
पाकिस्तान हमारे पूरब में भी था और पश्चिम में भी। आप पकिस्तान के विमान अपने देश के ऊपर से उड़ने को रोक नहीं सकते थे। सीमाओं पर दोनों ओर से खतरा था। यह इंदिरागांधी ही थी ,जिसने बंगलादेश का निर्माण करा कर पकिस्तान को स्थाई सबक दिया।

अमेरिकी दादागीरी को इंदिरा ने ही तब ठेंगा दिखाया था। अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें दुर्गा का अवतार कहा था।1962 में चीन से युद्ध की कड़वी यादें आज भी सालती हैं।
Indian Prime Minister Smt. Indira Gandhi with the King of Sikkim, Early 1970’s
सिक्किम के ऊपर नाथुला दर्रे से चीन के लिए भारत को घेरना बहुत आसान था। 1975 तक सिक्किम दुनिया के नक़्शे पर एक अलग देश था। आपातकाल के साल यह भारत का राज्य बना। इतनी बड़ी उपलब्धि आज इतिहास के पन्नों में दफ़न है।

भारत में टेलीविजन का जाल और रंगीन परदे की शुरुआत इंदिरागांधी के ही ज़माने में हुई। भारत ने अंतरिक्ष में एक भारतीय को भेजने की पहल इंदिरागांधी के कार्यकाल में ही हुई ,जब राकेश शर्मा पहले अंतरिक्ष यात्री बने। पोखरण में पहला परमाणु परीक्षण इंदिरागांधी के कार्यकाल में ही हुआ।

पंजाब में उग्रवाद का खतरनाक दौर ख़त्म करने वाली महिला भी वही थी। जान देनी पड़ी इसके लिए अन्यथा भारत के नक़्शे में आज पंजाब नहीं होता। अपने कार्यकाल में कश्मीर के मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण नहीं होने दिया।

आज बयालीस साल पहले मुड़कर देखता हूँ तो सन्देश यही है कि बेशक़ आपके खाते में अनेक उपलब्धियाँ हों लेकिन एक गलत फ़ैसला हमेशा के लिए आपकी छबि विकृत कर देता है।

क्या हमारे आज के राजनेताओं और शासक दलों के लिए इसमें कोई सन्देश छिपा है? देश से बड़े दल नहीं होते। देश के सम्मान से बड़ा दल का सम्मान नहीं होता।पाकिस्तान में अधिकतर समय लोकतंत्र नहीं रहा मगर हम उससे संवाद करते रहे,चीन में भी लोकतन्त्र नहीं है फिर भी हम उससे बात करते हैं। लोकतंत्र देश के लिए एक शासन प्रणाली है लेकिन देश के लिए अनेक शासन प्रणालियाँ हो सकती हैं। आज लोकतंत्र की दुहाई भी दी जाती है और लोकतंत्र की ख़ामियाँ भी निकाली जाती हैं।
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