अयोध्या में बनेगा आराध्य देव राम का मन्दिर, मुस्लिम करें सहयोग- शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती

हमारी लड़ाई मुसलमानो से नही अपनो से ही है।

  • जन्मभूमि में आराध्य राम के मन्दिर की मांग के साथ परमधर्मसंसद् सम्पन्न
  • हमारी लड़ाई मुसलमानो से नही अपनो से ही है।
  • कल परम धर्माधीश शंकराचार्य जारी करेंगे परम धर्मादेश
जीत नारायण सिंह 
परमधर्मसंसद् के तीसरे एवं अन्तिम दिन दोनो सत्रों में विभिन्न विषयों पर गहन विमर्श हुआ। तीसरे दिन भी राम मन्दिर के लिए कटिबद्ध सनातनी धर्मांसदो ने आवाज उठायी। सीर के विशाल मैदान में चल रहे परमधर्मसंसद् में मंगलवार को हर हर महादेव के उद्घोष और जय श्री राम के नारों से गूंजित परमधर्मसंसद् के प्रांगण में हर कोई राम मन्दिर पर अपना अभिमत रखने को आतुर दिखा। दिन भर की चर्चा के बाद अवर सदन ने अपना प्रस्ताव प्रवर सदन को सौंप दिया, जिसमें राम मन्दिर के निर्माण से लगायत मन्दिर रक्षा, धर्मांतरण, वैदिक शिक्षा, गंगा रक्षा और धर्म रक्षा जैसे विषय शामिल रहे। प्रवर सदन ने भी विमर्श के उपरान्त अपना सामूहिक अभिमत परम धर्माधीश जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज को सौंप दिया। जिस पर कल केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में वें धर्मादेश जारी करेंगे।


प्रवर धर्माधीश स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने संसद की कार्यवाही प्रारम्भ करते हुए कहा कि यदि हमें आने वाली पीढ़ी को दुनिया के समकक्ष तैयार करना है तो छोटी उम्र से ही बच्चो में धर्म की भावना विकसित करनी होगी। उन्होने कहा कि नवीनता प्राचीनता को बचाने के लिए लाई जाती है, लेकिन यदि नवीनता की कीमत पर हमारी प्राचीनता को नष्ट किया जायेगा तो यह उचित नही है।

चित्र की नहीं चरित्र की पूजा

सनातन धर्म में चित्र नही बल्कि चरित्र की पूजा की जाती है इसलिए हम भगवान श्रीराम को पूजते है। स्वामी च्रकपाणि ने कहा कि ताकत सरकार के पास नही बल्कि हिन्दुत्व में है जिसने दो सीट वाली पार्टी को सत्ता के शीर्ष तक पहॅुचा दिया। जो राम को भूलता है वह खुद ही चुनाव हार जाता है, जो जगद्गुरु को भुलाता है उसे जगत ही भूला देता है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण गोरखपुर में देखने को मिला।

ये बातें हिन्दू महासभा के स्वामी चक्रपाणि जी ने कहा। उन्होंने कसा कि आज सनातन धर्म को बहुत नुकसान पहॅुचाया जा रहा है। भगवान् आज भी फटे हुए टेन्ट में है, जो भी साधु सन्त अधर्म के खिलाफ आवाज उठाता है उसे फर्जी मुकदमों में फॅसा दिया जाता है। यहधर्मसंसद् 1008 किसी एक सीमा में बंधी हुई नही है बल्कि सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड का प्रतिनिधित्व कर रही है। इसका लक्ष्य बेहद पवित्र है, यह हमारा सौभाग्य है जो हम इसमें प्रतिभाग कर रहे है।

हमारी लड़ाई मुसलमानो से नही अपनो से ही है।

अयोध्या में राम मंदिर के लिए अनशनरत रहे तपस्वी छावनी के बड़े सरकार स्वामी परमहंस जी महाराज ने कहा कि मुझे इस धर्म संसद में आने से सरकार ने रोका गया। आश्रम में तोड़फोड़ किया गया। हमारी लड़ाई मुसलमानो से नही अपनो से ही है। उन्होंने कहा कि मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि हम कभी भी बीफ की कमी नही होने देंगे। यह अत्यन्त निन्दनीय कथन है और इस धर्मसंसद् में आने के लिए मुझे बहुत संघर्ष करना पड़ा । मुझे नजरबन्द भी कर दिया गया था । मैं किसी तरह यहाँ पहुँचा हूँ।

