जानिए किस राशि पर रहेगा चन्द्रग्रहण की छाया का प्रभाव

गुरु पूर्णिमा


इस वर्ष गुरु पूर्णिमा पर चन्द्रग्रहण की छाया, जानिए  ज्योतिषाचार्य पं गणेश मिश्र, किस राशि पर रहेगा ग्रहण का प्रभाव 
दृक्सूत्रसंस्थौ भवत: कुभेन्दू भूपृष्ठदेशेsपि यत:सदात:।
स्यात् पूर्णिमायां ग्रहणं सुधांशोर्नैवं रवेदर्शविरामकाले।।
ज्योतिषाचार्य पं गणेश मिश्र, लब्धस्वर्णपदक, ज्योतिष विभाग काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने बताया कि चन्द्रादि ग्रहों में अपना स्वयं का प्रकाश तो होता नही है, वे सूर्य की किरणों के संयोग होने से मिलने वाले प्रकाश के कारण से चमकते हैं अर्थात् चन्द्र बिम्ब के जितने भाग पर सूर्य की किरणें पड़ती है उतना ही भाग प्रकाशित होता है शेष भाग अन्धकार के रूप में ही रहता है। सूर्य की किरणें सभी ओर समान रूप से फैलती है तथा सूर्य से कम मान होने के कारण, भू बिम्ब से रोके जाने से आकाश में अन्धकार के रूप में सूची (सूई जैसी नोक) जैसा आकार बनती है। वही पृथ्वी की छाया का अन्धकार स्वरूप राहु कहलाता है, इसे ही भूभा करके हैं। वह सूचीकार बहुत दीर्घ होने से चन्द्र कक्षा से भी दूर तक जाती है, लेकिन सूर्य के क्रान्तिवृत्त में भ्रमण करने से सामने रहने वाली सूची (भूभा) चन्द्र कक्षा में स्थित क्रान्तिवृत्त से लगी होती है। जब चन्द्रमा अपनी गति से चलता हुआ अपने विमण्डल वृत्त में उस भूभा में प्रवेश करता है तो चन्द्र बिम्ब पर सूर्य बिम्ब की किरणें नही पड़ पाती जिससे चन्द्र बिम्ब के उस भाग में प्रकाश नही होता। उस समय क्रान्तिवृत्त एवं विमण्डल वृत्त के अन्तराभाव होने से उनका दक्षिणोत्तर अन्तर नही होता तथा भूभा एवं चन्द्र बिम्ब के राश्यादि मान समान होने से उनका पूर्वापरान्तर नही होता जिससे चन्द्र बिम्ब में स्थित भूभा ग्राहक, ग्राह्य चन्द्र बिम्ब का ग्रहण करती है। तभी चन्द्र ग्रहण होता है। ऐसी स्थिति पूर्णिमान्तकाल में होती है। पूर्णिमान्तकाल में भू बिम्ब से दोनों ओर सूर्य एवं चन्द्र बिम्बों की स्थिति एक दूसरे से 180 अंश अर्थात् 6 राशि के अन्तर पर होती है।

शुक्रवार (27 जुलाई 2018) को लगने वाला चन्द्रग्रहण भारत में खग्रास चन्द्रग्रहण के रुप में दृश्य होगा। भारतीय मानक समयानुसार ग्रहण का प्रारंभ रात्रि 11 बजकर 54 मिनट पर, मध्य रात्रि 1 बजकर 52 मिनट पर तथा मोक्ष रात्रि 3 बजकर 49 मिनट पर होगा। ग्रहण का स्पर्श, मध्य, मोक्ष पूरे भारत में दृश्य होगा। सम्पूर्ण ग्रहण अवधि 3 घण्टा 55 मिनट है। चन्द्र ग्रहण में ग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक होता है। जो दिन में 2:54 से ग्रहण समाप्त होने तक, रहेगा।

