पढ़िए किसकी लापरवाही के कारण अनपरा - शक्तिनगर फोर लेन सड़क निर्माण कार्य पर लगा ग्रहण !

अनपरा - शक्तिनगर फोर लेन रोड


  • दशकों से चल रहा संघर्ष पर पी डब्लू डी विभाग लापरवाही भारी पर रहा भारी
  • सबसे बड़ी समस्या खड़िया मोड़ से ककरी तक सड़क के दोनों किनारे एनसीएल की वाटर सप्लाई वाली एनसीएल पाईप लाइन शिफ्ट करना 
  • सरकार के मंशा और जनता के उम्मीदों पर पानी फेरने वाले लापरवाह अधिकारियों पर क्या कार्यवाही होगा?
के सी शर्मा
वरिष्ठ पत्रकार की विशेष रिपोर्ट 

अनपरा-शक्तिनगर मार्ग को फोरलेन करने के लिए यहा के राजनेता,समाजसेवी,पत्रकार ,आमजनता लम्बे समय से संघर्षरत रही है। काफी समय बाद निविदा खुली और काम भी कार्यदाई संस्था को आवंटित हो गया तो "पी डब्लू डी" के अधिकारियों के घोर लापरवाही का खामियाजा फिर इस सड़क निर्माण को भुगतना पड़ गया हैं।अनपरा ,शक्तिनगर के फोर लेन का निर्माण अधर में लटकता नजर आरहा है। इसके पहले भी कई बार निविदा स्थगित हुई।

इस सड़क के फोर लेन का मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री और बर्तमान मुख्यमंत्री तक पहुचा। इसके साथ ही एनजीटी ने भी फोर लेन के निर्माण के लिए सखत निर्देश जारी किए और समय बीतने  के साथ उसका दबाव बढ़ता रहा तब जाके इसका मार्ग प्रशस्त होसका था।

दशकों से चल रहा संघर्ष पर लापरवाही भारी पर रहा भारी 

अब इस प्रोजेक्ट पर फिर पीडब्लूडी के प्रोजेक्ट तैयार करने वाले अधिकारियों की लापरवाही इस संघर्ष पर भारी पड़ न जाये कि सम्भावना से फिलहाल सहज इनकार नही क्या जासकता है। इस आशंका का उल्लेख हमने पहले  ही अपनी रिपोर्ट में क्या था जो अब सच साबित होता नजर आरहा  है। क्यो की जमीनी स्तर  की हकीकत तो यही बया कर रही  है।सूत्रों की माने तो फिल हाल यह फोर लेन का प्रोजेक्ट खटाई में पड़  ही गया है ।क्योकी जब तक एनसीएल की पाइप लाइन शिफ्ट नही होती तब तक निर्माण कार्य हो ही नही सकता हैं। जिसमे में भी अभी कई पेंच फसे है जैसे  कास्ट एंड लैंड की व्यवस्था एक महत्वपूर्ण मसला समेस्या के समाधान के लिए मुह वाये यक्ष प्रश्न बन खड़ा है। फिलहाल पाईप लाइन के एरिया का सर्वे शुरू हो गया है।सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की तस्वीर साफ होगी। जानकारों के अनुसार यह प्रोजेक्ट भी रोड प्रोजेक्ट जैसे ही भारी भरकम हैं जिसमे 50 करोड़ के ऊपर ही खर्च होने और पाईप लाइन शिफ्ट करने में साल भर से अधिक समय लगने की बात बता रहे हैं। जिससे अब यह कहना अतिश्योक्ति नही होगा कि अब अनपरा से शक्तिनगर तक का फोर लेन के निर्माण का काम सपना बन के न रह जाये ।

सबसे बड़ी समस्या एनसीएल  पाईप लाइन शिफ्ट करना 

आपको बतादे की 18 किमी दूरी वाली इस सड़क में लगभग 12 किमी तक यानी शक्तिनगर से ककरी तक एनसीएल  की वाटर सप्लाई की हैवी डायमीटर की पाईप लाईन  सड़क के दोनों किनारों से सट के विछई गयी है।जिससे परियोजनाओं को पीने के पानी सहित अन्य उपयोग  हेतु जलापूर्ति की जाती है।सड़क के दोनों किनारे विछई गयी पाईप लाईन को बगैर शिफ्ट किये सड़क का निर्माण हो ही नही सकता ।इस पाईप लाईन को शिफ्ट करने में कई दिक्कते आरही हैं।
सबसे पहले जमीन की समेस्या खड़ी होगयी है ,फिर भारी भरकम कास्ट जो रोड प्रोजेक्ट से कम काष्ट नही पड़ेगा।ऐसी स्थिति में एक बार फिर लगता है फोर लेन का निर्माण कार्य खटाई में पड़ता दिख रहा है । फिल हाल पाईप लाइन का सर्वे चल रहा है।हा एक बात हैं कि जिन अतिक्रमणकारियो की सासे अटकी हुई थी वे फिल हाल राहत की सासे  ले रहे है ,लेकिन यह कहावत तो उनके सर मंडराती ही रहेगी कि "बकरे की मई कितने दिन खैर मनाई" ।

सरकार के मंशा और जनता के उम्मीदों पर पानी फेरने वाले लापरवाह अधिकारियों पर क्या कार्यवाही होगा 