गौवंश की रक्षा आवश्यक

छत्तीसगढ़ के श्री महन्त बालक दास ने कहा कि हमने अपने यहाॅ गौवंश के संरक्षण हेतु गौ अभ्यारण्य बनाया। एक गौवंश प्रतिदिन पचास रूपये का गोबर देता है जिससे ही उनकी सेवा हो सकती है। अयोध्या में जनाक्रोश को उभारने का ही प्रयास किया गया।

मन्दिर मनुष्य का विकास करते है, यह विकास में बाधक नहीं

गूगल ब्याय के नाम से विख्यात कौटिल्य ने कहा कि सरकार सबको यह बता रही है कि काशी के मन्दिर विकास में बाधक है, इसलिए उन्हे तोड़ा जा रहा है। मन्दिर विकास के कारक है लेकिन आज उन्हे विकास में बाधक करार दिया जा रहा है। आगे कहा कि आजकल कुछ लोग काशी की तुलना जापान के क्योटो से करते है जो सही नही है। काशी दुनिया की सबसे प्राचीन आध्यात्मिक नगरी है, इसकी धरोहर ही इसकी पहचान है। कौटिल्य ने यह भी कहा कि गंगा में गिरते मलमूत्र उसकी पवित्रता को कम रहे है, लेकिन गंगा ही एक ऐसी नदी है जो खुद को पवित्र कर लेती है।

धर्मसंसद् का सुफल जरूर मिलेगा

वृन्दावन से पधारे कथावाचक अनुराग कृष्ण जी ने कहा कि जिस प्रकार प्रभु श्री राम समुद्र के सामने 3 दिन मार्ग के लिए बैठे थे उसी प्रकार यह तीन दिवसीय धर्म संसद राम मन्दिर के लक्ष्य के लिए अवश्य फलीभूत होगी।

पैसे से धर्म को खरीदने का प्रयास हो रहा

पूर्व विधायक अजय राय ने कहा कि काशी की पुरानी पहचान यहाॅ के धार्मिक स्थल है, जिन्हे तोड़ना उचित नही है। कुछ जगहो पर पैसे से धर्म को खरीदने का प्रयास किया जा रहा है। आज धर्म के तथाकथित रक्षक ही धर्म का नाश करने पर तुले है।

धर्म संसद में ब्रम्हचारी सुबुद्धानन्द महाराज, प्रज्ञानन्द जी, स्वामी राजीव लोचन दास जी, स्वामी लक्ष्मण दास, अच्यूतानन्द जी महाराज, इन्दुभवानन्द जी महाराज, जल कुमार साई, स्वामी प्रज्ञानन्द, स्वामी लीलानन्द, ब्रम्हचारी ज्योर्तिमयानन्द, डाॅ. श्रीप्रकाश मिश्र, गार्गी पण्डित, डाॅ. निरंजना नन्द जी, श्रीनिवास शर्मा, सावित्री पाण्डेय, रामधीरज, साध्वी ब्रम्हवादिनी आदि ने विचार रखे।

कश्मीरी पण्डितों का भी ध्यान रखा जाए

परम धर्म संसद में उठी कश्मीरी पण्डितो की भी आवाज - कश्मीरी पण्डित योगेन्द्र प्रसाद शास्त्री ने संसद में कश्मीरी पण्डितों के विस्थापन की मांग उठायी। उन्होंने कहा कि एक समय कश्मीर घाटी में चार सौ से ज्यादा मन्दिर हुआ करते थे जहाॅ विधि विधान पूर्वक पूजन अर्चन होता रहा। लेकिन वर्तमान समय में सिर्फ तीन मन्दिरों मे ही पूजा पाठ होता है और उसे मान्यता मिली हुई है जो अत्यन्त कष्टदायी है। स्वामी अशोकानन्द ने भी कश्मीरी पण्डितो की बात सदन में रखी। 

सप्तदिवसीय पंचदेव महायज्ञ की पूर्णाहूति

परमधर्मसंसद् के पावन प्रांगण में चल रहे सप्तदिवसीय पंचदेव महायज्ञ की पूर्णाहूति मंगलवार को हुई। विश्वकल्याणार्थ आयोजित इस महायज्ञ का जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द जी महाराज ने यज्ञ में आखिरी आहूति देकर इसकी पूर्णाहूति की। आचार्य विश्वेश्वर दातार धनंजय के आचार्यत्व में 31 भूदेवों ने भाग लिया। पूर्णाहूति से पूर्व मण्डप में आह्वाहित देवताओं का पूजन किया गया।

