शक्तिनगर में भाजपा से उस वक्त जुड़ा जब इसका जन्म हुआ था। - के.सी.शर्मा

मेरी प्रतिवद्धता सिर्फ हस्तिनापुर के प्रति है, न कि कौरव पांडवो के प्रति।


  • शक्तिनगर में चल रहे संगीतमयी श्री राम कथा के दूसरे दिन कथा स्थल परपहुचे,राज्य सभा सदस्य रामशकल 
  • नदारत रहे इलाके के भाजपाई,
  • भाजपाईयों का दूरी बनाए रखना बना चर्चा का विषय 

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शक्तिनगर(सोनभद्र)।।जनपद सोनभद्र के ओद्योगिक क्षेत्र उर्जान्चल के शक्तिनगर में कल से संगीतमयी श्री राम कथा शुरू हुई है।कथा का आज दूसरा दिन था।

आज दूसरे दिन सोनभद्र जिले के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं महामहिम राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत इस क्षेत्र के पूर्व सांसद और भाजपा कार्यकर्ताओं के चहेते राज्य सभा के सदस्य राम शकल जी कुछ पल के लिए आज कथा स्थल पर पहुचे।जहा आयोजको द्वारा उनकी अगुवानी की गई और उनका स्वागत किया गया।

राज्य सभा सदस्य सीमावर्ती राज्य म प्र के पड़ोसी जिले के सिंगरौली जिले में विधान सभा चुनाव में प्रचार के लिए जारहे थे।शक्तिनगर के उनके अल्प समय के प्रवास में अगुवानी वाले जगह से श्री राम कथा स्थल तक स्थानीय भाजपाईयों का नदारत रहना आज श्री राम कथा से ज्यादा रामशकल के कार्यक्रम से भाजपाईयो का दूरी बनाए रखना चर्चा का विषय बन गया।

जितने लोग उतनी अटकलें अपने अपने तरीके से आकी जानेलगी और व्यक्त होने लगी।जो देर रात तक लोगो मे जारी था।मध्य प्रदेश में चुनाव प्रचार के लिए सड़क मार्ग से जाते समय सांसद रामशकल जी की आगवानी खड़िया बाजार के मोड़ पर कुछ आयोजक मण्डल के लोगो द्वारा की गई।

इसके बाद वे कुछ देर के लिए खड़िया बाजार में आयोजक मण्डल के मुख्यकर्ताधर्ता के आवास पर रुके।यहाँ कुछ देर रुकने के बाद संसद रामशकल कथा स्थल पर पहुचे और लगभग आधा घण्टा कथा स्थल पर रुकने के बाद वे मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के लिए प्रस्थान कर गए।इस दौरान अगुवानी से लेकर कथा स्थल तक किसी भी भाजपाई का दिखाई न पड़ना सब को हैरत में डाल दिया।क्योकि सांसद राम शकल सभी भाजपाईयो के दिल अजीज है।फिर भी भाजपाईयो का नदारत रहना ही नही बल्कि कार्यक्रम से दूरी बनाए रखना सब को हैरत में डाल दिया।जबकि देखने को मिला कि शक्तिनगर परिक्षेत्र के अधिकांश प्रमुख भाजपा नेता इलाके में मौजूद दिखे।

सबसे बड़े आश्चर्य की बात यह रही कि जब शक्तिनगर के पी डव्लू डी मोड़ के मैदान में चल रहे श्री राम कथा स्थल पर सांसद पहुचे तो कथा स्थल से मात्र थोड़े ही दूरी पर इसी मोड़ के एक दुकान पर इस क्षेत्र के भाजपा के दर्जनों प्रमुख नेता कार्यकर्ता आपस मे गुफ्तगू करते हुए बैठे दिखे। कथा स्थल से थोड़ी ही दूरी पर बैठे भाजपाईयो का सांसद से मिलने भी न जाना कथा से ज्यादा भाजपाईयो की यह दूरी बनाए रखना स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बन गया।

जब हमारे संवाददाता ने इस सम्बंध में भाजपा के एक जिम्मेदार पदाधिकारी से इसके बारे में कारणों की जानकारी चाही तो वे बहुत देर तक कुरेदने के बाद अपना नाम न छापने के शर्त पर जो कारण बताया वह आश्यचर्जनक और चौकाने वाला था।उन्होंने कहा कि भाजपाईयो को न तो जिले के संगठन और नही संसद द्वारा सूचना आज यहा आने की भेजी गई थी।न ही आयोजको द्वाराही किसी भाजपाई को कोईं सूचना उनके आने की दी गयी थी।जिसके चलते भाजपाई नही पहुच सके।

यह कारण सुनते ही इस संवाददाता का वह उल्लेख सच होता दिखा जो इस तरह के कार्यक्रमो के आड़ में राजनैतिक हनक दिखाने की मची है होड़,के शीर्षक से चार दिन पहले ही एक स्टोरी प्रसारित और प्रकाषित हुई थी। जिस पर जबरजस्त प्रतिक्रिया भी हुई थी।

