अहिंसा दिवस पर किसानों पर हिंसा

“हे किसान, तू बादशाह है.”


अपनी मृत्यु से ठीक एक दिन पहले यानी 29 जनवरी, 1948 की प्रार्थना सभा में गांधी का कहना था - ‘मेरी चले तो हमारा गवर्नर-जनरल किसान होगा, हमारा बड़ा वजीर किसान होगा, सब कुछ किसान होगा, क्योंकि यहां का राजा किसान है. मुझे बचपन से एक कविता सिखाई गई - “हे किसान, तू बादशाह है.” किसान ज़मीन से पैदा न करे तो हम क्या खाएंगे? हिंदुस्तान का सचमुच राजा तो वही है. लेकिन आज हम उसे ग़ुलाम बनाकर बैठे हैं. आज किसान क्या करे? एमए बने? बीए बने? ऐसा किया तो किसान मिट जाएगा. पीछे वह कुदाली नहीं चलाएगा. किसान प्रधान (प्रधानमंत्री) बने, तो हिंदुस्तान की शक्ल बदल जाएगी. आज जो सड़ा पड़ा है, वह नहीं रहेगा.’

आज  2 अक्टूबर.2018,को जब पूरा देश अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी और 'जय जवान, जय किसान' का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन मना रहा है, तब उत्तर प्रदेश सीमा पर किसानों के शांतिपूर्ण विरोध मार्च को रोकने के लिए दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर पुलिस उन किसानों पर रबर की गोलियां,आंसू गैस के गोले चला रही थी।

पुलिस की बर्बरतापूर्ण कार्यवाही में घायल अपने साथियों के पैरों और हाथों से बहते खून को दिखाते किसान कहते हैं, ''चुनाव के वक़्त कर्ज़माफ़ी का वादा करते हैं, लेकिन बाद में भूल जाते हैं. किसानों के साथ मज़ाक बना रखा है। साढ़े चार साल हो गए. किसानों पर क़र्ज़ सरकार की ग़लत नीतियों की वजह से है। झूठ बोल के वोट हासिल किए, अगले चुनाव में कतई स्वीकार नहीं करेंगे, ये हम पर गोलियां चला रहे हैं।''

क्या है किसानों की मांग 

1-स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशें लागू हो 

  • कम दाम में अच्छी क्वालिटी के बीज
  • किसानों के लिए ज्ञान चौपाल
  • महिला किसानों को क्रेडिट कार्ड
  • प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए कृषि जोखिम फंड
  • फ़सल उत्पादन मूल्य से 50 फ़ीसदी ज़्यादा दाम
  • बेकार पड़ी ज़मीन को भूमिहीन किसानों में बांटना
  • वनभूमि को कृषि से इतर कामों के लिए कॉरपोरेट को न दें
  • सबको मिले फसल बीमा की सुविधा
  • एग्रिकल्चर रिस्क फंड बनाया जाए
2-किसान 60 साल की आयु के बाद पेंशन देने की मांग कर रहे हैं।
3-पीएम फसल बीमा योजना में बदलाव करने की मांग।
4-गन्ना की कीमतों का जल्द भुगतान की मांग।
5-किसान कर्जमाफी की भी मांग कर रहे हैं।
6-सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त में देने की भी मांग।
7-किसान क्रेडिट कार्ड पर ब्याज मुक्त लोन।
7-आवारा पशुओं से फसल का बचाव।
8-सभी फसलों की पूरी तरह खरीद की मांग भी की गई है।
9-इसके अलावा किसान स्वामीनाथन कमिटी की रिपोर्ट को लागू करने की भी मांग है।
10-गन्ने की कीमतों के भुगतान में देरी पर ब्याज देने की मांग कर रहे हैं। 

अब किसान देश की राजधानी आकर अपना दर्द भी नहीं सुना सकते!’’

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भाजपा पर अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के दिन दिल्ली सीमा पर किसानों की ‘‘बर्बर पिटाई’’ का आरोप लगाया और सवाल किया कि वे राष्ट्रीय राजधानी में अपनी शिकायत का जिक्र भी नहीं कर सकते? 

उन्होंने हिंदी में ट्वीट किया, ‘‘विश्व अहिंसा दिवस पर भाजपा का दो-वर्षीय गांधी जयंती समारोह शांतिपूर्वक दिल्ली आ रहे किसानों की बर्बर पिटाई से शुरू हुआ। अब किसान देश की राजधानी आकर अपना दर्द भी नहीं सुना सकते!’’
ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली - उत्तर प्रदेश सीमा पर किसानों के शांतिपूर्ण विरोध मार्च को रोकने के लिए गांधी जयंती पर पुलिस की कार्रवाई बर्बरतापूर्ण थी और उनकी मांगों पर विचार करने का केंद्र का आश्वासन ‘झांसा’ लगता है।एआईकेएस ने कहा कि देश के किसान केंद्र और अनेक भाजपा नीत राज्य सरकारों के हमले का सामना कर रहे हैं।
एआईकेएस के महासचिव और वामपंथी नेता अतुल कुमार अन्जान ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा महात्मा गांधी के विचारों को लेकर तथाकथित प्रतिबद्धता महज दिखावटी प्रेम और घड़ियालू आंसू बहाना है।उन्होंने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा, ‘‘गांधी जयंती पर शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली आ रहे किसानों पर एक बार फिर बर्बरतापूर्ण पुलिस कार्रवाई की गयी।’’ 

स्वामीनाथन आयोग में भारतीय किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले अन्जान ने दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर किसानों पर की गयी कार्रवाई की निंदा की।

अन्जान ने कहा कि गांधी के सिद्धांतों का पालन करने का दावा करने वाली मोदी सरकार ने शांतिपूर्ण किसानों पर निशाना साधकर राष्ट्रपिता का अपमान किया है।

किसानों का विरोध प्रदर्शन राजनीति से प्रेरित: केंद्रीय मंत्री 

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किसानों से मुलाकात के पहले भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) नीत किसान आंदोलन राजनीति से प्रेरित बताया। शेखावत ने कहा, 'इसके पीछे एक कारण है। चूंकि यह चुनावी साल है...इसलिए बहुत से लोगों के विभिन्न मकसद हैं। यही इसका एकमात्र कारण है। अन्यथा, देश भर के किसान मोदी सरकार से बहुत संतुष्ट और आभारी हैं।'

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का प्रेस कांफ्रेंस 


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