#SINGRAULI_ELECTION किस पर गिरेगा प्रदूषण का कहर?

क्यों चर्चा में है सिंगरौली विधानसभा 80


ब्दुल रशीद 

चुनाव विशेष: 
दिल्ली के प्रदूषण के लिए कौन जिम्मेदार है,गुजरात से भगाए दिहाड़ी मजूरों का क्या होगा,और गंगा की सफाई की सच्चाई क्या है? इन बातों का देश के अतिपिछड़े 100 गांव की सूची में तीसरे स्थान पर अपनी बदहाली दर्ज कराने वाले और जहरीला जल और प्रदूषित प्राण वायु लेने वाले सिंगरौली वासियों का क्या सरोकार?

दरअसल, चुनावी मैदान में उतरे जाबांजों के पास गरीब जनता के खाली थाल और बेरोजगार युवा के आंख में देख कर बात करने का साहस ही नहीं,ऐसे में स्टार प्रचारकों और जुमलेबाज़ नेताओं के सहारे अपने नाकामयाबियों को छुपा कर सत्ता पाने का प्रमाणित प्रयास में जुटे हैं। कहने को तो जनता सब जानती है ऐसे में जनता बेहाल क्यों है और नेता मालामाल यह यक्ष प्रश्न अभी तक अनुत्तरित है।

असल मुद्दा नदारद

सिंगरौली जिले के लिए वरदान ही अभिशाप बन गया ऐसा इस लिए क्योंकि पानी और कोयले की प्रचुरता के कारण बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियां यहां स्थापित हुई। बिजली कम्पनियों ने राजनितिक सांठ गांठ की बदौलत प्रकृति का दोहन तो भरपूर किया लेकिन सामजिक दायित्व निभाने के बजाए नेताओं और अधिकारियों को चटनी चटा कर सिंगरौली वासियों को प्रदूषण परोसते रहें।

केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड ने 2010 में सिंगरौली को क्रिटिकल पोल्यूटिंग जोन घोषित किया,और एनटीपीसी, रिलायंस, जेपी निगरी, हिंडालको व एस्सार द्वारा 80 लाख पौधरोपण की बात कही गई।सैंया भय कोतवाल तो डर काहे का,वाली कहावत को चरित्रार्थ करते हुए महाज खानापूर्ति के लिए ज्यादातर पौधे कागजों में लगे और जो लगें वो भी देखभाल के अभाव में अपना अस्तित्व खो दिए।

युवाओं में बढती बेरोजगारी का यह आलम है की पढ़े लिखे युवा पहाड़ पर पत्थर तोड़ कर अपना पेट भरने के लिए भी तैयार हैं,अफ़सोस यहां के युवाओं को यह काम भी नसीब नहीं हो रहा,राजीनीतिक सांठ गांठ का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है की स्थानीय प्रशासन के आदेश को भी दरकिनार कर दिया गया।

किस पर फूटेगा “बेरोजगारी बम” 

सभी पार्टियों के स्टार प्रचारकों के भाषण में आरोप प्रत्यारोप के साथ जुमलेबाज़ी का तड़का तो था,लेकिन स्थानीय लोगों की समस्या और रोजगार के लिए दरबदर भटकते उनके सपूतों के लिए कंठ से एक शब्द नहीं फूटे ऐसे में सभी तरह के आकलन विशलेषण और दावों को युवा वोटरों का वोट धाराशायी कर सकता है।

क्यों  चर्चा में  है सिंगरौली विधानसभा 80

सिंगरौली जिला में सबसे ज्यादा दिलचस्प राजनीतिक मुक़ाबला सिंगरौली विधानसभा 80 का है। मध्यप्रदेश के दोनों प्रमुख दल कोंग्रेस भाजपा यहां बागियों की बगावत और भीतर घात झेल रही है,कांग्रेस में पैराशूट प्रत्यासी के जीतने की रणनीति भी मायावती के चुनावी सभा के बाद गडबड दिख रहा है। बसपा में रहते जो समर्थन उनके साथ था मायावती के चुनावी दौरे के बाद आंशिक रूप से रह गया दूसरी तरफ अरविंद सिंह चंदेल के साथ असंतुष्ट कांग्रेसी का जाना भी चुनावी गणित को बिगाड़ सकता है।

भाजपा के वे पदाधिकारी जो चार साल पहले यह कहते नहीं थकते थे के विकास सिर्फ उन लोगों को नहीं दिखाई दे रहा है जो भाजपा को वोट नहीं दिए हैं,हैरत की बात है तवज्जो न मिलने से अब वे खुद असंतुष्ट हैं,यदि भाजपा के असंतुष्ट भीतर घात नहीं करते तो राह आसान है लेकिन विपरीत स्थिति में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को दोनों पार्टीयों में मचे घमासान और जमीनी स्तर पर जनसंपर्क का फयादा बेहतर और अप्रत्याशित परिणाम दे सकता है।
ख़बर/लेख अच्छा लगे तो शेयर जरुर कीजिए। ख़बर पर आप अपनी सहमती और असहमती प्रतिक्रिया के रूप में कोमेंट बॉक्स में दे सकते हैं। आप हमें सहयोग भी कर सकते हैं,समाचार,विज्ञापन,लेख या आर्थिक रूप से भी। PAYTM NO. 7805875468 या लिंक पर क्लिक करके।

Post a Comment

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget