ऐसा लम्हा हर पिता को नसीब हो

ऐसा लम्हा हर पिता को नसीब हो


अब्दुल रशीद 

उमा माहेश्वरी शर्मा ने पुलिस की नौकरी करते हुए अपने बेटी को लाड प्यार से पाला,और उसे पढ़ा लिखा कर उस मुक़ाम तक पहुंचाया,जहां तक पुलिस की नौकरी करते हुए वह नहीं पहुंच सके।

इंस्पेक्टर पद से पुलिस की नौकरी की शुरुआत कर अब वो डीएसपी पद पर पहुंच गए हैं,वो नॉन आइपीएस कॉडर से हैं और अभी हैदराबाद के राशाकोंडा कमिश्नरी के मलकानगिरी में डिप्टी कमिश्नर हैं। अपने दायित्व को पूरी कर्मठता से निभाते हुए अपने बेटी को भी वो सब गुण और शिक्षा दिए जो उसे सफलता और सम्मान दिला सके। अगले साल अपने 30साल के कार्यकाल को पूरा कर सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

पूरी उम्र की नौकरी में जिस बात ने उन्हें बेहद खुश और गर्वान्वित किया,जब उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी जो मौजूदा वक्त में तेलंगाना के जगतियाल जिले में पुलिस अधीक्षक हैं को सल्यूट किया। एक पिता और एक पुलिस अधिकारी होने के नाते उन्हें एक कर्तव्यनिष्ठ अपने वरिष्ठ अधिकारी जिसमें उन्हें अपना भविष्य रिटायरमेंट के बाद भी नज़र आरहा है, जी हां वह कोई और नहीं उनकी बेटी सिंधु शर्मा है जिनका आईपीएस में चयन चार साल पहले साल 2014 में हुआ था।

बीते रविवार को पहली बार तेलंगाना राष्ट्रीय समिति की जनसभा में पिता पुत्री का आमना सामना हो गया।उस वक्त पिता उमेश्वर शर्मा पद डीएसपी ने अपनी बेटी को सैल्यूट किया।

ये लम्हा एक पिता के लिए जितना गर्व का था, उतना ही वहां मौजूद लोगों के लिए प्रेणादायक भी। 

डीएसपी उमेश्वर शर्मा कहते हैं हम पहली बार ड्यूटी करते समय आमने सामने आए हैं,मैं भाग्यशाली हूं जो उनके साथ काम करने का मौका मिला,वो मेरी सीनियर ऑफ़िसर हैं ,इसलिए जब उन्हें देखता हूं सलाम करता हूँ।

हम दोनों बिना प्रभावित हुए अपनी-अपनी ड्यूटी करते हैं। घर पर हम लोग बिल्कुल पिता और बेटी की तरह रहते हैं। वहीं बेटी ने कहा कि मेरे लिए ये अच्छा मौका है कि हमें साथ काम करने का मौका मिला।
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