कौन सुने बच्चियों की चीखें

बच्चियां

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सच्चाई को न मानने से सच्चाई नहीं बदल जाएगी। 
अब्दुल रशीद 
देश के दिल दिल्ली के मंडावली इलाके में तीन बच्चियां शिखा, मानसी और पारुल अचानक दम तोड़ गईं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला कि उनके पेट में अन्न का एक दाना तक न था। मतलब यह की इन मासूमों को अन्न का एक दाना भी कई दिनों से नसीब नहीं हो सका था,और जिंदगी के लिए तड़प तड़प कर दम तोड़ दी। विडंबना देखिए मौजूदा सरकार एक कागज़ जारी कर,दुनियां को यह बता रही है की देश में कहीँ भी कोई मौत भूख से हुआ हो ऐसी ख़बर की पुष्टि नहीं हुई। 

ऐसी बात कहने से पहले देश के‘माननीयों’ को यह भी याद रखना चाहिए था, कि दिल्ली सरकार के जिन चिकित्सकों ने उन बच्चियों का पोस्टमार्टम किया, वे यह देखकर हैरान थे कि उनके शरीर में फैट की मात्रा शून्य थी। यानी भूखी बच्चियों के शरीर में जब तक फैट था फैट ने उन्हें जिंदा रखा और जब यह फैट भी ख़त्म हो गया तब बच्चियों ने दम तोड़ दिया। दरअसल हमारे देश के “माननीयों” को सच्चाई स्वीकार करने में लाज आती है। 

लाज तो उन लोगों को भी नहीं आई जब जम्मू के कठुआ में एक बच्ची के साथ बलात्कार हुआ, तब जिन लोगों ने बलात्कारियों के समर्थन में रैलियां निकाली। अब न जाने कहां दुबक गए ऐसे लोग,उन्हें मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में 34 बच्चियों के साथ हुआ हैवानियत नहीं दिख रहा,मासूम बच्चियों की ह्रदय विदारक दर्दनाक चीख नहीं सुनाई दे रही,खैर इन दिग्भ्रमित लोगों से क्या उम्मीद लगाना। 
उम्मीद तो प्रधानमंत्री जी से हैं,लेकिन चुप हैं,आपकी चुप्पी उन उम्मीदों को चुभती है,जो आप से बंधी है.आप अक्सर जब जवाब देने और जिम्मेदारी निभाने का वक्त आता है,तब आप आम गरीब जनता के उम्मीद को दरकिनार कर चुप्पी साध लेते हैं। सुशासन बाबू तो शर्मिंदा हैं। लेकिन क्या चुप्पी साध लेने और शर्मिंदा हो जाने से न्याय मिल जाएगा? 
आप कह सकते हैं की सीबीआई को जांच करने के लिए दे दिया गया है, न्याय होगा। लेकिन एक कड़वी सच्चाई यह भी है, इसी सीबीआई के पास आपके राज्य के कई ऐसे मामले हैं,जो कागज़ी घोड़े बनकर फाइलों में दौड़ लगा रहें हैं। अब ये बात जनता से नहीं छुपी के कैसे लालूप्रसाद यादव जैसे कद्दावर नेता जेल चले जाते हैं और कैसे मुजफ्फरपुर की ही 14 वर्षीय दसवीं की छात्रा नवरूणा की हत्या का रहस्य अनसुलझा रह जाता है। 

मुझे आज सवाल उनसे भी पूछने का मन कर रहा है जिन्होंने उस रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था के महिलाओं के लिए भारत दुनिया का सबसे असुरक्षित देश है। मेरा ह्रदय भी ऐसे रिपोर्ट को मानने से इनकार करता है,लेकिन एक सवाल मुझे विचलित कर देता है,हमारे देश में तो नारियों को देवी माना जाता रहा है तो क्या हुआ की सरकारी पैसे पर चलने वाले बालिका गृह में मासूम बच्चियों के साथ बलात्कार होने लगा। हमारे देश में तो कन्या भोज कराया जाता रहा है,तो ऐसा क्या हुआ की तीन मासूम बच्चियां भूख से तड़प तड़प कर दम तोड़ दी।सच्चाई को न मानने से सच्चाई नहीं बदल जाएगी। 
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