शक्तिनगर-नेता जी की लीला अपरम्पार, डकार गए दान-दक्षिणा के "पचास हज़ार"

गुरुघण्टाल निकले अध्यक्ष


कार्यालय के नाम पर लिया गया पचास हजार रुपया ,बना विवाद का कारण,दो धड़ो में बटा एक दल


ब्यूरो,उर्जांचल टाइगर 
शक्तिनगर क्षेत्र में एक दल के कार्यालय के किराए को लेकर आज आपस मे दिनभर कीच कीच चलती रही।स्थिति इतना विगड़ गयी कि किराए पर लिए गए कार्यालय को साल भर से किराया न मिलने के कारण मकान मालिक ने कार्यालय खाली करने का दल के नेताओ को आदेश दे दिया,जिससे दल के नेताओ में हड़कम्प मच गया क्यो की आज ही कार्यालय में दल के एक संस्थापक नेता का जन्मोत्सव मनाने का कार्यक्रम पूर्व से ही आयोजित था।उस दल के महामंत्री ने इसकी सब को सूचना प्रेषित कर दिया था।

दूसरी ओर उसी दिन उस दल के अध्यक्ष ने ब्लाक मुख्यालय पर पहले ही कार्यक्रम की घोषणा कर दिया था।इस तरह दल अध्यक्ष और महामंत्री में दो धड़ो में बट गया।दोनो धडो ने अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम को भी अलग अलग आज सम्पन्न भी कराया।लेकिन अध्यक्ष ,महामंत्री एक दूसरे के कार्यक्रम में नही किये शिरकत ,जो चर्चा का विषय बना रहा।

साल भर से कार्यालय का किराया नही देने के कारण किराए को लेकर स्थानीय एक सरकारी विभाग के कार्यालय से लेकर दल के नेताओ और उस दल के अनुसांगिक संगठन के एक पदाधिकारी के चौखट तक पूरे दिन ही नही बल्कि देर रात तक यह मामला गूँजता रहा,जिसमे सबसे प्रमुख मुद्दा यह छाया रहा कि जब पिछले दस महीने से पांच हजार रुपये प्रति महीने कार्यालय खर्च के रूप में सहयोग एक स्थानीय सरकारी विभाग के विभागाध्यक्ष द्वारा पिछले दस महीने से किया जा रहा हैं,जिसकी परोक्षरूप में पुष्टि हो गयी तो फिर आज साल भर से कार्यालय का किराया क्यो बकाया है?कार्यालय खाली कराने की नोबत क्यो आ गईं?आदि सवाल दिन भर हवा में उड़ते रहे ।

दोपहर बाद उस दल के एक अनुसांगिक संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारी अपनी चौखट को लांघ कर बाहर आये और इस विवाद को बढ़ने से पहले स्वयं हस्तक्षेप कर किसी तरह घण्टो के जद्दोजेहद के बाद मकान मालिक को मनाया और एक महीने का किराया अपनी तरफ से देकर कार्यालय खाली करने को लेकर दल के नेताओ के गर्दन पर लटक रही तलवार को वापस म्यान में डलवा,तब जाकर दल के नेताओ ने राहत की सांस ली।उक्त पदाधिकारी ने वहाँ मौजूद दल के नेताओ को समझा बुझा कार्यक्रम में मिष्ठान खरीदने की आर्थिक सहायता कर अपने गंतव्य की ओर निकल गए।तब जाके रात में कार्यक्रम कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम सम्पन्न हुवा।परन्तु कार्यक्रम मौजूद नेताओ में पूरे कार्यक्रम तक एक नेता द्वारा 50 हजार रुपये दल के नाम पर ले के हड़प लेने की ही चर्चा छाई रही ।

