सुप्रीमकोर्ट के फैसले के विरोध में बोलने के क्या मायने ?

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अब देश की अदालतों के फैसले भी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अपने राय के अनुसार चाहते हैं?ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि वो चाहते हैं कि अदालतें व्यावहारिक हों और वैसे ही फ़ैसले दें, जिन्हें अमल में लाया जा सकता है।

यह सलाह सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले के संदर्भ में दी गई है, जिसमें स्वामी अयप्पा के सबरीमला मंदिर में 10 से 50 आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी गई है।

अमित शाह ने यह बयान केरल के कन्नूर में ज़िला बीजेपी कार्यालय के उद्घाटन के मौक़े पर आयोजित सार्वजनिक सभा के दौरान दिया।

अमित शाह ने यह सलाह इस वजह से भी दी है क्योंकि सबरीमला मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जो हंगामे और विरोध प्रदर्शन हुए हैं उनमें 2500 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया।

अमित शाह ने सबरीमाला के अयप्पा मंदिर में महिलों के प्रवेश को लेकर जो कुछ कहा यदि उसे कानून और अदालतों की नज़रो से देखा जाए तो यह सरासर देश की सर्वोच्च अदालत के निर्णय को अहमियत न देना है।

अमित शाह ने माहवारी आयुवर्ग की महिलाओं को अयप्पा मंदिर में प्रवेश देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध कर रहे श्रद्धालुओं का समर्थन किया। अमित शाह यहीं नहीं रुके उन्होंने अदालतों को सलाह भी दे डाली। शाह ने कहा कि अदालतें इस तरह के फ़ैसले ना दें जो व्यवहारिक ना हों।

उन्होंने अपने टिप्पणी को सही साबित करने के लिए तमिलनाडु में सांडों को काबू में करने वाले खेल जलीकट्टू और मस्जिदों में लाउडस्पीकर के प्रयोग पर रोक लगाने संबंध सुप्रीम कोर्ट के ऐसे फैसलों के उदाहरण दिए, जिन्हें लागू नहीं किया जा सका।

सुप्रीम कोर्ट और संविधान पर हमला है

मुख्यमंत्री पिनरई विजयन  ने ट्वीट करके कहा है कि ,अमित शाह ने कन्नूर में जो बयान दिया है वह सुप्रीम कोर्ट और संविधान पर हमला है, उनका जोर देकर कहना कि, कोर्ट को अपने आपको ऐसे आदेशों तक सीमित करना चाहिए जिन्हें अमल में लाया जा सके, बताता है कि वह संविधान द्वारा दिए गए मूल अधिकारों की रक्षा करने के प्रति कितने सजग हैं।

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का समर्थन करने वाले संत के आश्रम पर हमला

इस बीच शनिवार को तिरुवनंतपुरम में स्थित स्वामी संदीपानंद गिरी के आश्रम में हमला किया गया।आश्रम में खड़ी दो कार और एक स्कूटर पर किसी ने आग लगा दी।

स्वामी संदीपानंद गिरी उन कुछ लोगों में शामिल हैं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सबसे पहले स्वागत किया था।

मुख्यमंत्री विजयन ने आश्रम का दौरा किया और वहां हुए नुक़सान का जायज़ा लिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सांप्रदायिक ताक़तों को इस तरह प्रदेश का क़ानून हाथ में नहीं लेने देगी।
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