राजनीति के कठजोकर (व्यंग्य)

व्यंग्य

 (Source: Amul_Coop/Twitter)
वातानुकूलित कक्ष में बैठने वाले ये खद्दरधारी अपने कृत्यों से अपने साथ साथ किसी का भी पसीना छूटा दे। 

विनोद कुमार विक्की 
भारत की राजधानी में एक भवन है राष्ट्रीय मनोरंजन कक्ष जहाँ पूरे हिन्दुस्तान से कुल मिलाकर 552 (वर्तमान 545) गण मान्य का जमावड़ा होता है। 

बेरोजगारी,भुखमरी,भ्रष्टाचार,गरीबी आदि समस्याओं से त्रस्त देश की जनता इन समस्याओं से निदान के लिए इन्हें बड़े आस उम्मीद से दिल्ली के इस भवन में भेजती है किंतु ये खादी के पुतले इस भवन में साथ मिलकर समस्या समाधान की बजाय अपनी कठजोकरी एवं आरोप-प्रत्यारोप में पांच वर्षों तक उलझे रहते है। 

इस भवन के गणमान्य सदस्य अपनी हरकतों एवं कारगुजारी के लिए दूरदर्शन से लेकर दूर देश तक अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।ये आपस में किसी मुद्दे पर एक दूसरे से ऐसे वाक् युद्ध करते है जैसे दो सहोदर भाई या पड़ोसी आपस में जमीन के लिए भिड़े होते है।बात बढ़ते बढ़ते अपशब्द व कुर्सी फेका फेकी तक पहुंच जाती है।इनकी हरकत से आजिज़ सदन के असहाय अध्यक्ष अनुशासन की दुहाई देकर दोनों पक्षों को उसी तरह शांत रहने का अनुरोध करते है जिसप्रकार सरकारी विद्यालय में निर्बल माॅनीटर कक्षा में शोर मचा रहे अपने से बलशाली अशिष्ट व उदंड सहपाठियों को कक्षा में शांति बनाए रखने की याचना करता है। 

कभी-कभी कुछ सदस्य हिंसक होकर जूता चप्पल कुर्सी को ही हथियार की तरह इस्तेमाल करने लगते है। 

वातानुकूलित कक्ष में बैठने वाले ये खद्दरधारी अपने कृत्यों से अपने साथ साथ किसी का भी पसीना छूटा दे। 

कभी-कभी इस सदन के कुछ सदस्य अपने आवास से सुबह सुबह जाने वियाग्रा की कौन सी खुराक का सेवन कर सदन पहुँच जाते है कि दैनिक कार्यवाही के दौरान ही ये दिन दहाड़े मोबाइल पर नीली नीली फिल्म देखने में लग जाते है।कभी कोई खादी मानव भरी सदन में अपनी कविता की दुकान खोलकर बैठ जाता है तो कोई शेरों शायरी से सदन को मुशायरा बना देता है। 

कभी किसी राज्य के निर्माण मुद्दे पर कुछ महानुभाव फाॅग डियो की तरह काली मिर्च का स्प्रे छिड़कने लगते है तो कभी सर्कस के रिंगमास्टर की तरह हंटर फटकाने लगते है कभी मुहल्ले के दादा की तरह चाकू लहराने लगते है तो कभी कपि मानव बन माइक का तार नोचना शुरू कर देते है। 

बिना पार्टी (निर्दलीय) वाले खादी मानव से राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष सहित वज़ीर तक इस सदन को मनोरंजन कक्ष ही समझते है। हाल ही में संसदीय कार्यवाही के दौरान राष्ट्रीय पार्टी के एक बड़े नेता अपनी हरकतों से एक सीन में संजू बाबा की तरह जादू की झप्पी देते तो दूसरे दृश्य में प्रिया प्रकाश की तरह नयन मटक्का कर रामदेव बाबा के पोज़ में कैमरे में कैद हो गए।और तो और वज़ीर-ए- आला भी हाथों के इशारों से पूरे सदन को सर्कस दिखा कर मनोरंजन करते दिख गए।सदन में हंसी-ठिठोली तो ऐसे होती है मानों कपिल शर्मा का प्रोग्राम चल रहा हो। 

पक्ष विपक्ष के ऐसे महापुरुषों के पास विकास का डिप्लोमा सर्टिफिकेट तो नहीं होता किंतु हंसी मजाक, हो हल्ला, वाक आउट आदि पर इन्होंने पीएचडी कर रखी है। 

ये आगामी चुनाव तक राष्ट्रीय समस्या के निवारण या विकास को भूलकर सदन में अपनी हास्यास्पद असाधारण प्रतिभा के प्रदर्शन से एक दुसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में उलझे रहते है और अपनी हरकतों से सुर्खियों में रहकर अपने साथ साथ देश की जनता को भी मीडिया, सोशल मीडिया व प्रिंट मीडिया में उलझाए रखते है। 


लेखक - विनोद कुमार विक्की स्वतंत्र लेखन सह व्यंग्यकार

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