धर्मसंसद् में सबकुछ रहा निःशुल्क

धर्मसंसद में तीनों दिन सब कुछ भक्तों के लिए निःशुल्क संचालन हुआ। तीन दिनों में 25 हजार से ज्यादा सनातनधर्मियों ने भोजन, नाश्ता और चाय ग्रहण किया। खास बात यह रही की इसमें साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा गया था। भोजनालय में प्रवेश से पूर्व सबके जूते चप्पल बाहर निकलवा कर ही प्रवेश करना था। संसद् में 70 स्वयंसेवको ने दिन रात अथक परिश्रम कर सबके लिए भोजन व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित किया।

स्वास्थय शिविर में सैकड़ो ने कराया परीक्षण

परमधर्मसंसद् में तीनों दिन सीएमओ द्वारा चिकित्सा शिविर लगाया गया। शिविर में तीसरे दिन सौ से ज्यादा धर्मासंदो ने अपना स्वास्थय परीक्षण कराया। डाॅ. एसपी तिवारी के निर्देशन में दवा भी दिया गया। उनकी टीम में आर के सिंह, रवि त्रिवेदी आदि शामिल रहे। उपस्थित भक्तों व आम जनता ने भी इसका लाभ लिया ।

अयोध्या में बनेगा आराध्य देव राम का मन्दिर, मुस्लिम करें सहयोग- शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती

जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष् एवं द्वारिका शारदापीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि अयोध्या में रामलला का मन्दिर बन के रहेगा, लेकिन वह राम आर्दश राम का नही बल्कि आराध्य देव राम का होगा। यही हमारी भावना है और हमारा संर्घष भी इसी को लेकर है। परमधर्मसंसद् में बतौर परम धर्माधीश स्वामी स्वरूपानन्द जी महाराज ने कहा कि अब समय आ गया है जब मुस्लिम स्वयं हिन्दुओं को जन्मभूमि सौंप दे और मन्दिर बनने में सहयोग करे। जन्म स्थान पर कोई परिवर्तन संभव नही है और मन्दिर बनना भी तय है। उन्होंने कहा कि अयोध्या की धर्म सभा में जुटने वाले राम को मनुष्य मानने वाले थे जो राम का पुतला बनाने में रुचि रखते है ना कि रामलला के मन्दिर बनाने में। राम को मनुष्य मानना परमात्मा का अपमान है।

उन्होंने कहा कि आज हिन्दुओं को धर्म के नाम पर बरगलाया जा रहा है। कोई उन्हें दस दस बच्चे पैदा करने की नसीहत दे रहा तो कोई नये - नये छद्म भगवान ही बना दे रहा। उन्होंने कहा कि हिन्दु बच्चे पैदा करने की मशीन नही, हम संयम और सदाचार के पोषक है। धर्म के नाम पर सभी भारतीय एक है और एक रहेंगे चाहे वह किसी भी जाति का हो। भगवान भक्त की जाति देखकर कृपा नही करते। भारत की प्राचीन सनातन संस्कृति को बचाना हमारा कर्तव्य है। कुछ लोग अब अयोध्या में अश्वमेघ यज्ञ की तैयारी मे है, तो क्या वह वहाॅ ताॅबें का घोड़ा लायेंगे। जब कोई काम विधि पूर्वक ना हो तो उसमें अनिष्ट हो ही जाता है। 
यह आयोजन किसी को नीचा दिखाने के लिए नही बल्कि सौ करोड़ सनातनियों की अधर्म से रक्षा करने के लिए किया गया है। आज मन्दिरों में सरकार की शह पर साई की मूर्ति स्थापित की जा रही है और सनातनियों को जबरन उनकी पूजा करने का दबाव भी दिया जा रहा है। यह शास्त्र सम्मत है कि जब भी अपूज्यो की पूजा होगी तो नुकसान जनता का नुकसान होता है। उन्होंने यह भी कहा कि अर्ध कुम्भ में भी इस पर चर्चा होगी।पादूका पूजन कैप्टन अरविन्द सिंह ने किया।

कल जारी होगा परम धर्मादेश

प्रेस प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि कल अपराह्न दो बजे केदार घाट स्थित श्रीविद्यामठ में जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज पत्रकार वार्ता कर परम धर्मादेश जारी करेंगे।

यह परमधर्मसंसद् इस्लाम के विरुद्ध नही-सेराज सिद्दीकी

मुस्लिम पन्थ की ओर से सेराज सिद्दीकी जी ने कहा कि हम इस परमधर्मसंसद् में तीनो दिन उपस्थित रहे और एक मुसलमान होने के नाते मैं यह स्पष्ट रूप से कह सकता हूँ कि इस परमधर्मसंसद् में हमारे धर्म के विरुद्ध कुछ भी नही कहा गया और ऐसे परमधर्मसंसद् के आयोजन समय समय पर होते रहें तो समाज मे फैला वैमनस्य दूर होगा।
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