निर्माण श्रमिक मामला- सुप्रीमकोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाईं फटकार,हलफनामे को बताया झूठा

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डिजिटल टीम
नई दिल्ली,उर्जांचल टाइगर 

सुप्रीमकोर्ट ने निर्माण श्रमिकों के कल्याण की योजना का मसौदा श्रम मंत्रालय की वेबसाइट पर नहीं डालने पर मंगलवार को केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। केंद्र के हलफनामे को ‘पूरी तरह झूठा’ बताया।

अदालत ने कहा कि वह गरीबों के लिए 30 हजार करोड़ रुपये की योजना का मजाक बना रही है।

जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, ‘आप इसका मजाक बना रहे हैं।
30 हजार करोड़ रुपये दांव पर हैं। कौन परेशान हो रहा है? ये गरीब लोग। क्या यही करुणा और सहानुभूति है जो आप गरीब जनता के प्रति दर्शा रहे हैं।’ 
पीठ ने केंद्रीय श्रम सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि उसके आदेश का अनुपालन क्यों नहीं हुआ।

कैग ने दी थी चौंकाने वाली रिपोर्ट

शीर्ष अदालत ने इससे पहले भी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा हलफनामा दाखिल करने के बाद केंद्र को आड़े हाथ लिया था। इसमें कहा गया था कि निर्माण श्रमिकों के कल्याण के निमित्त बने कोष का एक हिस्सा तो लैपटाॅप और वाशिंग मशीनों की खरीद पर खर्च कर दिया और 10 फीसदी से कम राशि को इसके असली उद्देश्य पर खर्च किया गया।

यह तथ्य सामने आने पर शीर्ष अदालत ने सरकार को निर्देश दिया था कि 30 सितंबर तक देशभर के निर्माण मजदूरों के कल्याण के लिए एक मॉडल योजना तैयार की जाये, जिसमे उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और पेंशन जैसे मुद्दे शामिल हों।

मंगलवार को सुनवाई शुरू होते ही केंद्र के वकील ने पीठ के समक्ष हलफनामा पेश किया और कहा कि इन श्रमिकों के कल्याण हेतु एक माॅडल योजना का मसौदा श्रम मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। 

जस्टिस लोकूर ने इस पर कहा, ‘मैंने इसे कल ही देखा है। वेबसाइट पर कुछ नहीं है।’ 

वकील ने जब जोर देकर कहा कि वेबसाइट पर मसौदा है और मंत्रालय ने ऐसा हलफनामे में भी कहा है तो पीठ ने पलट कर कहा, ‘यह सरासर गलत है। यह अब वहां क्यों नहीं है? 

इसके बाद वकील ने पीठ से कहा कि यह योजना करीब एक महीने तक वेबसाइट पर थी और इसे बाद में हटा दिया गया। पीठ ने सवाल किया, ‘क्यों? यह सब क्या हो रहा है? आप हमें बतायें कि आप किसको मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आपका हलफनामा पूरी तरह गलत है। 

आपने इसे सिर्फ एक महीने के लिए ही वेबसाइट पर क्यों रखा?’ तल्ख टिप्पणी करते हुए पीठ ने कहा, ‘आप अपने श्रम मंत्रालय के सचिव को बुलाए। हम जानना चाहते हैं कि यह सब क्या हो रहा है।’
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