मुजफ्फरपुर बालिका-गृह कांड के विरोध में जंतरमंतर पर धरना देंगे तेजस्वी

मुजफ्फरपुर बालिका-गृह कांड


नई दिल्ली।। मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की आंच दिल्ली की राजनीतिक गलियों तक पहुंच गई है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देंगे। इस धरना को गैर राजनीतिक करार देते हुए उन्होंने सभी लोगों से शामिल होने की अपील की है। जंतर-मंतर पर धरना देकर बालिका गृह में पीड़ित लड़कियों के लिए न्याय की मांग करेंगे।

धरने को लेकर तेजस्वी ने अपने ट्वीटर हैंडल के जरिए लिखा, 'मुजफ्फरपुर में प्रायोजित और नीतीश सरकार द्वारा संरक्षित जघन्य संस्थागत जन बलात्कार के खिलाफ हम शनिवार को जंतरमंतर पर धरना करेंगे।'

तेजस्वी यादव ने इस धरने को गैर राजनीतिक करार करते हुए आम लोगों से जुड़ने की अपील की है। कयास लगाया जा रहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित तमाम विपक्षी नेता शामिल होंगे।

क्या है बालिका गृह कांड

बता दें कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में 41 नाबालिग लड़कियां रह रही थी। जिनमें से 34 के साथ यौन हिंसा और बलात्कार की गई थी। घटना सामने आने के बाद सीबीआई मामले की जांच में जुट गई है।

घटना कैसे हुई उजागर

गौरतलब है कि इस मामले का खुलासा तब हुआ जब मुंबई की संस्था टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइसेंस की टीम ने बालिका गृह के सोशल ऑडिट रिपोर्ट में यौन शोषण का उल्लेख किया।

इसके बाद मुजफ्फरपुर महिला थाने में इस मामले की प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इसके बाद लड़कियों के चिकित्सकीय जांच में भी यहां की 41 लड़कियों में से 34 लड़कियों के साथ दुष्कर्म होने की पुष्टि हुई थी। इस मामले में अब तक मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर सहित 10 लोगों को गिरतार किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जवाब देना पड़ेगा।

तेजस्वी के मुताबिक ब्रजेश समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के साथ-साथ नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा का भी करीबी है। राज्य सरकार दोनों मंत्रियों को बचाने की कोशिश कर रही है। तेजस्वी ने कहा कि राज्य में खराब विधि-व्यवस्था पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जवाब देना पड़ेगा।

लालू प्रसाद यादव की वायरल हो रही तस्वीर पर तेजस्वी ने तोड़ी  चुप्पी।

तेजस्वी ने ब्रजेश ठाकुर के साथ लालू प्रसाद यादव की वायरल हो रही तस्वीर पर भी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि जिस तस्वीर को लेकर सत्ता पक्ष के प्रवक्ता हाय-तौबा मचा रहे हैं, वह 1990 की है। उस समय ब्रजेश रिपोर्टर था और उसके पास कोई एनजीओ नहीं था।

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