इंसान तो हैं,लेकिन इंसानियत कहां?

राजनेता तो यह सब सत्ता सुख के लिए करते हैं आप किस भ्रम में ऐसा सोंच पाल रहें हैं।


अब्दुल रशीद 

जब आप एक इंसान को तड़प तड़प कर दम तोड़ते हुए तमाशबीन बनकर देखने लगे तब अपने अन्तरात्मा से जरूर पूछिएगा के आप जिंदा हैं? सवाल इसलिए के जब कोई जानवर ऐसा नहीं करता तो फिर जिंदा इंसान ऐसा कैसे कर सकता है।

दरअसल यह मौजूदा राजनीति का ही असर है के हमने अपने कुंठा को पोषित करने के लिए ऐसे ऐसे घृणित विचार एक दूसरे के प्रति मन मे भर लिए हैं की एक दूसरे की मदद क्या एक दूसरे के लिए मीठे बोल तक नहीं बोलते। ऐसा नहीं तो अन्नदाता अन्न के और इंसान इंसानियत के अभाव में क्यों दम तोड़ रहा।

राजनेता तो यह सब सत्ता सुख के लिए करते हैं आप किस भ्रम में ऐसा सोंच पाल रहें हैं। यकीन जानिए,जरूरत पड़ने पर आपके पड़ोसी,आपके मित्र,आपके नजदीक खड़ा अंजान ही आपका मददगार होगा,बशर्ते इंसानियत जिंदा रहे।

आज मैं उस इंसान की बात कर राह हूं जिसने अपनी परवाह किए बग़ैर सैंकड़ों लोगों की जान बचाई,लेकिन जब उसे मदद की जरूरत पड़ी तो कोई एक हाथ भी आगे नहीं बढ़ा, शायद  एक हाथ भी आगे बढ़ जाता तो आज वो जिंदा होता। यह कड़वी सच्चाई उस जिनेश जेरोन की। 

जी हां वहीं जिनेश जिसने अपनी जान की परवाह किए बिना केरल में भीषण बाढ़ के दौरान कई लोगों की जान बचाई थी। लेकिन सड़क हादसे के बाद उन्होंने तब दम तोड़ दिया, जब किसी राहगीर ने उनकी मदद करना जरूरी नहीं समझा।

तड़पता रहा जिग्नेश,किसी ने मदद नही की।

23 वर्षीय जिनेश जेरोन बीते शुक्रवार को सड़क हादसे का शिकार हो गए थे। वे कन्याकुमारी के नजदीक कोल्लानगोडू से बाइक पर जा रहे थे, तभी एक ट्रक सामने से आया और उन्हें कुचल दिया। इस दौरान उनके साथ दोस्त जगन भी थे। हादसे में जिनेश गंभीर रूप से घायल हो गए। वह करीब आधे घंटे तक सड़क पर तड़पते रहे, लोग आते रहें जाते रहें लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की।

मदद मिलता तो जान बच जाती।

उनके दोस्त जगन ने कहा कि मुझे विश्वास नहीं होता कि जिनेश जैसे व्यक्ति के साथ ऐसा हो सकता है। उसे दूसरों की मदद करना बेहद पसंद था। इसी से वह बाढ़ के दौरान हीरो बना था। हादसे के बाद उन तक एम्बुलेंस पहुंचने में आधा घंटा लग गया। वहां कुछ देर तक संघर्ष बाद जिग्नेश ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके दोस्त ने कहा कि अगर किसी ने हमारी मदद की होती तो जिनेश की जान बच जाती। 
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