शक्तिनगर एसएचओ राजीव मिश्रा "बिहार के लाल", वृद्ध महिला के इलाज का खर्चा उठा के पेश कि मानवता की मिसाल

शक्तिनगर समाचार


बिहार के लाल ने ‘सोनभद्र’ के गांव में रचा ‘‘मानवधर्म का इतिहास’’
नकारात्मक’ सोंच पर ‘कर्मयोग’ का वर्चस्व
मिशन जय हिन्द ‘खाकी’ के सुनहरे ‘राजीव की ‘गौरवगाथा

नौशाद अन्सारी
ब्यूरो, सोनभद्र उर्जांचल टाइगर 

अक्सर हमारे मन में पुलिस शब्द सुनते ही सबसे पहले डर और भय की भावना आती है।अपने कार्यप्रणाली से पुलिस हमेशा सवालों के घेरे में भी रही है।कोई उन्‍हें वर्दी वाला गुंडा कहता है तो कोई भ्रष्‍ट।मगर इससे इतर यूपी का एक पुलिस आफिसर अक्सर लोगों की मदद करते रहते हैं।आज इस लेख को मात्र एक लेख या समाचार समझकर मत पढ़ियेगा। यह कोई कहानी भी नहीं है। यह एक नजीर है हम सबके लिये। यह एक उदाहरण है समाज के सामने मनसा,वाचा,कर्मणा..एक होने की। जो मन में है, वही वाणी में और वही कर्म में। हम सबकी पहचान हमारे कर्मों से बनती है। कर्म से ही हमारे सुख-दुख का भी निर्धारण होता है। बस, आवश्यकता है हम सबको अपने अंतर्मन के चक्षु (आखें) खोलने की।

जी हाँ हम बात कर रहे हैं बिहार के लाल वर्तमान में सोनभद्र जिले के यूपी एमपी बार्डर पे स्थित शक्तिनगर कोतवाल राजीव मिश्रा जी की।जो अपराधियों के लिये खौफ और पीड़ित के लिये फरिश्ते बनकर उभरे हैं।राजीव मिश्रा जी ने समाज सेवा और मानवता के लिये के मिसाल पेश करते हुये एक नेक काम किया है।जिसकी चारो तरफ सराहना हो रही है।

हुआ यूँ के आज अजसुबह कोतवाल राजीव मिश्रा जी मुहर्रम के त्योवहार को देखते हुये थाना से क्षेत्र का भ्रमण करने जा ही रहे थे के शक्तिनगर थाना परिसर में एक युवक संजय भारती पुत्र रामस्वरूप भारती निवासी चिल्काटाड़ आया जो काफी तंगहाल में दिख रहा था और रो रहा था।राजीव मिश्रा जी से रहा नहीं गया।उन्होंने उस युवक के पास जाकर उसकी व्यथा जानी।तो युवक ने बताया के उसकी बुजुर्ग माँ जिसकी उम्र तकरीबन 75वर्ष है।जो के गिर गयी और उनके पैर के कूल्हे टूट गया।युवक ने बताया के घर में खाने तक के पैसे नहीं है।माता जी का इलाज कराने में भी दिक्कत हो रही है।राजीव मिश्रा जी ने तुरंत युवक को अपनी गाड़ी में बैठाया और निकल पड़े युवक के घर।जब युवक के घर पहुचे तो उन्होंने देखा के वाकई में युवक की माँ का पैर का कुल्हा टुटा हुआ है।घर की स्थिति अत्यंत दयनीय है।उन्होंने तुरंत युवक की आर्थिक मदद की और इलाज का पूरा खर्चा का जिम्मा उठाया।

साथ ही शक्तिनगर परिक्षेत्र में कार्य कर रही एक ओबी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर से उन्होंने बात कर युवक की सारी व्यथा बताये और युवक की नौकरी लगवाने का रिक्वेस्ट किया।जिसे ओबी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर ने स्वीकार कर लिया।राजीव मिश्रा जी के द्वारा किये गये मदद से युवक संजय भारती के आँखों से अश्रु की धारा फुट पड़ी।और कहा के राजीव मिश्रा जी मेरे लिये फरिश्ता बनकर आये हैं।

आज राजीव मिश्रा जी शक्तिनगर एसएचओ हैं।इससे पहले राबर्ट्सगंज एसएचओ थे।कल कहीं और होंगे।लेकिन संजय भारती के लिए वह हमेशा उसके साथ रहेंगे। उसके दिल में,उसकी यादों में और उसके उज्जवल भविष्य के सपनों में।गर्व महसूस होता है जब ऐसा सुनने को मिलता है कुछ लोग अपनी ईमानदारी और कर्मठता के कर्तव्य का निर्वहन करते हैं कुछ ऊंची महल और अपराध को संरक्षण देते है। जियो और जीने दो हो सके तो किसी की मदद कर अपनी समाज की भागेदारी में एक कदम चल कर देखें।

आपको बता दें कि देश की सीमाओं पर तैनात जवानों की देशभक्ति अनुकरणीय होती है।लेकिन हमारे समाज में कई ऐसे लोग भी है जो चुपचाप समाजसेवा के अपने मिशन पर डटे है।प्रदेश में भी तमाम ऐसे पुलिसकर्मी हैं जो समाज के कमजोर तबके तक पहुंचकर उनके दुख के आंसू पोछ रहे हैं।

राजीव मिश्रा जी ने कहा के "दुनिया में इंसानियत से बढ़कर कोई चीज नहीं होती, कहते हैं कि गरीबों और असहायों की मदद करने में जो सुकून मिलता है वो शायद और कहीं नहीं"।

अंत में उन्होंने कहा के गरीबों और असहायों की मदद करने की प्रेरणा मुझे अपने माता पिता से मिला।उन्होंने कहा के 
बुलंदियों का बड़े से बड़ा निशान छुआ,
उठाया गोद में माँ ने तब आसमान छुआ
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