सोनभद्र - यहां के पत्रकार पहन लें चूड़ियां !

मामला हिंडाल्को इंडस्ट्रीज रेनुसागर के श्रमिकों के आंदोलन पर देश के नामचीन अखबार होने का दावा करने वाले अखबार के पत्रकारों द्वारा पपीड़ित मजदूरों की पीड़ा न छापने का है।

  • मामला हिंडाल्को इंडस्ट्रीज रेनुसागर के श्रमिकों के आंदोलन पर देश के नामचीन अखबार होने का दावा करने वाले अखबार के पत्रकारों  द्वारा पीड़ित मजदूरों की पीड़ा न छापने का है।
  • सवाल यह है की कंपनियों की मोटी रकम विज्ञापन के रूप में लेने वाले तथाकथित निष्पक्ष पत्रकार बिना विज्ञापन के गरीबों के हक़ की बात भी नहीं कह सकता?
के सी शर्मा 
रेनुसागर।।सोनभद्र जिले के अनपरा थाना अंतर्गत बिड़ला की हिंडालको पावर डिवीजन कंपनी रेनुसागर में मजदूरों का आंदोलन लगातार जारी है।आंदोलनरत श्रमिको और स्थानीय लोगो ने बताया कि संविदा श्रमिको का पूरा परिवार कल दिपावली नही मनाए, इन श्रमिको केे घरों मेंं  अंधेरा पसरा रहा।

कम्पनी प्रबन्धन सौतेले रवैया से दुःखी आंदोलनरत  श्रमिक कम्पनी के तरफ से वटने वाला मीठा भी नही ग्रहण किए।

जिस प्रदेश के मुखिया दीपोत्सव उत्सव का आयोजन का पूरी दुनियां को यह सन्देश देने का प्रयास कर रहें हैं के हम कितने आस्थावान हैं,और अपने त्योहारों के लिए कितना उत्साहित रहते हैं,उसी प्रदेश के सोनभद्र जिले में एक निजी कंपनी के प्रबंधन के हठधर्मिता ने सैंकड़ो मजदूरों के दीपावली उत्सव को अंधकारमय कर दिया?

सवाल यह है देश की,क्या ये श्रमिक प्रदेश की सौतेली संतान है?


कैजुअल वाले श्रमिको ने कहा कि जब से श्रमिको का आंदोलन चल रहा है तब से यहा उर्जान्चल का कोई पत्रकार झांकने तक नही आया और न ही संगठन द्वारा प्रेषित प्रेस विज्ञपत्ति को ही प्रकाषित किया । चंद सिक्को पर अपनी जमीर बेचने वाले पत्रकारो को धिक्कार है ।श्रमिक कल से चूड़ियां बाट कर कहेगा कि यहां के पत्रकार पहन लें चूड़ियां। 

लगता है जीते जी मर जाऊं

जिस पर उर्जान्चल के एक प्रमुख पत्रकार ने हमे अपनी दुखे मन से भेजी प्रतिक्रिया में यहाँ तक लिख दिया है कि क्या करूँ विवसता ने----? स्थिति यह बना दी है कि,उन्होंने आगे लिखा कि सिर्फ साल भर में 5000 कूल लाभ पता हूँ ,सब जोड़ कर।पर----?


यह प्रतिक्रिया पढ़ मुझे यहा के पत्रकारों की स्थिति और उनकी विवसता सहज ही समझ मे आगयी ,पर मैं स्वयं को मर्माहत होने से अपने को रोक नही सका।बरबस ही उस पत्रकार की पीड़ा को इस स्टोरी के रूप में उकेरने को मजबूर हो गए ।

यह भी पढ़िए - HINDALCO - कंपनी प्रबंधन के हठधर्मी से मजदूरों का दीपावाली रहा अंधकारमय
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