आस्था की प्रतीक कांवड यात्रा में न हो उदंड़ता

कांवड यात्रा

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दिल्ली से हरिद्वार के बीच कई ऐसी घटनाएं अभी सामने आ चुकी हैं जहां कावंड़ियों ने हुड़दंग मचाया है। 
रमेश ठाकुर
कांवड यात्रा में उदंडता न हो इसके लिए राज्य सरकारों की सतर्कता के चलते यात्रा अमन-शांति के साथ अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। इस बार खुफिया एजेंसियों के पास ऐसे सूचनाएं थी कि कांवड यात्रा में आतंकी खलल डाल सकते हैं। धर्म को बदमान करना और धर्म के आड़ में षडयंत्र रचकर धार्मिक सौहार्द को बिगाड़ने जैसी घटनाएं देश में अब आम हो गई हैं। 

इस समय पूरे देश में कांवड़ यात्रा निकाली जा रही है। हर साल की तरह इस बार भी हिंदुस्तान के विभिन्न जगहों से कुछ कावंड़ियों द्वारा छुटपुट उत्पात मचाने की घटनाएं सामने आई हैं। लेकिन इस बार प्रशासन के पास कुछ खुफिया सूचनाएं थी कि कांवड़ियों की टोली में कुछ शरारती तत्व भी हो सकते हैं। गुप्त सूचनाओं के आधार पर पूरे देश में प्रशासन अर्लट है। यात्रा शांति के साथ आगे बढ़ रही है। अभी तक कोई बड़ी घटना की सूचना नहीं मिली है।

करीब महीने भर पहले ही कांवड़ यात्रा को लेकर खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट जारी कर 28 जुलाई से 8 अगस्त तक होने वाली यात्रा के दौरान कुछ असामाजिक तत्व गड़बड़ी कर सकते हैं, को लेकर स्थानीय प्रशासन को अवगत करा दिया था। हालांकि यात्रा अमन-शांति के साथ अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। कांवड़ यात्रा के दौरान स्थानी पुलिस, एलआईयू, एनएसजी और एटीएस नजर बनाए हुए है। हरिद्वार से लेकर दिल्ली तक प्रशासन ने अपनी गिद्व नजर बनाई हुई है। 

गलत सूचना या अफवाह के चलते कोई अनहोनी न हो इसके लिए भी व्यवस्था पूरी तरह से चाकचौबंद की हुई है। गौहत्या को लेकर अफवाह के चलते जिस तरह से पूरे हिंदुस्तान में गत दिनों भीड़ द्वारा लोगों को मारा गया, उससे केंद्र व राज्य सरकारें सर्तक हैं। खुदा न खास्ता कावंड़ियों में भी ऐसी कोई अफवाह फैली उसे नियंत्रित करने के लिए सरकारी अमला कमर कसे हुए है। लेकिन कुछ शरारती तत्व फिर भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। दिल्ली से हरिद्वार के बीच कई ऐसी घटनाएं अभी सामने आ चुकी हैं जहां कावंड़ियों ने हुड़दंग मचाया है। 


गौरतलब है कि किसी भी धार्मिक जुलूस, उत्सव की अपनी मर्यादा होती है। सावन का माह कावंड यात्रा का होता है। क्योंकि सनातन धर्म में सावन के महीने को सबसे पाक माना गया है। इस माह में शिव की अराधना की जाती है। शिव भगवान में आस्था रखने वाले देश-विदेश के भक्त पूरे माह मंदिरों में शिव के जयघोष करते हैं। प्राचीन समय से ही आस्था की प्रतीक माने जाने वाली कावंड यात्रा निकाली जाती है। कांवडिए मिलों दूर पैदल चलकर हिरद्वार गंगा का जल लेने जाते हैं। कांवडियों को कोई असुविधा न हो इसलिए लिए प्रशासन द्वारा इनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए विशेष इंतेजाम किए जाते हैं। इनके सुविधाओं के लिए जगह-जगह स्वास्थ्य कैंप लगाए जाते हैं जिनमें हिंदु-मुसिलम सभी धर्म के लोग इनकी सेवा करते हैं। खाने-पीने के बंदोबस्त किए जाते हैं। लेकिन कुछ कावंडिए प्रशासनिक सुविधा का गलत इस्तेमाल करते हैं। कांवडियों के भेष में कुछ लोग उत्पाद मचाते हैं। राहगीरों से उलझते हैं। बिना हेलमेट के सड़कों पर बेतरतीब वाहन चलाते हैं। ऐसा न करने से कोई उन्हें टोकता है तो उससे बेबजह उलझ जाते हैं। दरअसल प्रशासनिक सुविधा और विशेष सहूलियत को कावंडिए उत्पात मचाने का लाइसेंस समझ बैठते हैं। उनका यह कृत्य पूरे सनातन धर्म को शर्मसार करता है। सड़कों पर कई बार कावंडिए खुलेआम शराब के नशे में हंगामा काटते भी देखे जाते हैं। ऐसा करके ये लोग पुण्य के जगह पाप ही कमाते हैं। 