इसके साथ ही गत दिनों शक्तिनगर में एक पावन पर्व के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या के मंच पर भाजपा नेता के साथ एक घटित घटना का भी आयोजक मण्डल के किसी खास शख्स से जुड़ा होना भी कई लोग दबी जुबान से कहते भी सुने गए। इस तरह यह श्री राम कथा भाजपाईयो को जोड़ने के बजाय तोड़ कर रख दिया है,जिसका चुनाव व संगठन के कार्यो पर भी प्रभाव भविष्य में इस क्षेत्र में पड़ने की संभावना से इनकार नही किया जासकता है।

इसके साथ ही इसका दूसरा रोचक और गौर करने वाला पहलू यह था कि जब सांसद कथा स्थल पर पहुच गए,तब आयोजको द्वारा सोसल मीडिया पर यह अपील की जारही थी कि राज्य सभा सदस्य राम शकल जी कथा स्थल पर पहुच गए हैं आप सभी भारी संख्या में कथा स्थल पर पहुच कथा श्रवण करे।पर सांसद के प्रस्थान तक तो जस की तस ही स्थित बनी रही।हा उनके प्रस्थान के बाद थोड़े लोग अवश्य पंडाल में कथा श्रवण करने पहुचे। लेकिन लाखो खर्च कर श्रोताओं और श्रद्धालुओ को बनाया गया भव्य पंडाल का अधिकांश हिस्सा खाली ही पड़ा रहा।हा यह सच है कि प्रथम दिन से आज दूसरे दिन भीड़ जो कल शतक नही छू सकी थी उसे आज अवश्य छूते हुए किसी तरह पार जरूर करती दिखी।

आज सांसद राम शकल जी के यहाँ पहुचने पर आयोजक मंडल के मुख्य पदाधिकारी सन्नी शरण जी के नेतृत्व में आयोजको ने सांसद रामशकल जी का खड़िया मोड़ पर अगुवानी की और उनका स्वागत किया।इसके बाद थोड़े देर खड़िया बाजार में आयोजक महोदय के आवास पर उनके चहेतों के बीच गुजारते हुए सांसद कथा स्थल पर पहुचे।इस तरह सांसद का बड़े ही चालाकी से पूर्व से ही सुनियोजित कार्यक्रम को बनाया गया था।इसी के तहत राजनैतिक हनक बनाने के खेल की बड़ी ही सही स्क्रिप्ट पहले ही लिखी गयी थी।पर अनुभवहीन और अति महत्वाकांक्षा पर भाजपाईयो का सांसद से दूरी बनाए रखना इस पर पानी फेरते हुए कई विचारणीय सवाल खड़ा कर दिया है।जिसकी झलक आनेवाले दिनों में आम जन को देखने को अवश्य मिलेगा।

आज आयोजन समिति के सन्नी शरण जी,श्रवण कुमार जी, अजित तिवारी जी,आर के उपाध्या,प्रशांत श्रीवास्तव, आदि के साथ दर्जनों आयोजन समिति के सदस्य पूरे कार्यक्रम में प्रमुख तौर पर व्यवस्था का देख रेख करते देखे गए।

आज की कथा भी कल की तरह पूरी तरह पूजा अर्चना के साथ शुरू होकर देर रात 8 बजे तक चलती रही, जो इसके बाद आरती और प्रसाद वितरण के बाद समाप्त हुई।कल कथा फिर 3 बजे से शुरू होकर शाम 7 बजे तक चलेगी।यह अलग बात है कि श्रोता तो जितने अपेक्षित थे उतने नही पहुच पा रहे हैं ,फिर भी आयोजक पूरे जोश खरोश और उत्साह के साथ कार्यक्रम सम्पन्न कराने में तन्मयता से लगे हुए है।

इस खबर पर ऋषभ राय कि प्रतिक्रिया बेदम और बेजान

आपकी जानकारी के लिये माननीय सांसद  राम शकल शक्तिनगर में आयोजित श्री राम कथा के सरंक्षक है। कथा स्थल पर आने के लिये किसी के निमंत्रण की आवश्यकता नही है । आज कथा के दूसरे दिन माननीय सांसद जी लगभग दो घंटे और लगभग सारे भाजपाई एवम संगठन के लोग कथा समाप्ती तक मौजूद रहे।श्री राम कथा के दौरान लगभग सारा पंडाल श्रोताओं से खचाखच भरा हुवा था । यदि भाजपा के लोग नदारत थे तो ये लोग किस संगठन के हैं अनिल सिंघ गौतम, प्रशांत श्रीवास्तव,वेद प्रकाश मिश्रा,पुनीत कपूर,वीरेन्द्र पाठक, लालचंद  गुप्ता, अशोक अग्रहरि , जयदीप कश्यप, देवेंद्र कुमार, गुप्तेश्वर सोनी,देवी प्रसन्न , अमरजीत, भारत भूषण,रवि चंद्र दूबे,गणेश सिंघ,आशीष चौबे,चंदन सिंघ,श्रवण,अनुराग,सन्नी शरण,हेमन्त मिश्रा,प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंघ ,बबलू जायसवाल,पवन उपाध्याय,छोटू कुशवाहा,रवि कुशवाहा,अनिल चतुर्वेदी,संजय पांडेय,उदय पांडेय,संजीव जायसवाल,लल्लन तिवारी,विजय गुप्ता,श्रवन पटेल,कौशल पटेल इत्यादि।

के.सी. शर्मा(पत्रकार)

प्रतिक्रिया पर के.सी. शर्मा ने कहा,राम के नाम पर रोटी सेकते रहिये और राजनैतिक हनक बनाते रहिये!

