आदिवासियों की कब्र पर विकास की नींव मंजूर नहीं - जयस

जय आदिवासी युवा शक्ति


मैं सभी आदिवासी युवाओं से अपील करता हूं कि वे ‘अबकी बार आदिवासी सरकार’ बनाने के लिए मिलकर संघर्ष करें।-डॉ हीरालाल अलावा

न्यूज डेस्क 
टीम,उर्जांचल टाइगर 

मध्य प्रदेश में जल-जंगल-जमीन के मुद्दे पर जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) द्वारा जगह-जगह लगातार अनेकों आयोजन किये जा रहे हैं। इसी कड़ी में 16 सितम्बर, 2018 को मध्यप्रदेश के झाबुआ जिला अंतर्गत खवासा में जयस द्वारा आदिवासी एकता महासम्मेलन का आयोजन सम्पन्न हुआ। आदिवासी एकता महासम्मेलन में 20 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए, जिसमें आसपास के जिले– रतलाम, आलीराजपुर, धार, देवास, गुना, भोपाल, राजस्थान के बांसवाड़ा, डुंगरपुर, गुजरात के दाहोद से भी बड़ी संख्या में लोग आये थे। 

आदिवासी एकता महासम्मेलन के आयोजन का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आदिवासियों की जमीन जबरन छीनने के विरोध में आदिवासियों को एकजुट करना था। झाबुआ, रतलाम और दाहोद जिले में नेशनल कॉरिडोर के नाम पर सरकार द्वारा लगभग 100 से अधिक गांवों के विस्थापन किया जाना है। इसी के विरोध यह आदिवासी महासम्मेलन आयोजित किया गया। 

ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश के धार जिले के पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र मनावर तहसील के गंधवानी ब्लाक में अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के लिए 32 गांवों का जमीन अधिग्रहण, बड़वानी-खरगोन और खंडवा जिले के 244 गांवों को वाइल्ड लाइफ प्रोजेक्ट सेंचुरी के नाम पर विस्थापन, होशंगाबाद जिले के तिलक सिंदूर इलाके के 27 आदिवासी गांवो को टाइगर रिजर्व के नाम पर विस्थापन, धामनोद के 12 गांवों का विस्थापन से आदिवासियों में भारी रोष है। जबकि सरदार सरोवर बांध एवं बैल बाबा बांध के नाम पर धार जिले के 200 से अधिक गांवों के विस्थापन प्रक्रिया में धांधली करने, पर्याप्त पुनर्वास, उचित मुआवजा एवं स्थायी पट्टा न मिलने आदिवासी काफी क्षुब्ध हैं। 

आदिवासी एकता महासम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि अभी तक भाजपा और कांग्रेस ने आदिवासियों के साथ छल किया एवं आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का सरेआम उल्लंघन करके उनकी जमीन छीन ली। दुखद तो यह है कि यह सब और लगातार बढ़ रहा है। अत: ऐसी कारपोरेट परस्त आदिवासी विरोधी सरकारों को मध्यप्रदेश की सत्ता से बाहर कर ‘अबकी बार आदिवासी सरकार’ बनाया जाएगा। 

आदिवासी एकता महासम्मेलन में जयस ने झाबुआ, रतलाम और दाहोद जिले में नेशनल कॉरिडोर के नाम पर प्रवस्तावित गांवो के विस्थापन का विरोध किया और कहा कि अगर नेशनल कॉरिडोर 8 लेन बनाना ही है तो अंडरग्राउंड बनाया जाए। गांवो का विस्थापन कर बनाया जाने वाला कॉरिडोर किसी भी कीमत पर आदिवासियों को मंजूर नही है। 

जयस के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ हीरालाल अलावा ने प्रदेश की शिवराज सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज देश मे गांव को स्मार्ट बनाने की बजाय शिवराज और मोदी सरकार के राज में बड़े-बड़े शहरों को स्मार्ट बनाने की बातें हो रही हैं, हमे ऐसी सरकारें नही चाहिए जो आदिवासियों की कब्र पर विकास की नींव खड़ी करना चाहती हैं। 

डॉ. अलावा ने कहा कि आदिवासियों के गांवों को विस्थापित कर विकास की नींव खड़ी करने वाली सरकार आदिवासियों को मंजूर नही है, हमे ऐसी सरकार चाहिए जो आदिवासियों के जल जंगल और जमीन पर उनका अधिकार दिलाये। हमें ऐसी सरकार चाहिए जो आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार पांचवी अनुसूची, पेसा कानून, वनाधिकार कानून को धरातल पर सख्ती से लागू करे। यह काम सिर्फ ‘आदिवासी सरकार’ ही कर सकती है। 

मैं सभी आदिवासी युवाओं से अपील करता हूं कि वे ‘अबकी बार आदिवासी सरकार’ बनाने के लिए मिलकर संघर्ष करें। जयस के राष्ट्रीय संरक्षक ने कहा कि अगर आदिवासियों को अपनी ज़मीन बचाना है, अगर आदिवासियों को जल जंगल और ज़मीन पर अधिकार चाहिए तो तो उनके पास सिर्फ एक ही रास्ता है– आगामी विधानसभा चुनाव में आदिवासी सरकार बनाना ही पड़ेगा। क्योंकि आदिवासी सरकार ही आदिवासियों को बिना पैसे और बिना क़ानूनी लड़ाई के जमीन वापस दिला सकती है, अन्यथा कारपोरेट परस्त सरकारें छत्तीसगढ़, झारखंड और उड़ीसा में आदिवासियों के साथ जो कर रहीं हैं, वही मध्यप्रदेश में भी होगा। 

विक्रम यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर कन्हैया मेंडा ने कहा कि आज हमारे आरक्षण को खत्म करने के लिए, एट्रोसिटी एक्ट को खत्म करने के लिए, सवर्ण समाज एकजुट होकर सड़को पर उतर रहा है लेकिन आदिवासी सामाज का एक बहुत बड़ा वर्ग अभी भी अपने संवैधानिक अधिकारों को हासिल करने के लिए खुद संघर्ष करने की बजाय आदिवासियों को पिछले 70 सालों से लूटने वाली राजनीतिक पार्टियों के पीछे भाग रहा है।

मंच संचालन कैलाश बारिया, गजेंद्र सिंगाड व राजेश मेड़ा द्वारा किया गया। प्रीतमसिंह मुणिया ने आभार व्यक्त किया।

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