‘‘बाजारों में भटक रहा है बेचारा इंसान’’

काव्य गोष्ठी


भोपाल। हिंदी भवन में आयेाजित काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि तेज कुमार तेज को सम्मानित किया गया। उनके गाये हुए गीत ‘‘बाजारों में भटक रहा है बेचारा इंसान, थैले भर पैसों से लाता मुट्ठी भर सामान,’’ को सभी ने बहुत सराहा। कवि अशोक निर्मल जी ने कहा: किश्तों पे मिल जाए तो तेरे नाम पे ताज लिखूं।’’

काव्यगोष्ठी में कवि हृदय अटल जी और रक्षाबंधन पर भी रचनाएं सुनाई गईं। कवयित्री निकिता ने हिंद है ये देश मेरा, हिंदी इसकी भाषा है,’’ प्रेम कुमार ने प्रीति का सुख अनोखा सजन दे गए, चांदनी रात दी और तपन दे गए,’’ अशोक व्यग्र ने ‘‘मुझ पर छाओ अमरबेल बन मैं वटवृक्ष बनूं’’ सुनाकर प्रसंशा पाई। शायर रामगोपाल ने गजल कही ‘‘तुम्हारी यादें चहक रही हैं, मेरे दिल में गजल बनके,’’ कवयित्री अनिता श्री ने पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृति में बेटियों की सुरक्षा को लेकर कविता सुनाई ‘‘मासूम की वेदना बहुत सताती है, इसलिए मुझको नींद नहीं आती है,’’ अशोक घायल ने रक्षाबंधन पर केन्द्रित भाई-बहिन को लेकर रचनापाठ किया। कवयित्री क्षमा ने भी बेटियों पर आधारित कविता पाठ किया। उन्होंने गीतबद्ध होकर कहा- ‘‘बेटियों से हम सभी हैं, हम सभी माॅ-बेटियों से,’’ काव्य गोष्ठी का संचालन कर रहे भूपेश जी ने सुनाया ‘‘सदा प्रेम का धागा बांधा ऐसे थे अटल जी,’’

गौरीशंकर नीर ने सुनाया ‘‘एक बाग के फूल सभी एक चमन है हमारा,’’ विनोद कुमार ने ‘‘नहीं थका मैं फिर भी अब तक,’’ सतीश श्रीवास्तव ने ‘‘आने दो आने कभी चार आने,’’ आशीष शर्मा ने ‘‘कब होगा दीनानाथ प्रभू अवतार आपका,’’ डाॅ. मीनू पांडे ने ‘‘राशि समान हो तो भी काम समान नहीं होते,’’ ऊषा सक्सेना ने ‘‘सूरज ने अनुबंध लिखे हैं’’ सुनाया। पुरूषोत्तम ने ‘‘मन में कैसी पीड़ा है, आज न कोई गीत लिखा,’’ अंत में आभार प्रदर्शन कवि अशोक व्यग्र ने किया।

काव्य गोष्ठी में इस बार वरिष्ठ कवि तेज कुमार तेज को सम्मानित किया । इससे पहले कवयित्री सीमा शर्मा का सम्मान किया जा चुका है।
Reactions:

Post a Comment

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget