‘‘ठग्स आफ हिंदोस्तान’’ खूबसूरती से दर्शकों को ठगने वाली फ़िल्म।

फ़िल्म ठग्स आफ हिंदोस्तान


नाम - ठग्स आफ हिंदोस्तान
अवधि - दो घंटे 44 मिनट
निर्माता -यशराज फिल्मस
निर्देशक व पटकथा लेखक -विजय कृष्ण आचार्य
संगीतकार - अजय अतुल
कैमरामैन - मानुष नंदन
कलाकार – अमिताभ बच्चन, आमिर खान, कैटरीना कैफ, फातिमा सना शेख, इला अरूण, लायड ओवन, मोहम्मद जीशान अयूब, रोनित रौय, सत्यदेव कंचराना, अदुल कादिर अमीन व अन्य।

ब्दुल रशीद

फ़िल्म की कहानी सन 1795 के उस दौर की कहानी बताती है, जब हिंदुस्तान की तमाम रियासतों पर अंग्रेजों का राज हो चुका है और बाकी बचे रियासतों पर भी राज करने लालसा थी। बचे हुए एक रियासत रौनकपुर को अंग्रेज कमांडर जॉन क्लाइव (लॉयड ओवेन) धोखे से कब्जा लेता है। और वहां के नवाब मिर्जा सिकंदर बेग (रोनित रॉय) के परिवार को मार देते हैं, लेकिन उसकी बेटी जफीरा (फातिमा सना शेख) को राज्य का वफादार खुदाबख्श आजाद (अमिताभ बच्चन) बचा कर ले जाता है। जफिरा के लालन पालन के साथ आजाद छुपकर अपने लोगों को इकट्ठा करता है और फिर एक दशक बाद अंग्रेजों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध शुरू कर देता है। इस युद्ध में जफीरा भी अपने परिवार का बदला लेने के लिए आजाद का साथ देती है।

आजाद के गुरिल्ला युद्ध से परेशान अंग्रेज उसे उसी के अंदाज में सबक देने का फैसला करते हैं,इस काम के लिए एक ऐसे शातिर आदमी की जरुरत थी जो आज़ाद को सबक सिखा सके।अंग्रेजों तलाश फिरंगी मल्लाह (आमिर खान) के मिलने से पर पूरी हो जाती है। फिरंगी अवध का रहने वाला एक छोटा-मोटा ठग है, जो हर शर्त पर पैसा कमाना चाहता है। वह अंग्रेजों के लिए और ठगों को पकड़वाने का काम करता है। फिरंगी मल्लाह की महबूबा सुरैया (कैटरीना कैफ) एक नाचने वाली है। अंग्रेजों की योजना के मुताबिक फिरंगी ठगों की सेना में अंग्रेजों का मुखबिर बनकर शामिल हो जाता है।इस फ़िल्म में बस यही एक दिलचस्प मोड़ है जिसे जानने के लिए दर्शक इस फिल्म देखते हैं,आपके ज़ेहन में भी यह सवाल होगा के क्या फिरंगी अंग्रेजों का मुखबिर बनकर अंग्रेजो का साथ देता है या फिर फिरंगी अंग्रेजो को भी ठग लेता है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए आप पूरी फिल्म देख सकते हैं। 

यह फिल्म ऐतिहासिक और अंग्रेज शासकों के खिलाफ आजादी की लड़ाई के वक्त जन्मी कहानी जैसा दिखाने की नाकाम कोशिश है। हां फिल्म में दर्शाए सीन ‘‘बाहुबली’’ जैसी कुछ हिंदी व ‘‘पायरेट्स आफ कैरेबियन’’ जैसी कुछ अंग्रेजी फिल्मों की याद जरुर दिलाती है। फ़िल्म की कहानी कुछ ख़ास नहीं है सिवाय पुराना घिसा पिटा फार्मूला के।कमजोर कहानी के साथ कहानी कहने यानी फिल्माने का तरीका भी कोई आकर्षण पैदा नहीं करता यही वजह है की अमिताभ बच्चन व आमिर खान जैसे दिग्गज कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद ‘‘ठग्स आफ हिंदोस्तान’’ बेहतरीन फिल्म नहीं बन पायी। 

‘‘ठग्स आफ हिंदोस्तान’’ देखने में जो सबसे ज्यादा दर्शकों को अपील करने वाली बात है,वो आमिर और अमिताभ को साथ देखना फ़िल्म प्रेमियों के लिए किसी तोहफ़े से कम नहीं है। फ़िल्म प्रमियों को दोनों स्टार ने अपने अभिय से मायूस नहीं किया है,अमिताभ बच्चन ने शानदार एक्शन सीन्स वाला रोल किया है। पानी के जहाजों पर उनके लड़ाई के सीन जबरदस्त हैं। मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर हमेशा की तरह अपने रोल में पूरी तरह रचे बसे हुए दिखे हैं। मसखरे धोखेबाज ठग के किरदार (फिरंगी मल्लाह) को उन्होंने बखूबी निभाया है। दंगल के बाद फातिमा सना शेख के लिए करियर की शुरुआत में ही एक और बड़ी फिल्म का मिलना और लीड रोल करना ही उनके अभिनय कुशलता को दर्शाता है,जो फ़िल्म में भी दिखता है। महज़ दो गानों तक सीमित कैटरीना कैफ को फिल्म में बहुत कम फुटेज मिली है। जॉन क्लाइव के रोल में लॉयड ओवेन ने भी बेहतर अभिनय किया है।

‘धूम 3’’ फेम निर्देशक विजय कृष्ण आचार्य इस फिल्म में अपना हुनर दिखाने की बजाय बुरी तरह से असफल हुए हैं। पहले हाफ में फिल्म थोड़ी ठीक लगती है, लेकिन दूसरे हाफ में कहानी बोर करने लगती है। फिल्म में का सस्पेंस भी दर्शकों का मनोरंजन करने में नाकाम रही। ‘‘ठग्स आफ हिंदोस्तान’’ में ठगने का खेल जरुर आपको आखिर तक सोचने को मजबूर करता है की फिरंगी ने आखिर में किसे ठगा? 

‘‘ठग्स आफ हिंदोस्तान’’ की शूटिंग जोधपुर के मेहरानगढ़ किले में हुई,और जहाज वाले लड़ाई के सीन माल्टा में शूट किए गए हैं। मानुष नंदन की सिनेमटोग्रफी काबिलेतारीफ है। फिल्म में पानी के जहाजों पर लड़ाई के सीन काफी रोमांचक हैं। 1795 के दौर जैसा दिखाने के लिए भव्य सेट्स, बड़ी स्टारकास्ट और 350 करोड़ की लागत से बनी फ़िल्म कि कहानी इतना कमजोर है की दो घंटे 44 मिनट की फिल्म दर्शकों को उबाऊ लगने लगती है। 

उबाऊ होने के कारण यह फ़िल्म बेहतर कमाई कर सकता है क्योंकि इसे दीवाली की चार दिन की छुट्टी का फायदा मिलेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार दीवाली की रात सोना नहीं चाहिए। इसको ध्यान में रखते हुए फिल्म का दीवाली की रात बारह बजे के बाद ही कई शो रख दिए गए, जिनकी कीमत भी काफी रखी गयी। सुबह पांच बजे से शुरू कर दिए जाने का फ़ायदा भी दिखा।त्योहार पर चार दिन की छुट्टी है,छुट्टी बीताने के लिए, बड़े स्टारकास्ट को देखने दर्शकों का थिएटर पहुंचना स्वाभाविक है। कुल मिलाकर उबाऊ फिल्म ‘‘ठग्स आफ हिंदोस्तान’’ को सफल बनाने के लिए सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने की ‘यशराज फिल्मस’ की रणनीति जरुर सफल रही।

फिल्म ‘‘ठग्स आफ हिंदोस्तान’’ एक बडे भव्य सेट,खूबसूरत लोकेशन,बड़े बड़े पानी के जहाज व दिग्गज कलाकारों का जमावड़ा है। फिल्म के कैमरामैन मानुष नंदन का काम प्रशंसनीय है। गीत संगीत कुछ ख़ास नहीं जो दर्शकों को लुभा सके।
फ़िल्म के अंत में दर्शकों को यह एहसास होने लगता है की,दो घंटे 44 मिनट की फिल्म ‘‘ठग्स आफ हिंदोस्तान’’ भव्य सेट्स, बड़ी स्टारकास्ट और बड़े-बड़े पानी के जहाज को दिखा कर निर्माता निर्देशक ने बहुत खूबसूरती से उन्हें ठग लिया है। 

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