शक्तिनगर-तेल के खेल का चोर पकड़ा गया,असल खिलाड़ी पे कार्यवाही कब होगा?

तेल का खेल,शक्तिनगर, सोनभद्र समाचार


नौशाद अंसारी
ब्यूरो, सोनभद्र, उर्जान्चल टाइगर

शक्तिनगर परिक्षेत्र में चल रहे तेल का खेल कितने बड़े पैमाने पर खेला जा रहा है इस बात का अंदाज बीती रात डीजल से भरे 29 डब्बों के साथ एक डीजल चोर के पकड़े जाने से लगाया जा सकता है। यह तो महज़ एक बानगी है,परियोजना के सिक्योरिटी के मेहरबानों और डीजल माफियाओं के गठजोड़ द्वरा परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर किए जा रहे डीजल  लूट का।
भले ही प्रशासन इस कार्यवाही के बाद अपनी पीठ थपथपा ले लेकिन यह भी एक कड़वा सच है के,सिर्फ प्यादे ही पकड़े जाते हैं,वज़ीर और बादशाह का गिरफ्तारी तो दूर उनका नाम तक उजागर नहीं कर पाती स्थनीय प्रशासन।

कैसे पकड़ा गया डीजल चोर।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शक्तिनगर एनसीएल खड़िया प्रोजेक्ट में 6 जुलाई की रात में 29डब्बा डीजल भरा हुआ डीजल चोरों द्वारा निकाल कर ले जाया जा रहा था तभी बजरिये मुखबिर द्वारा सटीक सुचना सिक्यूरिटी इंचार्ज को मिला इसके बाद सिक्यूरिटी इंचार्ज ने आनन फानन में इसकी सुचना शक्तिनगर पुलिस को दिया।

मौके पे शक्तिनगर पुलिस ने छापेमारी कर 29डब्बे डीजल (तक़रीबन 1000लीटर डीजल)के साथ एक डीजल चोर को पकड़ लिया।वहीँ स्थानीय पुलिस पूछताछ कर रही है।जल्द बड़े खुलासा की उम्मीद जतायी जा रही है।

कैसे खेला जाता है खेल 

लाख टके का सवाल अब भी अपनी जगह कायम है,कि परदे के पीछे के असली प्यादे अभी भी पकड़ से क्यों दूर है? सूत्रों की माने तो इस डीजल चोरी के खेल का असल कहानी ये है कि इस खेल का मास्टर माइंड एक सेना से रिटायर्ड मेजर है, इस मेजर को एनसीएल परियोजना में सिक्यूरिटी का काम दिया जाता है। मेजर यह काम किसी दूसरे पार्टी को दे देता है।उसके बाद सारा खेल शुरू होता है।

डीजल माफिया सिक्यूरिटी का काम कर रहे लोगों से मिलाकर डीजल चोरी करता है।इसमें सिक्यूरिटी का काम कर रहे लोगों को प्रति गैलन डीजल के हिसाब से पैसा मिलता है। 

कार्यवाही महज़ दिखावा ही लगता है।

इस डीजल के खेल में उर्जांचल के दो डीजल माफिया जो पहले खाकपति था आज करोड़पति बना बैठा है,का चर्चा होता रहा है लेकिन हर स्तर पर सेटिंग में माहिर इन दोनों तक कानून के हांथ पहुंच ही नहीं पाते । 

सरकार किसी की हो ,कोई फर्क नहीं पड़ता यह इनके सेटिंग की दक्षता को दर्शता है। कहते हैं न, गुलाबी नोटों का असर ही कुछ ऐसा होता है की सभी असरदार जिम्मेदार इनके दर पे जाकर बेअसर हो जाते हैं। ऐसे में प्यादों पर होने वाली कार्यवाही महज़ दिखावा ही लगता है।
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