#Me Too... नवरात्रि और देवी स्वरूपा नारी शक्ति,,,!

#Me_Too

अब तक चुप रहने से यह महिलाएं खुद ही स्वयं को आरोपी से जायदा अपने को स्वयं ही सवालों के कटघरे में खड़ी नही कर दी है?

के सी शर्मा 
भारतीय इतिहास इस बात का गवाह है कि जब जब इस धरती पर नारी को भोग्या बनाने का प्रयास हुआ है तब तब महाभारत जैसा महायुद्ध एवं महाविनाश हुआ है। जैसे श्री राम के समय सीताजी को लेकर जो राम रावण के बीच युध्य हुआ था! ,

वहीं श्री कृष्ण के काल में द्रोपदी को लेकर कौरवों एवं पाण्डवों के बीच भी युध्य हुवा था! अथवा जगतजननी नवदुर्गा एवं राक्षसों के मध्य युध्य हुआ हो। भारत मे नारी को आदिकाल से शक्तिस्वरूपा देवी समान माना गया है और कन्याओं को साक्षात दुर्गा का स्वरूप मानकर कन्या पूजन और उनको उनका पॉव धूल कर उन्हें भोज कराया जाता है। परन्तु वर्तमान में स्त्री  को "देवी शक्तिस्वरूपा" नहीं बल्कि कामवासना तृप्ति का लोगो द्वारा माध्यम मान लिया गया है। यह हमको पतन की ओर क्या नही ले जारहा हैं?

औरतो की दुनिया भर में उनकी मजबूरियों का फायदा उठाकर यौन प्रताड़ना की जा रही हो, सिर्फ यही बात नही है,बल्कि आज औरते भी अक्सर देखने,पढ़ने को मिलता रहता है कि वह भी सार्टकट का रास्ता अपनाने लगी है ।

अब देखा जारहा है कि राजनीति,पत्रकारिता,नौकरी,आदि,क्षेत्रो में सफलता पाने या दिलाने के नाम पर महिलाओं के यौन प्रताड़ना करने का जैसे रिवाज होता जा रहा है ।

महिलाओं को अक्सर इन क्षेत्रों में जगह बनाने के चककर में यौन उत्पीड़न का दंश झेलना पड़ता है।इस क्षेत्र में उनका शोषण करने का दौर लम्बे अरसे से चला आ रहा है।

विदेशों के बाद अब शायद यह पहला मौका है जब #Me_Tooके माध्यम से अपने साथ हुए अतीत के घटना क्रम को सामने लाने का जो प्रयास किया जा रहा है। इसमें कितनी सच्चाई हैं यह कह पाना आसान बात नही है और नही इसको सीरे से खारीज भी नही किया जा सकता है । 

लेकिन यह तो कहना अतिश्योक्ति नही होगा कि दशकों बाद यह सवाल खड़ा करने वाली महिलाएं घटना क्रम के समय इसका प्रतिरोध क्यो नही की और इतने दिनों तक चुप क्यो रही? जबकि ये महिलाएं अभिजात्य वर्ग से ज्यादातर आती है और उस समय भी हर तरह से सक्षम थी।

अब तक चुप रहने से यह महिलाएं खुद ही स्वयं को आरोपी से जायदा अपने को स्वयं ही सवालों के कटघरे में खड़ी नही कर दी है?
हां यह बात अलग है कि यौन प्रताड़ना की शिकार महिलाओं को आमजनता के सामने सोशल मीडिया के माध्यम से इस समय अपना दर्द व्यक्त करने का एक मंच #Me_Too मिला है। 

इस अवसर का इस्तेमाल यह महिलाएं अपना दर्द बयां करने के लिए कर रही है?या यह ब्लैक मेल करने का एक मंच बन के तो भारत मे नही उभर रहा है?

यह एक विचारणीय सवाल इस समय जरूर देश के सामने अवश्य ही खड़ा हो गया है ।जिस पर राष्ट्रीय बहस की आवश्यकता है ।

पर तब तक इसका परिणाम आने वाले समय मे न जाने कितने घरों को तोड़ देगा और कईयों की जिंदगी भी निश्चित ही तबाह कर के रख देगा। इस समय जबकि भारत का पूरा जनमानस नवरात्रि में नारी शक्ति के रूप नवदुर्गा के विभिन्न स्वरूपों में पूजा अर्चना करने में लगा हुआ है और उनके चरणों मे नतमस्तक है।

ऐसे समय मे  #Me_Too का अभियान चलाया जा रहा है ।अब तक इसके माध्यम से तमाम मामले सामने आचुके हैं।इसको लेकर देश मे खलबली मची हुई है।

हर बड़ी सख्शियत अंदर ही अंदर ख़ौफ में है कि कोई खड़यंत्र का शिकार न होजाये ।कहने वाले तो दबी जुबान यह भी कह रहे है यह विदेशी कल्चर भारतीय संस्कृति और मर्यादा को तहस नहस करने के लिए एक सोची समझी साजिश  भी हो सकती है।

इस नवरात्रि के शुरू होते ही केन्द्र सरकार के एक मंत्री भी इस  #Me_Too अभियान के शिकार हो उससे घिर गये हैं, और बचाव में सुप्रीम कोर्ट की उन्हें शरण लेनी पड़ी हैं। जहां इस मामले की शीघ्र सुनवाई होने वाली हैं।जिस पर सब की नजरें टिकी हुई है ।

आरोपित केन्द्रीय मंत्री एम जे अकबर पर  #Me_Too के तहत यौन प्रताड़ना करने का लगाया गया आरोप उस समय का है जबकि वह देश के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार थे और पत्रकारों की नियुक्ति करने का अधिकार उनके पास था। उन पर एक नहीं करीब एक दर्जन पत्रकार महिलाओं ने नौकरी के नाम पर यौन प्रताड़ना करने का आरोप लगाया है।

इसके बाद राजनैतिक गलियारों में एक तूफान सा आ गया है और केन्द्रीय मंत्री के खिलाफ आंदोलन प्रदर्शन के साथ इस्तीफा देने कीमांग होने लगी है।

विशेष बात यह है कि इस *"मीट टू"* अभियान में देश और दुनिया के जितने भी लोग आरोपित किये गये हैं सभी शिक्षित व विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों पर आसीन हैं।

इस  #Me_Too अभियान से बहुतों के चेहरे से बेनकाब।उतरने लगे हैं और इसीलिए  #Me_Too का यहअभियान इस समय दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है।

केन्द्रीय मंत्री पर अभी हाल में आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार प्रियंका रमानी का कहना है कि यह घटना बीस साल पहले उस समय हुयी थी जब वह उनके साथ पत्रकारिता करती थी। आरोपी मंत्री इसे सरासर झूठा शरारतपूर्ण श्रंखलाबद्ध प्रेरित पूर्व नियोजित कुचक्र मान रहे हैं और उन्होंने गवाहों सबूतों के साथ सर्वोच्च न्यायालय से न्याय की गुहार लगाई है।दूसरी तरफ आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार ने कहा कि वह सच के सहारे मानहानि के मुकदमें का सामना करूंगी 

महिलाओं के इन आरोपो से पत्रकारिता, राजनीति, विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों पर बैठे लोगों पर लग रहे आरोपों के बाद यह बात तो अब जगजाहिर हो ही गयी है कि इन क्षेत्रों में उच्च पदों पर बैठे लोगो मे किस कदर गिरावट आगयी है।

देखिए आगे यह  #Me_Too और क्या?गुल खिलता है और कितने महानुभाओं के चेहरे पर से नकाब हटाता हैं?
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