दिलो को धड़काती फिल्म "धड़क"

धड़क


अब्दुल रशीद
फ़िल्म समीक्षा,उर्जांचल टाइगर 

श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर और शाहिद कपूर के भाई ईशान खट्टर की चर्चित फिल्म 'धड़क' सिनेमाघरो में रिलीज़ हो चुकी है।करण जौहर के धर्मा प्रोडक्‍शंस के बैनर तले बनी इस फिल्म के निर्देशक हैं शशांक खेतान। यह फिल्म मराठी भाषा की सुपरहिट फिल्म 'सैराट' का हिन्दी रीमेक है। 

नायक नायिका के बीच मुलाकात, फिर तकरार और दोनों घर से फरार, धड़क की कहानी बस इतनी ही है,लेकिन फ़िल्म में और भी बहुत कुछ ख़ास है जिसके लिए यह फ़िल्म जरूर देखनी चाहिए। 

इस फ़िल्म में आप देखेंगे एक तरफ फरार जोड़ी की जद्दोजहद भरी खुशनुमां जिंदगी तो दूसरी तरफ रूढ़िवादी कट्टर समाज का क्रूर और भयावह चेहरा। सैराट फ़िल्म को दिलोदिमाग में लेकर फ़िल्म देखने वालों को शुरू में थोड़ा निराशा हो सकता है,क्योंकि सैराट की आर्ची और प्रश्या को देखने पहुंची दर्शकों को धड़क के मधुकर और पार्थवी के बीच  फिल्माया केमेस्ट्री अपील नहीं  कर पता। 

फर्स्ट हाफ में दिखाया जाने वाला अमीरी गरीबी वाला एंगल आपको इरिटेट कर सकता है,भारत मे जिसके पास उदयपुर जैसे टूरिस्ट प्लेस के प्राइम लोकेशन पर बेहतरीन रेस्टोरेंट हों उसे गरीब दिखाना। फ़िल्म का पहला हॉफ एवरेज है, लेकिन दूसरा हाफ जब जाह्नवी के पिता के कहर से बचने के लिए दोनों जोड़ी बाग़ी हो जाता है,फ़िल्म में यह सीन जाह्नवी और ईशान को पटरी पर दौड़ता दिखाया जाता है,इस सीन से फ़िल्म भी पटरी पर लौटती दिखती है।बाकी कहानी जानने के लिए फिल्मों के शौकीन दर्शकों को  फ़िल्म देखना चाहिए।

यह तो रही फिल्म धड़क की सैराट से तुलना की बात,जहां फिल्म अच्छी तो बन पड़ी है,लेकिन कुछ जगहों पर सैराट देख चुके दर्शकों को निराश होना पड़ेगा पर धड़क का क्लाइमेक्स भी सैराट की तरह चौकाने वाला है। जहां तक बात की जाय, हिंदी मूवी के दर्शकों की,उनके लिए यह फिल्म बेहद जबरदस्त और मजेदार है और यह फिल्म पूरे तीन घंटे दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब साबित होगी।

अब  बात करते हैं फ़िल्म के किरदारों की,पूरी फ़िल्म में ईशान खट्टर बेहद सहज तरीके से किरदार निभाते नजर आए,चाहे वो प्यार में पगलाया नौजवान हो या फिर शादीशुदा जिम्मेदारी और जद्दोजहद से जूझता पति,कुल मिलाकर अपने हिस्से का किस्सा बतौर किरदार ईशान ने बखूबी निभाया। फ़िल्म में सरप्राइज पैकेज जाह्नवी हैं, जाह्नवी के कॉस्ट्यूम और ड्रेसिंग सेंस दर्शकों को इंप्रेस करने में सफल रहे हैं। जाह्नवी फिल्म में बहुत ही खबूसूरत लग रही हैं।अदाकारी में जाह्नवी ने अपनी मां इम्प्रेशन क्वीन श्रीदेवी के तय किए पैमाना को पूरी तरह निभाती नज़र आई।जाह्नवी और ईशान की ऑन स्क्रीन केमिस्ट्री देखते ही बनती है। ठाकुर रतन सिंह के रोल में आशुतोष राणा का जवाब नहीं। मधुकर के दोस्त बने अंकित बिष्ठ और श्रीधरन अपने अपने रोल में फिट रहे।

फ़िल्म में एक सीन ख़ास है जब ईशान और जाह्नवी सड़क पर लड़ती दिखी,वो कहती हैं, हां सब मेरी ही ग़लती है।ऐसा लगता है वो कह रही हो,श्रीदेवी की बेटी होना और सैराट फ़िल्म का रीमेक करना फ़िल्म आलोचकों की नज़र में मेरा एक अक्षम्य अपराध है।

फ़िल्म का क्लाइमेक्स में क्या होने वाला है इसका ऐहसास होने के बावजूद दर्शकों को ज़ेहन पर यह सीन अमिट छाप अंकित कर देगा।

आज के दौर में जब इश्क़ भी सोंच समझ कर किया जाता है ऐसे दौर में सरधर को दांव पर लगा कर इश्क़ करने वाले प्रेमी की प्रेम कहानी कहती फिल्म "धड़क" को आप थिएटर में देख कर पूरा इंजॉय करेंगे।
Labels:
Reactions:

Post a Comment

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget