गंगा के बढ़ते जलस्तर से तटवर्तीय बस्तियों पर कटान का संकट

गंगा के बढ़ते जलस्तर से तटवर्तीय बस्तियों पर कटान का संकट

नरौली केवट बस्ती

  • दो दिनों में गंगा के जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि। 
  • तटवर्तीय लोगों के निवास पर मंडरा रहा संकट का बादल!
नसीरुल होदा खान 'राजा'
रिपोर्टर , चन्दौली , उर्जान्चल टाईगर

धानापुर-चन्दौली।। विकास खण्ड के दर्जन भर से ज्यादा गाँव जो गंगा नदी के किनारे बसे हुए हैं, गंगा के बढ़ते जलस्तर से कटान की जद में हैं। यही वजह है कि इधर कई दिनों से गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर यहां के लोग भय के साये में जीने को मजबूर हैं। सोमवार रात से ही गंगा का जलस्तर काफी तेजी से बढ़ रहा है। नरौली निवासी बेचन मल्लाह (49 वर्ष) बताते हैं कि "मंगलवार को सुबह गंगा का जलस्तर खड़ा एक हाथ बढ़ा है। तेजी से बढ़ते हुए पानी से करार पर बसे लोगों के मकान पर संकट खड़ा हो गया है। न जाने कब उफनाई गंगा हमारे मकानों को लील ले!"
यूँ तो हर साल गंगा नदी में आये बाढ़ और उसके बाद पानी कम होने की वजह से तटवर्ती कई एकड़ जमीन कटान की वजह से गंगा में लीन होती रही है। यही वजह है कि अब तक विकास खण्ड की तकरीबन सैकड़ों एकड़ किसानी योग्य भूमि गंगा नदी में समा चुकी है! पूर्व गंगा ने जो तबाही मचाई उसके चलते गंगा नदी के तटवर्ती गांव सैफपुर, रामपुर दीया, प्रसहटा, हिंगुतरगढ़, बुद्धपुर, नौघरा, रायपुर, नरौली, बड़ौरा खालसा, अमादपुर सहित दर्जन भर गांव के लोग सैकड़ों एकड़ कास्त की जमीन गवां चुके हैं। वह आज भी गंगा के कटान से भयभीत हैं। ऐसे में अब कटान से भयभती ग्रामीणों ने गांव को बचाने के लिए हुकूमत से गुहार लगाई हैं। यूँ तो गंगा कटान की समस्या पर खूब राजनीति होती रही है मगर आम जन को उसका लाभ नही मिला। शासन प्रशासन भी सर्वे करवा कर मामले को ठंडे बस्ते में डालती गयी है!

लोगों का कहना है कि अगर पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हमारी बस्ती गंगा में समा जाएगी! आज जहां हम लोग एकत्र हो कर बैठते थे वहां तक गंगा का पानी आ गया है। अब तो हमारे घर ही बचे हैं? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं सरकार का ध्यान गंगा कटान की इस व्यावपक समस्या पर आकृष्ट किया है।





Reactions:

टिप्पणी पोस्ट करें

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget