मध्यप्रदेश में “कारवान-ए-मोहब्बत”

मध्यप्रदेश में “कारवान-ए-मोहब्बत”



भोपाल।।
 “केंद्र में वर्तमान सरकार के आने के बाद से अल्पसंख्यक और दलित समुदाय के लोगों पर सुनियोजित भीड़ द्वारा जानलेवा हमलों के मामले बढ़े हैं, अगर इसपर सख्ती से रोक नहीं लगायी गयी तो जल्द ही हम एक विखंडित समाज बन जायेंगें.” उपरोक्त बातें मध्यप्रदेश में “कारवान-ए-मोहब्बत” की यात्रा के लिये आये वरिष्ठ मानव अधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने भोपाल में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान कहा.


उन्होंने बताया कि देश भर में लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुये सितम्बर 2017 से देश भर में “कारवान-ए-मोहब्बत” नाम से यात्रा निकाली जा रही है जिसका मुख्य उद्देश्य भीड़ की हिंसा के खिलाफ अमन और सद्भावना का सन्देश देना है. कारवान के दौरान भीड़ की हिंसा के शिकार लोगों और उनके परिजनों से मिलकर यह सन्देश देने की कोशिश की जाती है कि एक समाज के तौर पर हम उनके साथ खड़े हैं. इसी सन्दर्भ में मध्यप्रदेश में 9 से 11 अगस्त 2018 के दौरान “कारवान-ए-मोहब्बत” की यात्रा की गयी जिसमें देश के जानेमाने मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर और जॉन दयाल के अतिरिक्त मध्यप्रदेश के सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल थे.

हर्षमंदर ने बताया कि मध्यप्रदेश में “कारवान-ए-मोहब्बत” के दौरान हम लोग 9 अगस्त को सतना जिले के मैहर गये जहाँ इसी साल 17 मई की रात को पास के गावं में भीड़ द्वारा गाय-बैल को काटने के नाम पर दो लोगों पर प्राणघातक हमला किया गया जिसमें सिराज खान की मौत को गयी और शकील अहमद गंभीर रूप से घायल हैं. वर्तमान में उनके हाथ के एक्सरे को देखने पर हड्डियों से ज्यादा नट-बोल्ट दिखाई दे रहे हैं. इसके बाद 14 दिसम्बर 2017 में सतना जिले में ईसाई लोगों पर धर्म परिवर्तन के नाम पर मार-पीट के शिकार लोगों से मुलाक़ात की गयी .

उन्होंने बताया कि टीम द्वारा 10 अगस्त को मध्यप्रदेश के हरदा जिले के छीपाबड़ का दौरा किया गया जहाँ 19 सितंबर 2013 को गाय के नाम साम्प्रदायिक हिंसा हुई थी जिसमें 4-5 हजार लोगों की भीड़ द्वारा छीपाबड़ वार्ड 14 के नर्मदा विस्थापित मुस्लिम समुदाय के करीब 30 घरों को आग के हवाले कर दिया गया था और उनके सम्पति को को हानि पहुँचायी गयी थी और लोग गंभीर रूप से घायल भी हुये थे. टीम द्वारा मोहम्मद हुसैन से भी मुलाक़ात की गयी जो 13 जनवरी 2016 को अपनी पत्नी के साथ ट्रेन में यात्रा कर रहे थे. इस दौरान खिरकिया रेलवे स्टेशन पर उनके बैग में बीफ होने के शक के आधार पर उनके साथ ट्रेन में अभद्रता की गयी.

यात्रा के दौरान “कारवान-ए-मोहब्बत” के साथियों द्वारा स्थानीय संगठनों/ नागिरकों और मीडिया के साथ संवाद भी किया गया.


प्रेस वार्ता के दौरान वरिष्ठ पत्रकार और मानव अधिकार जॉन दयाल ने कहा कि “कारवान-ए-मोहब्बत” के तहत अभी तक हम 12 राज्यों की यात्रा कर चुके हैं और इस दौरान हमने पाया है कि एक समाज के तौर पर हमने पीड़ितों को बिलकुल छोड़ दिया है जो कि बहुत चिंताजनक बात है, इस यात्रा से हम मोहब्बत और आपसी बन्धुतत्व का पैगाम देना चाहते हैं, लड़ाई लम्बी है और हम थोड़े लोग हैं लेकिन “कारवान-ए-मोहब्बत” जहां जाती है वहां हमारे साथ नये साथी जुड़ जाते हैं जो हमें हौसला देता है. जबतक समाज को शर्मसार करने वाली लिंचिंग जैसी घटनायें होती रहेगी मोहब्बत की हमारी ये यात्रा यूं ही जारी रहेगी.
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