विस्थापितों ने भरी हुंकार - गुलामो की तरह जिंदगी जीने से बेहतर है कि हम अपने अधिकारों के लिए लड़ के मरे।



  • 7सदस्यीय केंद्रीय कोर कमेटी की हुई घोषणा,
  • प्रथम चरण में 15 ग्राम संयोजक भी हुए घोषित, 

के सी शर्मा,वरिष्ठ पत्रकार 
शक्तिनगर(सोनभद्र)।विस्थापित अधिकार मंच मंच की तीसरी वैठक आज ज्वाला मुखी मन्दिर के धर्मशाला में वरिष्ठ विस्थापित नेता एवं पत्रकार के सी शर्मा की अध्यक्षता में हुई।बैठक का संचालन विस्थापित नेता कमलेश गुप्ता ने किया ।

वैठक में विस्थापित नेताओ ने अपने सम्बोधन में तरह तरह के सुझाव दिए और पुराने नेताओ ने जहा अपने अनुभव उपस्थित विस्थापित प्रतिनिधियों के बीच साझा की,वही विस्थापितों की युवा पीढ़ी ने अपने हक ,हकूक, मान, सम्मान की रक्षा व अपने अधिकारों के लिए संघर्ष की हुंकार भरी और निर्णय लिया की सिंगरौली में विस्थापितों का अपना एक अलग मंच होना चाहिए जहा से वे अपने समाज की समस्याओ और उनके हितों के संरक्ष्ण की एडवोकेसी कर सके।

इस मौके पर विस्थापितों के वरिष्ठ नेताओं ने युवा विस्थापितों को आगे आने का आवाहन करते हुए उनको नेतृत्व सौपने का निर्णय किया।इस तरह कह सकते है कि इस क्षेत्र के विस्थापित परिवार के वरिष्ठों ने कनिष्ठों को सौपी जिम्मेदारी।वरिष्ठ मार्ग दर्शक की भूमिका निभाएंगे।

बैठक में वक्ताओ ने एक स्वर में कहा कि हम अपने ही "सर जमी" पर दोहरी नागरिकता जैसी जिंदगी अब हम लोग नही जिएंगे।अब यह बहुत हो गया ।हम कल तक अपने जमीन के मालिक थे ।परियोजनाओं ने आवश्यकता से अधिक हम लोगो की जमीनों का अधिग्रण कर लिया।उस जमीन का न तो परियोजनाएं उपयोग की और नही उसकी सुरक्षा की,बल्कि उस जमीन को अतिक्रमण अपने संरक्ष्ण में कराते रहे ।

परिणाम यह हुवा की 40 साल पहले अपने जमीन से बेदखल कर विस्थापित किए गए 30*50" फीट की भूखण्ड पर वसाए गए विस्थापित परिवारों के पास तीसरी पीढ़ी को रहने के लिए घर बनाने के लिये तो छोड़िए सौचालय बनाने तक कि अब जमीन नही है ।

दूसरी तरफ विस्थापितों की हजारो एकड़ जमीन पर बड़ी बड़ी अट्टालिकाएं परियोजना प्रवंधन के संरक्ष्ण में खड़ी ही नही करदी गयी है ,बल्कि न जाने कितने बाजार व नगर बसा दिए गए है। जिसका रिहाशिय व व्यवसायिक उपयोग आयातित समाज दशकों से करता चला आरहा है।जो हम विस्थापितों की "सीने पर मूग की दाल दलने" व "हड्डी पर कबड्डी खेलने" जैसे असहनीय पीड़ा का यहसास करता रहता हैं।यह अन्याय यहां स्थापित होने वाली परियोजनों के प्रवंधन ने विस्थापितों के साथ किया है।

अब वही परियोजना प्रबंधन कहता है कि तीसरी पीढ़ी को हम विस्थापित नही मानते तो फिर दो दो हाथ करने के सिवा दूसरा विकल्प ही क्या बचत है विस्थापित के पास। इसी लिए अब सहने की शक्ति नही रही,इस लिए गुलामो से बदतर जिंदगी जीने से बेहतर है कि हम लोगो को अब इस अन्याय के खिलाफ जंग का एलान कर देना चाहिये ।

विस्थापित परिवार के युवाओं कामानना है,उनके पूर्वजों के साथ जो अन्याय, अपमान ,उनकी सम्पत्ति की राष्ट के नाम कौड़ियों के भाव प्रशानिक डंडे व पुलिस के बूटों की गुज दिखा, सुना हड़प ली गईं और हमे वेघर कर विस्थापित कर दिया गया और हमे अपने ही गांव में अपने ही जमीन पर बेगाना बना दिया गया है और उसके बदले की आग विस्थापित युवाओं के सीने में धधकनी चाहिए।

इसी लिए वरिष्ठों ने कनिष्ठों को यह जिम्मेदारी सौपते हुए आज उनके स्वाभिमान को खूब कुरेदा और ललकारते हुये इसके खिलाफ संघर्ष का बिगुल युवाओं को बजाने को कहा।बैगर जरूरत के हमारी जमीनों से हमारा मालिकाना हक छीन लिया गया है।

जिसके खिलाफ संघर्ष का अब समय आगया है।जिसका उदघोष वरिष्ठों ने कर दिया है अब कनिष्ठों की यह जिम्मेदारी है कि वे इसे अंजाम तक पहुचा के युध्य जीते।इसके लिए युवाओं को एक जुट होना पड़ेगा और उन्हें अपने पूर्वजों के साथ हुए अन्याय,अपमान का बदला संवैधानिक दायरे में रह कर अब लेना ही होगा।

गुलामो की तरह जिंदगी जीने से बेहतर है कि हम अपने अधिकारों के लिए लड़ के मारे। जिंदा कौमे कभी भी उपयुक्त समय का इंतजार नही करती ।जब जंग का एलान हो चुका है तो मरो या जियो इसकी परवाह छोड़ के अब आपको सड़को पर उतरना ही होगा।

बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक गांव मे ग्राम सयोजक बना के एक कमेटी बनेगी ।उसे सन्चालित करने के लिए आज एक 7सात सदस्यी कमेटी का गठन किया गया।ग्राम संयोजकों के माध्यमसे से गांव का पूरा डाटा तैयार किया जाएगा ।पहले चरण में विस्थापित अधिकार मंच, शक्तिनगर क्षेत्र में संगठन का कार्य क्षेत्र रखेगा।

आगे चल कर इसका विस्तार सिंगरौली/ सोनभद्र जिले का सम्पूर्ण विस्थापित क्षेत्र में होगा।अगली वैठक आगामी 5 अक्टूबर को चिल्काडाड पंचायत भवन पर होगी ।

बैठक को जिन प्रमुख वक्ताओ ने सम्बोधित किया उनमें सर्बश्री, वरिष्ठ पत्रकार विस्थापित नेता के सी शर्मा,दलसिंगार गुप्ता,शैलेन्द्र चौबे,कमलेश गुप्ता, हेमंत मिश्रा, नर्वदा कुशवाहा,पत्रकार ,गोविंद मिश्रा, अशोक पांडेय, आर के चौबे, नन्दलाल पूर्व प्रधान,लालचंद गुप्ता, आनन्द पांडेय,शंकर विश्ववकर्मा,आशीष चौबे,पत्रकार शिव गोविंद शाह,विजय नारायण शर्मा ,अयोध्या गुप्ता,व्यास मुनि पांडेय, आदि रहे। इसके अतिरिक्त सैकड़ो की संख्या में विभिन्न गांवों के विस्थापित उपस्थित थे।

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