ऋषभ राय आँखों देखी लिखी स्टोरी में आपके सफाई की कोईं आवश्यकता नही है।वैसे आप पहले अपना परिचय तो दीजिये। नाम लिखने से उपस्थिति नही होती उसके लिए फ़ोटो और वीडयो की आवश्यकता होती है।जो सब सच दिखाती हैं। जो मेरे पास मौजूद हैं। जहां तक लिखे गए नमो की बात है।उनमें आधे से अधिक भाजपाई है ही नही।अब रही बात भाजपा और शक्तिनगर का तो आपको मैं बता दूं कि हमारे और आपके जानकारी में बहुत फर्क रहेगा।क्योकी आप भाजपा को जन्म होने के बाद से जानते होंगे,परन्तु हम तो तब से जानते हैं जब कमल खिलने से पहले दीपक जला करता था।अब रही बात शक्तिनगर की तो इसके जन्म से पहले से हम जानते हैं शक्तिनगर को,पर शक्तिनगर के जन्म के पहले यहां क्या था आपको पता तक नही होगा। जहां तक बात राम शकल जी की है तो हम वे राजनीति में सक्रिय नही थे प्रचारक थे, तब से संगठन में काम करते रहे हैं। यह उन्ही से पता कर लीजिएगा।

आपको यह भी बता दू, तब सोनभद्र का जन्म नही हुआ था।आपका जन्म तब तक होचुका था या नही हमे पता नही।पर अब आपको बता दूं मैं शक्तिनगर में भाजपा से उस वक्त जुड़ा जब इसका जन्म हुआ था।तब तीन लोग ही शुरू में पार्टी का काम खड़ा करने का संकल्प लिए थे ।उनमें से एक मैं हूँ।एक दुनिया मे नही है, एक अब आपके पार्टी में नही है।

भाजपा के प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन जो बॉम्बे में हुआ था उसको भी हम ही यहा से शिरकत करने गए थे।और आपको यह भी बता दू शक्तिनगर के जन्म के बाद हमारे द्वारा चलाये जा रहे आन्दोलम में इसी शक्तिनगर से दो दो बार देश के बर्तमान गृह मंत्री माननीय राजनाथ सिंह धारा 144 तोड़ गिरफ्तारी भी दे चुके हैं, जिसका शक्तिनगर थाने में लिखित रिकार्ड है जा के पहले देख लीजिए, इसके बाद हमे दिया दिखाईयेगा।

आज पेड़ में फल लग चुका है और पक चुका है उसे तोड़िये और खाइए।लेकिन पेड़ लगा के उसे खाद पानी देते और सींचते हुए उसकी सुरक्षा कर फल देने लायक बना के जो खुद फल खाता होगा तो उसे उस फल देने वाले वृक्ष के महत्ता का भी पता होता है।
हमको आईना दिखाने की आवश्यकता नही है, नही जनता को दोनो सब जानते हैं।राम के नाम पर रोटी सेकते रहिये और राजनैतिक हनक बनाते रहिये,जनता सब जानती है और संगठन भी सब जनता है।इतना सफाई देने से भी काम नही चलेगा।ध्यान रहे फल खाने के चक्कर मे पेड़ की डाली ही मत तोड़ दीजिएगा कि कही पेड़ ही न मुर्झा के सुख जाए।इसीलिए मेरा यह लेख सब को आईना दिखा रहा है और आगे भी दिखता रहेगा। हम बहुत जल्द फिर नए सवालों के साथ नई ताजी स्टोरी के साथ मिलेंगे। तब और मिर्ची लग सकती है।
इसी लिए हमे कौरव पांडव से कुछ भी लेना देना नही है, हम तो सिर्फ यह देख रहे हैं कि कैसे हस्तिनापुर और उसकी सीमाएं सुरक्षित रहे! मेरी प्रतिवद्धता सिर्फ हस्तिनापुर के प्रति है, न कि कौरव पांडवो के प्रति।जिस पर मेरी पैनी नजर रहती है और जब तक जीवित है रहेगी।

यह सफाई देना और नाम गिनाना यह आप के बेचैनी का प्रतीक है,और राजनैतिक हनक का दरकती हुई जमीन पर लड़खड़ाते हुए पैर के हिलने का पहला यहसास है।हम तो अपनी सरजमी पर है।पर अपने पैरों को पहले लखड़ाने से रोकिए।अभी तो यह पिक्चर का टेलर है, पूरी पिक्चर तो देखना अभी बाकी हैं।देखते रहिये आगे क्या क्या होता है?
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