युवा भारत, समृद्ध और खुशहाल भारत


 हेमेन्द्र क्षीरसागर, 
लेखक व विचारक,उर्जांचल टाइगर 

भारतीय युवाओं का इतिहास यह दर्शाता है कि मानव संसाधन का बहुत ही महत्वपूर्ण और सक्रिय अंग होने के नाते युवा वर्ग ने हमेशा ही स्वतंत्रता एवं शांति के रक्षक के रूप में समाज की प्रगति में अग्रणी भूमिका निभायी हैं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसने महान बलिदान दिये और उसके उपरांत सदैव देश के विकास के लिए आगे आए। लिहाजा, पूर्व राष्ट्रपति श्री अब्दुल कलाम ने ठीक ही कहा थाः स्वतन्त्रता से पूर्व के दिनों में स्वतन्त्र भारत हमारा सपना था। परन्तु आज विकसित भारत हमारा सपना है, केवल युवा वर्ग ही ऐसा वर्ग है जो राष्ट्र को बेरोजगारी और भूख से मुक्ति, अज्ञान और निरक्षता से मुक्ति, सामाजिक अन्याय और असमानता से मुक्ति, बीमारी और प्रकृति विनाश से मुक्ति दिला सकता है, और सबसे बढ कर सार्वभौम आर्थिक और पश्च‍िमी सभ्यता के प्रभावों से मुक्ति दिला सकता हैं।



इस संदर्भ में जब हम अपने समाज पर नजर डालते हैं तो पाते हैं कि देश की 65 फीसदी जनसंख्या युवा वर्ग में आती हैं। इसका मतलब यह हुआ कि लगभग 85 करोड युवा जो कि 15-35 वर्ष के आयु वर्ग में हैं। परन्तु, यह सब कुछ विकास के मार्ग में आने आने वाली बाधाओं को दूर किये बिना प्राप्त नहीं किया जा सकता। स्वतंत्र भारत में विकास के मार्ग में आने वाली प्रमुख बाधाओं में से एक बाधा यह है कि गरीबी को समाप्त करने वाले हमारे कार्यक्रमों का एक दम से असफल होना और परिणामस्वरूप युवकों में बेरोजगारी का बढ जाना। बेरोजगार युवक बडी आसानी से असामाजिक और राष्ट्र विरोधी ताकतों के हाथों का खिलौना बन जाता हैं।

स्पष्ट तौर पर युवाओं को समग्र ग्रामीण विकास की गतिविधियों और विभिन्न प्रकल्पों की अंतर्निहित शक्तियों को समझना चाहिए। स्वावलम्बी, समृद्ध, समर्थ और सुखी गांव का आधार होगा रोजगारयुक्त युवा। अकुशलता से हमारी बहुत ही मूल्यवान राष्ट्रीय पुननिर्माण के लिए तैयार, दुनिया की सबसे बडी युवा श्रम शक्ति का अपव्यय हो रहा है। इस स्थिति के अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक व सभ्यतामूलक दुष्परिणाम हो सकते है। भारत में श्रम शक्ति की औसत वार्षिक वृद्धि लगभग 1 करोड है। परंतु हमारा संगठित क्षेत्र इतने रोजगार उपलब्ध करवाने में असमर्थ है। अतः रोजगार सृजन, आय का सृजन, रोजगार के नए अवसरो को कृषि तथा लघु उद्योगों, सेवा के क्षेत्रों में नवनिर्माण करना होगा। 

प्रत्युत, युवाओं के वास्ते क्रियांवित विकास की गति जल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के गैर-जिम्मेदाराना प्रयोग और शोषण से भी प्रभावित होती हैं। पारिस्थतिकी दृष्टि से भू-जल के साथ-साथ वर्षा के जल का उचित उपयोग और संरक्षण बहुत ही जरूरी हो गया है ताकि देष के विभिन्न भागों में प्रतिवर्ष पडने वाले सूखे और बाढ आने की घटनाओं को कम से कम किया जा सकें। कुल मिलाकर ऐसा लगता हैं कि प्रतिवर्ष आपदाओं जैसे कि बाढ, सूखा, बादलों के फटने आदि जैसी घटनाओं के कारण होने वाली भारी भरकम आर्थिक नुकसान के कारण भी हमारे विकास के प्रयासों को बडा धक्का पहुंचता हैं। पर्यन्त युवाओं के विकास की योजना प्रभावहीन हो जाती हैं। यह समस्या आने वाले दिनों में और गंभीर हो जाएगी गोया हम क्षेत्रीय आधार पर आपदा प्रबंधन के निहितार्थ कोई प्रभावशाली नीति नहीं अपनाते।

इसीलिए, यह आज की मांग है कि भारत का युवा वर्ग सरकार द्वारा चालायी जाने वाली विकास की गतिविधियों को सफल बनाने के लिए अथक और गंभीर प्रयास करें। नि-संदेह सरकार रोजगार पैदा करने के लिए बडे पैमाने पर युवकों को स्वरोजगार और कौशल दक्षता के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सरकार सभी के लिए प्राथमिक शि‍क्षा, सम्पूर्ण साक्षरता और सभी के लिए स्वास्थ्य के राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में भी कार्य कर रही हैं। 

स्तुत्य, भारत सरकार के ‘स्किल इंडिया‘, ‘मेक इन इंडिया‘ और कौशल विकास और कुशल भारत कार्यक्रम तथा ‘नशा मुक्त युवा अभियान‘ उन्नमुखीकरण और दुर्व्यवसन मुक्ति के अभिप्राय संचालित हैं। अलावे राष्ट्रीय युवा नीति 2014 और राष्ट्रीय कौशल विकास और उद्यमशलिता नीति 2015 के तहत शि‍क्षा, कुशलता और उद्यमशि‍लता के द्वारा युवाओं में अधिक क्षमता का विकास करना। यद्यपि इन प्रयासों को तभी सफलता मिलेंगी जब समाज में व्यापक स्तर पर युवा शक्ति आने वाली चुनौतियों के मुकाबले विकास की गतिविधियों में योगदान करने के लिए उठ खडी होगी । तभी युवा भारत, समृद्ध और खुशहाल भारत पुननिर्माण करेगा।
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