भारत बंद,नेतागिरी चालू

भारत बंद,नेतागिरी चालू


कोई भी नोसिखिया भारत बंद के बहाने नेता टाइप कुछ भी बन सकता है। भारत बंद में सबकुछ बंद रहने की गारण्टी रहती है, बस एक चीज ओपन रहती है वो है नेतागिरी। 

 इं. ललित शौर्य
आजकल सबसे बेस्ट धंधा नेतागीरी है। हर किसी के अंदर नेता बनने का कीड़ा कुलबुलाते रहता है। वो चाहता है के वो जल्द से जल्द भयंकर वाला नेता बन जाये। सब उसके रसूख को दंडवत करें, उसके आगे पीछे परिक्रमा लगाएं। उसकी हां में हां मिलाएं। अखबारों की कलम उसकी गुणगान लिखे, इलेक्ट्रानिक मीडिया के कैमरे चौबीसों घंटे उसी की ओर तांकते रहें। टी.वी न्यूज उन्ही की की खबर उगले। उनका थोबड़ा टी.वी में तैरता रहे। वो चर्चा में रहें, चर्चा उनकी फ्रेंड बनकर नेतानगरी में डोलती रहे। 

वो भले ही बेडोल हों पर वो एक सुडोल नेता बनकर उभरना चाहते हैं। नेतागिरी एक तगड़ा रोग है, जो इसकी चपेट में आ जाता है, लाख ऐंटीबायोटिक निगल ले इससे छुटकारा नहीँ पाता। खैर कम ही लोग ऐसे होते हैं जो इस रोग से ग्रसित होने के बाद इससे उबरने की चाह रखते हों। हर किसी की चाह होती है कि वो भी नेतानगरी का मशहूर मजनू बने। लोग उसकी जयजयकार करें। नेता बनने के सुख निराले हैं। इन निराले सुखों को भोगना हर एक नेता का सपना होता है। उसे कुर्सी और सत्ता का क्रिमरोल पसंद है। 

वर्तमान में नेता बनने की सीधी भर्ती निकली हुई है। अब कोई भी बन्दा सीधे सड़क से संसद तक पहुँच सकता है। कल का सड़कछाप, परसों संसद नाप सकता है। अब सड़क से संसद तक सीधी इंट्री के द्वार खुले हैं। बस घुसने की कला आनी चाहिए। बाकी सारा आर्ट तो बन्दा संसद के अंदर सीख ही लेता है। भारत बंद एक मुक्कमल मौका है। जब राजनीति की रोटियां बेली जा सकती हैं। 

कोई भी नोसिखिया भारत बंद के बहाने नेता टाइप कुछ भी बन सकता है। भारत बंद में सबकुछ बंद रहने की गारण्टी रहती है, बस एक चीज ओपन रहती है वो है नेतागिरी। यानि की भारत बंद नेतागिरी का ओपन धंधा है। भारत बंद का आह्वाहन उगलकर आप नेता रूपी जीव बन सकते हैं। भारत बंद का बाजार गरम है। हर महीने दो महीने में भारत बंद का उत्सव लौट आता है। इस दिन सुबह से सड़के बेरौनक नजर आती हैं। रौनक केवल टी.वी डिवेट में न्यूज एंकर के चेहरे पर कबड्डी खेलती नजर आती है। या फिर रौनक बन्द के उन आयोजकों के चेहरों में कत्थक करती देखी जा सकती है जो सुबह से ही लाठी-डंडा लिए शहर में अठावन इंची छाती लिए घूमते हैं।

भारत बंद आये दिन कइयों की किस्मत खोल रहा है। अनेक छुटभैय्या बड़केभैय्या बन रहे हैं। जो राजनीति का क,ख, ग नहीँ जानते वो भी सफेद कुर्ता पैजामा पहन के, लाठी-डंडा थामें नेतागिरी की तगड़ी प्रैक्टिस में लगे हैं। उनको प्रेक्टिस का इससे अच्छा मैदान नहीँ मिल सकता। दुकानें बन्द कराना, आगजनी, तोड़-फोड़, गाली-गलौज, नारे उड़ाना राजनीति में एक नेता को जो भी आना चाहिए वो एक नवागंतुक, भारत बंद के दौरान सीख सकता है। नवांकुर नेताओं के लिए भारत बंद असीम संभावनाओं को लेकर आता है। बस भुनाने वाला चाहिए। 

भारत बंद से नेता को सर्वांगीण विकास का अवसर मिलता है। जो नेता अब तलक जेल की चौखट का आनंद नहीँ ले पाये उनकी जेल जाने की संभावना भी बनी रहती है। यहाँ सरकारी माल की तोड़-फोड़ की स्वघोषित आजादी रहती है। रेल की पटरियों पर कार्यकर्ता और नेताओं को अपना गुस्सा निकालने की पूरी छूट रहती है। वो अपने पड़ोसी से घपले की और घरवाली से अनबन का गुस्सा रोडवेज की बसों में आग लगाकर बाहर निकाल सकता है।

भारत बंद में संभावनाओं के अनेक द्वार खुल रहे हैं। इसको समझते हुए संसद में एक्ट पारित करवाना चाहिए कि प्रतिमाह एक दिन भारतबंद किया जाये। जिससे नेतागिरी चमकाने वालों को खूब खुराक मिल सके। जनता की परेशानी का क्या, उसका कौन ध्यान रखता है। वैसे भी महीने के 29 दिन जनता ,आम नागरिक परेशान ही रहते हैं। एक दिन भारत बंद के कारण और सही। 

भारत बंद बेरोजगारों के लिए अवसर लेकर भी आता है। नेताओं के आलावा बंद करवाने वाली भीड़,भाड़े की रहती है। जिसमें युवाओं को 500 से 1000 रुपये दिहाड़ी मिल जाती है। बंद के बाद ,बंद की अपार सफलता के लिए होने वाली पार्टी में दारू और चिकन लपेटने की आजादी अलग से। इससे युवाओं में उत्साह बड़ता है। छोटा मोटा रोजगार देख उनकी बाँछे खिल जाती हैं। भारत बंद के बाद छोटा-मोटा पर्यटन भी बड़ जाता है। 

जिस स्थान पर तोड़-फोड़ आगजनी ज्यादा होती है, दूसरे इलाके से लोग उस स्थान को देखने आते हैं। इससे पर्यटन उधोग को बढ़ावा मिलता है। भारत बंद की सोच जिस भी बंदे की रही होगी वो वास्तव में प्रणाम करने योग्य है। इतनी बहुआयामी सोच वास्तव में शोध का विषय है। आखिर एक आदमी इतना उम्दा कैसे सोच सकता है। 

खैर भारत उस दिन बंद नहीँ होता जिस दिन किसी बेटी की इज्जत सरेआम लूटी जाती है, उस दिन भी बंद नहीँ होता जब सीमा से सैनिकों के ताबूत आते हैं, तब भी बंद नहीँ होता जब भूख से तड़प-तड़प कर बच्चे मर जाते हैं, उस दिन भी बंद नहीँ होता जब बूढ़ी माँ अपने अधिकारी बेटे के इंतजार में कमरे के अंदर कंकाल पाई जाती है। भारत बंद के अपने लफ़ड़े, अपने फायदे हैं। राजनीति की रोटियॉँ सेंकने के लिए भारत बंद की आँच जरूरी है।
Labels:
Reactions:

Post a Comment

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget