मॉब लिंचिंग - जरुरत है नफरत फैलाने वाली मनसिकत पर लगाम लगाने की

मॉब लिंचिंग


डिजिटल टीम
न्यूज डेस्क,उर्जांचल टाइगर 

क्या  ऐप ही जिम्मेदार है  मॉब लिंचिंग के लिए है? दरअसल ऐप एक माध्यम जरुर है,लेकिन असली दोषी वो मानसिकता है जो ऐसे अफवाह को फैलाती है,और इसका मुख्य दोषी वे लोग हैं जो ऐसी मानसिकता को पोषण दे रहें हैं।

दोषियों को सजा देने के बजाय सिर्फ ऐप बनाने वाले कंपनी पर अंकुश लगाने से नफ़रत फैलाने,और हिंसक बनाने वाले विचार में कमी तो आसकता है लेकिन ख़त्म नहीं होगा। अपना रंग बदल बदल कर कभी गोरक्षा के नाम पर,कभी लव जिहाद के नाम पर,कभी बच्चा चोर के नाम पर और कभी .....के नाम पर लोगों को सरेराह क्रूरतापूर्वक हत्या करते रहेंगें। जरुरी है दोषियों को सजा देने की।

सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मॉब लिंचिंग रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने को कहा है। सोशल मीडिया पर बच्चा चोरी की अफवाहों के बाद भीड़ द्वारा पीट - पीटकर मार डालने की घटनाओं को रोकने के लिये उचित कदम उठाने के लिए कहा है।

देश भर में बीते दो महीनों में बच्चा चोरी के शक में 20 से अधिक लोगों को पीट - पीट कर मार डाला गया है और ताजा मामला महाराष्ट्र के धुले जिले का है जहां भीड़ ने पांच लोगों की पीट - पीट कर जान ले ली। 

गृह मंत्रालय ने एक परामर्श में राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से कहा की "बच्चा चोरी की अफवाहों का जल्दी पता लगाने के लिये पैनी नजर रखने और उन्हें रोकने के लिये असरदार उपाय शुरू करने।" 

राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से जिला प्रशासनों को असुरक्षित क्षेत्रों की पहचान करके जागरूकता फैलाने तथा विश्वास बहाल करने का निर्देश देने को कहा गया। 

राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से प्रभावित लोगों में विश्वास पैदा करने के लिये बच्चों के अपहरण की शिकायतों की जांच उचित ढंग से करने को कहा गया। 

ज्ञात हो कि मंगलवार को सरकार ने व्हाट्सएप को, ‘‘ गैरजिम्मेदार एवं बवाल मचाने वाले संदेशों ’’ को फैलने से रोकने के लिये तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया था।

फेसबुक के स्वामित्व वाली कंपनी वॉट्सऐप ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना तकनीक मंत्रालय को एक पत्र लिखा है। पत्र में कंपनी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में हुए हिंसा के मामलों पर वह भी चिंतित है।


वॉट्सऐप ने सरकार से कहा,"वह प्लैटफॉर्म पर फैलाई जा रहीं फर्जी खबरों और गलत सूचनाओं को लेकर चितिंत है। इस मामले में सरकार, समाज और टेक्नॉलजी कंपनियों को साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।" 
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