भूख से किसी की मौत होने की कोई खबर नहीं है।- केन्द्र सरकार

भूख

दिल्ली : पोस्टमॉर्टम में  मौत की वजह भूख बताई गई थी
नई दिल्ली।।भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग का कहना है कि देश में किसी भी राज्‍य या संघ शासित प्रदेश में भूख से किसी की मौत होने की कोई खबर नहीं है। कुछ राज्‍यों में भूख से मौत की खबरें मीडिया में आई हैं, लेकिन उन राज्‍य सरकारों का कहना है कि जांच में ऐसे आरोपों की पुष्टि नही हो पाई है। गुजरात सरकार ने कहा है कि उसके राज्‍य में भूख से कोई मौत नहीं हुई है।

यह जानकारी आज लोकसभा में उपभोक्‍ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग मंत्रालय के राज्‍यमंत्री श्री सी.आर. चौधरी ने एक लिखित उत्‍तर में दी।

रियायती दरों पर खाद्यान्‍न उपलब्‍ध

केन्‍द्र सरकार, टीपीडीएस के अंतर्गत राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 और अन्‍य कल्‍याणकारी योजनाओं के तहत राज्‍य सरकारों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के माध्‍यम से लक्षित आबादी को काफी रियायती दरों पर खाद्यान्‍न उपलब्‍ध कराती है। 

राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के दायरे में 75 फीसदी ग्रामीण और 50 फीसदी शहरी आबादी आती है, जो देश की कुल आबादी का करीब दो तिहाई हिस्‍सा है। इन लोगों को चावल, गेंहू और मोटे अनाज क्रमश: 3, 2, और 1 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से दिए जा रहे हैं।

खाद्य सब्सिडी के लिए आधार अड़चन नहीं।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने सभी राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि आधार कार्ड नहीं होने या बायोमैट्रिक्‍स में आने वाली अड़चनों के बावजूद किसी भी लाभार्थी को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले खाद्यान्‍न या खाद्य सब्सिडी के नाम पर मिलने वाली राशि से वंचित नहीं किया जा सकता। 

टीपीडीएस को सुव्‍यवस्थित बनाना और उसका उन्‍नयन एक सतत प्रक्रिया है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग राज्‍य और संघ शासित प्रदेशों के साथ मिलकर टीपीडीएस के संचालन की पूरी व्‍यवस्‍था को कम्‍प्‍यूटर आधारित बना रहा है। इस पर आने वाले खर्चे राज्‍य सरकारों और संघ शासित प्रदेशों के साथ बांटे जाएंगे। इसमें राशन कार्डों और लाभार्थियों से जुड़े डाटाबेस का डिजिटलीकरण, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, शिकायत निवारण के लिए पारदर्शी व्‍यवस्‍था और राशन की दुकानों पर ई-पीओएस मशीन लगाए जाने जैसी बातें शामिल हैं।

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