धार्मिक आस्थाओं की जहां तक बात है तो केंद्र सरकार को सभी धर्माें के समान रक्षा-सुरक्षा के तौर पर तत्परता दिखानी चाहिए। लेकिन कुछ अदृश्य शक्तियां सौहार्द को खराब करने की फिराक में रहती हैं। सभी धर्मों में एकजुटता हो, शायद ऐसा कुछ लोग नहीं चाहते। कावंड़ यात्रा हो, या ताजिए का जुलूस, अमरनाथ यात्रा हो या हज यात्रा। सभी में सरकार को अपनी निष्ठा दिखानी चाहिए। कावंड यात्रा को भी विफल करने का षड़यंत्र रखा जा रहा है। कुछ शक्तियों के नापाक इरादे कावंड यात्रा में पेशेवर अपराधियों को शामिल करके सौहार्द को बेरंग करने की फिराक में हैं। लेकिन वह अपने मंसूबों में कतई कामयाब नहीं होने वाले। क्योंकि हर कावंडियों पर प्रशासन की गहरी नजर है। सभी रास्ते सीसीटीवी कैमरों से लैस हैं। उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से सतर्कता बरती जा रही है। क्योंकि सूबे की सरकार को कावंड यात्रा शुरू होने से पहले की कांवड़ियों के रूप में गड़बड़ी करने वाले असामाजिक तत्वों के संबंध में गुप्त सूचनाएं मिल चुकी थी। हालांकि जो सूचनाएं मिली थी उनमें किसी निश्चित स्थान या तारीख का जिक्र नहीं किया गया था। लेकिन एतियातन सूबे की योगी सरकार ने अलर्ट को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सभी जिलों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। 


खैर, जिस तरह के संकेत मिले थे वैसी कोई घटना नहीं घटी। कुछ छुटपुट घटनाएं जरूर सामने आईं। रूड़की के पास गत दिनों कुछ कांवड़ियों द्वारा स्कूली लड़कियों पर केले के छिलके फेंकने और अभद्र टिप्पणी करने की घटना सामने आई थी। लेकिन स्थानीय प्रशासन की सतर्कता के चलते मामला शांत हो गया। उन कांवडियों की पूरी जांच पड़ताल करने के बाद हिदायत देकर आगे जाने दिया। प्रशासन ने इस बार एक और अच्छा काम किया। कांवड़ यात्रा को इस बार पूरी तरह से पॉलिथीन मुक्त रखा गया। इसके अलावा कावंड मार्ग पर शराब और मांस की बिक्री को पूरी तरह से बंद रखा गया है। आने-जाने वाले लोगों पर गहन निगरानी के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है जिससे कांवड यात्रियों को पल-पल की जानकारी दी जा रही है। कंट्रोल रूम इसलिए बनाया गया है इससे कांवडियों के गायब होने की संभावनाएं खत्म होंगी। क्योंकि पिछले कई सालों से कई कांवडियों के रहस्यमय तरीके से गायब होने की घटनाएं सामने आईं थीं। इसके अलावा कांवड़ यात्रा के दौरान यातायात को जीपीआरएस से नियंत्रित किया जा रहा है। पूरे रूट को जीपीएस मैपिंग से जोड़ा गया है। प्रशासन के पुख्ता इंतजाम किसी भी अनहोनी घटना से लड़ने के लिए प्रयाप्त हैं। कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मी भी इस बार शिव भक्तों की वेशभूषा में तैनात हैं। कोई भी असमाजिक शरारती तत्व कांवड़ियों के भेष में किसी तरह से कानून व्यवस्था में खलल न डाल पाए इसके पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उम्मीद करनी चाहिए कि हर बार भी ऐसे ही सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए ताकि कांवड यात्रा में किसी तरह का कोई व्यवधान नहीं हो।

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