सूतक काल में भोजन तथा पेय पदार्थों के सेवन की मनाही की गयी है तथा देव दर्शन वर्जित माने गये हैं। हमारे ऋषि मुनियों ने सूर्य चन्द्र ग्रहण लगने के समय भोजन करने के लिये मना किया है, क्योंकि उनकी मान्यता थी कि ग्रहण के समय में कीटाणु बहुलता से फैल जाते हैं। इसलिये ऋषियों ने पात्रों में क़ुश अथवा तुलसी डालने को कहा है, ताकि सब कीटाणु कुश में एकत्रित हो जायें और उन्हें ग्रहण के बाद फेंका जा सके। ग्रहण वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। पात्रों में अग्नि डालकर उन्हें पवित्र बनाया जाता है, ताकि कीटाणु मर जायें। 

ग्रहण काल में न करने योग्य बातें 

  1. ग्रहण की अवधि में तेल लगाना भोजन करना, जल पीना, सोना, केश विन्यास करना,
  2. रति क्रीडा करना, मंजन करना, वस्त्र नीचोड़्ना, ताला खोलना, वर्जित किए गये हैं।
  3. ग्रहण के समय सोने से रोग पकड़ता है, मल त्यागने से पेट में कृमि रोग पकड़ता है, स्त्री प्रसंग करने से सूअर की योनि मिलती है और मालिश या उबटन किया तो व्यक्ति कुष्ठ रोगी होता है।
  4. देवी भागवत में आता हैः सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य
  5. जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुतुन्द नामक नरक में वास करता है। फिर वह उदर रोग से पीड़ित मनुष्य होता है फिर गुल्मरोगी, काना और दंतहीन होता है।
  6. सूर्यग्रहण में ग्रहण से चार प्रहर पूर्व और चंद्रग्रहण में तीन प्रहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए (1 प्रहर = 3 घंटे) बूढ़े, बालक और रोगी एक प्रहर पूर्व खा सकते हैं ।
  7. ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ना चाहिए।
  8. 'स्कंद पुराण' के अनुसार ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से बारह वर्षो का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो जाता है।
  9. ग्रहण के समय कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।
  10. ये शास्त्र् की बातें हैं इसमें किसी का लिहाज नहीं होता।

ग्रहण काल में करने योग्य बातें 

  1. ग्रहण लगने से पूर्व स्नान करके भगवान का पूजन, यज्ञ, जप करना चाहिए।
  2. भगवान वेदव्यास जी ने परम हितकारी वचन कहे हैं- चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना और सूर्य ग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है।
  3. ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है।
  4. ग्रहण समाप्त हो जाने पर स्नान करके ब्राम्हण को दान करने का विधान है ।
  5. ग्रहण के बाद पुराना पानी, अन्न नष्ट कर नया भोजन पकाया जाता है, और पानी ताजा भरकर पीया जाता है।
  6. ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो, उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए।
  7. ग्रहणकाल में स्पर्श किये हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी वस्त्र सहित स्नान करना चाहिए।
  8. ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरत मंदों को वस्त्र् दान देने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।

गर्भवती स्त्रियों के लिये विशेष सावधानी 

गर्भवती स्त्री को सूर्य –चन्द्रग्रहण नहीं देखना चाहिए, क्योकि उसके दुष्प्रभाव से शिशु अंगहीन होकर विकलांग बन जाता है। गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है। इसके लिए गर्भवती के उदर भाग में गोबर और तुलसी का लेप लगा दिया जाता है, जिससे कि राहू केतू उसका स्पर्श न करें।

ग्रहण के दौरान

  • गर्भवती स्त्री को कुछ भी कैंची, चाकू आदि से काटने को मना किया जाता है, और किसी वस्त्र आदि को सिलने से मना किया जाता है।
  • क्योंकि ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से शिशु के अंग या तो कट जाते हैं या फिर सिल (जुड़) जाते हैं ।।

ग्रहण फल....

  • मेष - सुख
  • वृष- माननाश
  • मिथुन- मृत्युतुल्यकष्ट
  • कर्क- स्त्रीपीड़ा
  • सिंह- सौख्य
  • कन्या- चिन्ता
  • तुला- व्यथा
  • वृश्चिक- श्री
  • धनु- क्षति
  • मकर- घात
  • कुम्भ- हानि
  • मीन- लाभ
विशेष-इस दिन गुरु पूर्णिमा का उत्सव एवं गुरु पूजन इत्यादि सूतक काल (2:54) से पूर्व सम्पन्न करना सही रहेगा।

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