मुजफ्फरपुर बालिका गृह के मासूम पीड़ितों को न्याय दिला पाएगी CBI ?

मुजफ्फरपुर बालिका गृह


मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में नाबालिग लड़कियों से दुष्कर्म के मामले में सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दे दिए है।और सीबीआई अपना कार्य करने में जुट गई है।

सवाल यह उठ रहा है की सीबीआई इस बार अपनी विश्वसनीयता कायम रखते हुए महत्वपूर्ण परिणाम देने में सफल होगी या फिर पिछले मामलों की तरह यह मामला भी बगैर किसी परिणाम के सुर्खियों से निकल कर अख़बार के भीतर के किसी कोने में जाकर दम तोड़ देगा।

बिहार में सीबीआई को सौंपे गए पिछले मामलों पर नजर डाले तो यह देखने में आता है कि सीबीआई अपनी विश्वसनीय छवि नहीं बना पाई है। सीबीआई को पिछले दस वर्षों में नौ मामले को जांच करने के लिए दिया गया,जिनमें से छः मामले हत्या से जुड़े थे। 

बिहार में जितने हाईप्रोफाइल मामले सीबीआई को सौंपे गए, उनके जांच के बाद अभी तक कोई महत्वपूर्ण परिणाम सामने नहीं आ पाए हैं। ऐसे में यह सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड की सीबीआई की जांच में सच सामने आ पाएगा और दोषियों को सज़ा मिल पाएगा या अन्य मामलों की तरह यह मामला भी कागज़ी घोड़ा बनकर फाइल दर फाइल दौड़ता रहेगा और दोषी आज़ाद घूमते रहेंगें।

बिहार के हाईप्रोफाइल मामले जो सीबीआई को सौंपे गए

पत्रकार राजददेव रंजन हत्याकांड

पत्रकार और एक अखबार के सिवान ब्यूरो प्रमुख राजदेव रंजन हत्याकांड में सीबीआई ने चार्जशीट बेशक दायर कर दी है, पर अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं ला सकी है। हत्या का आरोप आरजेडी के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन पर लगे हैं।

नवरूणा हत्याकांड

14 वर्षीया दसवीं की छात्रा नवरूणा की हत्या 18 दिसंबर 2012 को कर दी गई। एक साल बाद सीबीआई को केस सौंपा गया। 26 नवंबर 2013 को मुजफ्फरपुर स्थित उसके घर के पास नाले में उसका कंकाल बरामद किया गया। लेकिन आज तक रहस्य अनसुलझा है।

संतोष टेकरीवाल हत्याकांड

10 जुलाई 2009 को पटना के ट्रांसपोर्ट नगर थाना इलाके की इस घटना में एजेंसी के मालिक संतोष टेकरीवाल की हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच सीबीआई ने शुरु की। आज तक कोई आलम ये है कि लगता है लोगों के साथ-साथ सीबीआई भी इस हत्याकांड को भूल गई है।

आकाश पांडेय अपहरण कांड

पटना के शास्त्रीनगर थाना इलाके में 11 साल पहले 10 अगस्त 2007 को डीएवी के छात्र आकाश पांडेय का अपहरण हुआ था। इस अपहरणकांड की जांच सीबीआई ने शुरु की,लेकिन इस मामले में कोई खुलासा तो दूर की बात अब तक कोई गिरफ्तारी तक नहीं हुई। 

गौतम हत्याकांड

पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता के पुत्र गौतम हत्याकांड, 2012 से अब तक सीबीआई किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।

भूटन सिंह हत्याकांड

वर्ष 2000 में पूर्णिया कोर्ट परिसर में जदयू नेता मधुसूदन सिंह उर्फ भूटन सिंह की हत्या हुई थी। इस हत्याकांड के बाद मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को मिला लेकिन सीबीआई आज तक हत्यारे की तलाश नहीं कर पाई है।

ब्रम्हेश्वर मुखिया हत्याकांड

एक जून 2012 को आरा में रणवीर सेना के बहुचर्चित संस्थापक ब्रम्हेश्वर मुखिया की आरा के कतिरा में हत्या कर दी गई थी। बिहार सरकार के गृह मंत्रालय को दो बार आग्रह करने के बाद सीबीआई ने समूचे बिहार में भूचाल ला देनेवाले इस हाइप्रोपाइल मामले की जांच शुरु की लेकिन अब तक ये मुखिया हत्याकांड रहस्य बना हुआ है। 

जमुई मूर्ति चोरी

2015 में बिहार के जमुई से भगवान महावीर की प्राचीन मूर्ति चोरी हुई। इस मामले की जांच सीबीआई ने शुरु की लेकिन मामला अंजाम तक नहीं पहुंच सका है।इस मामले में बिहार पुलिस, सीबीआई से तेज निकली है।


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