प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों के इस घोर लापरवाही का खामियाजा तो जनता और सरकार दोनो को ही उठाना पड़ ही गया।इस मार्ग पर हो रहे  बड़े पैमाने दुर्घटना कम होने तथा कुछ प्रदूषण  कम होने की जनता को आशा और उमीद जो बंधी थी उस पर यह लापरवाही पानी फेरता नजर आ रही है।

अब सरकार को समय पर निर्माण दाई संस्था को समय से भूमि नही मिली तो प्रोजेक्ट कास्ट भी बढ़ेगा और ठीकेदार का क्लेम भी बनेगा। या निविदा कोई कारण दिखा निरस्त कर फिर नए सिरे से विभाग इसकी
कवायद शुरू करे।

यह बात तो अब आईने की तरह साफ़ हो गया कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट ऐसी के बन्द कमरे में तैयार की गई थी जिसका जमीनी हकीकत से कोई लेना देना नही था ,जिसके चलते यह फोर लेन  का प्रोजेक्ट सम्बन्धित अधिकारियों के लापरवाही का फिल हाल भेंट चढ़ ही गया है।इस लापरवाही की कीमत अंततः केंद्र व राज्य सरकार को भी उठाना पड़ेगा।

प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों ने जो घोर लापरवाही की है  इन पर क्या कार्यवाही विभाग करेगा यह तो अभी भविष्य के गर्भ में है? पर फोरलेन के निर्माण पर तो ग्रहण लग ही गया , जिसके लिए सम्बन्धित अधिकारी ही जिम्मेदार अधिकारी  है ।

अब इस फोर लेन के निर्माण में तरह तरह की आशंकाओं के बादल तो मंडराने ही लगे  हैं। जिस सत्य को कोई अब झुठला नही सकता है। जिसकी आशंका मैंने अपनी पहली ही रिपोर्ट में कर दिया था जो सच साबित हुवा।
ऐसी स्थिति में कुछ ज्वलन्त सवाल पीडब्लूडी के अधिकारियों के समक्ष यक्ष प्रश्न बनकर उत्तर की प्रतीक्षा में खड़े है ? जो इस प्रकार हैं।

सवाल न01, अब सवाल उठता है कि बगैर अनापत्ति के पीडब्लूडी के सड़क से सटा कर एनसीएल ने  कैसे पाईप लाइन को बिछा ली? तब पीडब्लूडी क्या कर रही थी? उस समय पीडब्लूडी ने क्यो नही आपत्ति की थी?

सवाल न 0 2,पीडब्लूडी  के प्रोजेक्ट रिपोर्ट में इसका जिक्र क्यो नही था? इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?
प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने वालो के खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही हुई या नही ?यह सभी अनुत्तरित सवाल से तो अब पीडब्लूडी को रूबरू होना ही पड़ेगा?

सवाल न03 प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करते समय एनसीएल के अधिकारियों को क्यो नही पत्र लिखा गया?
अब क्यो पत्र काम शुरू होने के बाद  लिखा गया हैऔर उनके साथ मीटिंग पर मीटिंग करनी पड़ गयी यह प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के पहले क्यो नही हुई आदि अनेको अनुत्तरित प्रश्न  जबाब के लिए तो खड़े हो ही गए है जिनका उत्तर तो जनता को देना ही पड़ेगा हैं? क्या उक्त के चलते काम रुक नही गया है? फिर आखिर इसके लिए कौन उत्तरदायी है ?यह जबाबदेही तो तय होनी ही चाहिए?

सवाल न0 4,रोड प्रोजेक्ट में होने वाली देरी और बढ़े खर्चे का जिम्मेदार कौन होगा?

सवाल न0 5,कैसे पूरा होगा 8 महीने के समय सीमा में सड़क का निर्माण ?इसका जबाब तो देना ही होगा पीडब्लूडी के अधिकारियों को?

सवाल न06,आधी सड़क एनटीपीसी के एरिया में भी लगभग 8किमी पड़ रही है और कुछेक गांव के काश्तकारों की जमीन व मकान इस सड़क और पाईप लाइन के जद में आरहे है उन्हें अभी तक अधिग्रहण की नोटिस तक नही दी गयी है यदि वे न्यायालय की शरण मे चले गए तो फिर क्या होगा ? इस तरह  अगर आपत्ति होगयी तो फिर क्या मामला सलटाते सलटाते  देर नही होगा ?

सवाल न 7,सड़क कही कही पर रेलवे लाईन से  सटी हई है ,वहा तो एक तरफ ही बढ़ना होगा तो क्या वहा पर फस रहे मकानों का मुवावजा बना ही नही है तो क्या विवाद नही होगा?
आदि अनेको सवाल इस सड़क निर्माण के समक्ष  समाधान के लिए खड़े हैं ? जिन पर पी डब्लू डी क्या करती हैं यह देखने वाली बात होगी?

देखना है आगे इस फोरलेन के  निर्माण में क्या होता है?फिल हाल तो यह खटाई में फिर पड़ ही गया हैं ?अब प्रश्न है कि यह फोर लेन बनती है?या नही?जिस पर सब की नजरें अब टिकी हुई है?
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