ज्ञात हो कि यह मामला इस तरह प्रकाश में आया कि जब मकान मालिक का दबाव किराया अदा करने के लिए ज्यादा बढ़ने लगा तो उस दल के महामंत्री अपने कुछ कार्यकर्ताओ के साथ एक स्थानीय सरकारी विभाग के विभागाध्यक्ष के यहाँ पहुच उनसे सहयोग करने की अपील की,तो इसपर उस अधिकारी ने बताया कि हम तो जब से यहा पोस्ट है तब से हर महीने पांच हजार रुपये आपके दल के अध्यक्ष को कार्यालय आदि के खर्चे के लिए सहयोग करते है।इसके अतिरिक्त जब भी आपके दल को जो जरूरत रही होगी वह भी हम अपने स्तर से हर सम्भव सहयोग करते रहे है। यह जानकारी मिलते ही महामंत्री व उनके साथ गए नेता हक्का बक्का और भौचक्के रह गए । क्योकी उन्हें इसके पहले इसकी जानकारी नहीं थी।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस सम्बंध में जब दल के महामंत्री ने अपने अध्यक्ष से जानकारी और स्पष्टीकरण चाहा तो अध्यक्ष महोदय आपे से बाहर आगये और महामंत्री पर भड़क गए।इतना ही नही सहयोग करने वाले उस अधिकारी को भी खूब खरी खोटी सुनाया और अपशब्दों का प्रयोग करते हुए देखलेने तक कि धमकी दे डाली व उक्त अधिकारी पर झूठ बोलने का आरोप भी मढ़ डाला।यह वाद विवाद अध्यक्ष ,महामंत्री के विच ही हुवा था ।

जब अधिकारी के पास चलने की बात महामंत्री ने कही तो अध्यक्ष महोदय जाने से इनकार कर दिए।उल्टे महामंत्री को पार्टी से निकल देने की अब परोक्ष रूप से धमकी देना शुरू कर दिए हैं। जिससे कल की उक्त स्थिति बनी हुई थी। इस घटनाक्रम से दल अब दो धड़ो में पूरी तरह बट चुका है और एक धड़ा हो रहे दल के नाम पर भ्र्ष्टाचार का पार्टी फोरम पर इसका विरोध करने का निर्णय कर लिया है। जिसको लेकर कटुता इस दल में अपने चरम पर पहुच चुका है।

ज्ञात हो कि सूत्रों के हवाले से मिली अपुष्ट खबर के अनुसार उक्त दल के अध्यक्ष को शक्तिनगर क्षेत्र के कोयला खदानों में कार्यरत कई ओ बी कम्पनियां भी एक आफिस वेयरर और कार्यालय के खर्चे के नाम पच्चीस हजार रुपये प्रतिमाह देती है।

वैसे भी यह कोई नई बात ओबी कम्पनियों के लिए नही है।यहा कार्यरत कम्पनियों से कौन दल,यूनियन या अन्य संगठन सहयोग नही लेते? लेते तो सभी है ,पर इसका कोई रिकार्ड व सबूत नही होता हैं। तभी तो यह कम्पनियां नियमो को ताख पर रख ब्लास्टिंग और ओबी परिवहन धड़ल्ले से वेधड़क ,वेख़ौफ़ अपने काम को अंजाम देटी रहती है।

इन कम्पनियों में श्रमिकों का भी इसी ताकत के बल पर शोषण होता रहता है।इसके अतिरिक्त अन्य काम करने वाली कम्पनियां,संविदाकार और परियोजनाएं परोक्ष में सहयोग कर अपना इन राजनैतिक दलों से मधुर सम्बन्ध बनए रखते हैं। इस तरह यह कहना अतिश्योक्ति नही होगा जिसे पाठक भी सहज ही समझ जाएंगे कि यही दल के नाम पर होरहे लाखो रुपये के अकेले गटक लेने का मामला अब दूसरे खेमे पच नही रहा है।

गुरुघण्टाल निकले अध्यक्ष

अध्यक्ष द्वारा चुपके ,चुपके पूरा माल डकार लेने के वाद सास तक नही लेते,क्यो की वे बेचारे अपने से काविल किसी को समझते ही नही,उनके नजर में सभी मूर्ख ही नजर आते है। लेकिन महामंत्री भी अपने35 साल के राजनीतिक,सामाजिक जीवन के सफर में कई घाटों का पानी पी चुके हैं, वे भी किसी से अपने को कम काबिल नही समझते।

इसीलिए दो चतुर नेताओ की चतुराई में सब पर अपनी पैनी नजर रखने वाले महामंत्री के सामने राजनीति के नोसिखये अध्यक्ष उनके जाल में फसते हुए उलझ कर इस समय खूब छटपटा रहे हैं।उनकी यह चतुराई "कम्बल ओढ़ के घी पीने वाली" छुपी न रह सकी।

अब आगे यह राजनैतिक घमासान भी अपने चरम जाता दिखेगा। देखना है कि आगे यह राजनैतिक घमासान किस मुकाम पर पहुँचता हैं ?,और इसमें कौन जितता है ?कौन हारता हैं?
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