तुलसीराम के साथ मरा गया सोहराबुद्दीन अभी मरा नहीं !

उर्जांचल टाइगर,


डॉ कुणाल सिंह 
तुलसीराम के साथ मरा गया सोहराबुद्दीन अभी मरा नहीं है. उसके भुत की साया अमित शाह के पीछे पीछे भाग रही है.अपनी प्रशासनिक औकात से अभी तक बचाते आ रहे शाह को यह भुत कब दबोच लेगा ,कहा नहीं जा सकता. अमित शाह जब भी सोचते हैं की वह मर चुकी है,वह भुत बनाकर फिर ज़िंदा हो जाती है .यद्यपि अपने मैनेजमेंट के बल पर शाह इस केश से बरी हो चुके हैं.
राजस्थान के तब के गृहमंत्री गुलाब चाँद कटारिया,मार्बल व्यापारी विमलपाटनी और हैदरा बाद के आइपीएस सुब्रामाद्यम और एसआई श्रीनिवासंसे पूछ ताछ कर ही अमित शाह,डीजी वंजारा,राजकुमार पांडियन और दिनेश के खिलाफ सबूतों के आधार पर चार्ज सीट दाखिल करने वाले आईपीएस संदीप तामगड़े ने २१ नवम्बर २०१८ को फिर कहाकि अमितशाह मुख्य साजिश कर्ता थे.

केश से बरी हो चुके अमित शाह से सम्बंधित सारे रिकार्ड प्रशासनिक तौर पर गायब कर दिए गए.आरोपी हैदराबाद के एस आई श्रीनिवास राव से संबंधित जप्त १९ दस्तावेजों में से १८ दस्तावेज भी कोर्ट से गायब हो चुके हैं. इतने महत्वपूर्ण सारे रिकार्ड कोर्ट से गायब हो जाना स्वयं में ए क साजिश का हिस्सा नहीं तो और क्या है.

वकील सतीश उइके के बाम्बे हाईकोर्ट के नागपुर बेंच में दायर याचिका में यह आरोप है की जज लोया की मौत रेडियो एकटिव आइसोटोप का जहर देने से हुई है.उन्हों ने अपने जान को भी खतरा बताया है और कहा है कि वकील श्रीकांत खान्देवाल और प्रकाश थोम्बर की भी संदिग्ध मौत हो चुकी है.

२०१४ दिसंबर के तिन साल बाद "कारवां पत्रिका" ने इस केश की सुनवाई कर रहे जज लोया की मौत पर सवाल खड़े किये थे और इसे सामान्य मौत नहीं ह्त्या बताया. आई पी एस अमिताभ ठाकुर और संदीप ताम्पडे ने कोर्ट को बताया है की वो अपने दिए सबूतों और चार्ज्सित की लिखित बातों पर कायम हैं.ज्ञातव्य हो की यह वाही कोर्ट है जिसमें जज लोया इस केश की सुनवाई कर रहे थे. आश्चर्य जनक है की सुको ने इसे संज्ञेय नहीं माना है.
आखिर सच तक कैसे पहुंचा जाय जबकि एक आरोपी साजिशकर्ता सता की सर्वोच्च शक्ति बना हुआ है और सोहराबुद्दीन,तुलसी प्रजापति का पुलिस एकाउंटर खुद में एक सवाल है कि एकाउंटर हुआ, कि सुनियोजित ह्त्या हुई .
सोहराबुद्दीन के मौत की छाया भुत बन कर तब तक अमित्शाह का पीछा कराती रहेगी जब तक निष्पक्ष जांच और कोर्ट में बिना दबाव के सच सामने नहीं आ जाता. सीबीआई से यह उम्मीद तो की ही नहीं जा सकती क्यों कि सीबीआई आफिसर के अनुसार ही सीबीआई “सेंटर फार बोगस इंवेस्टिगेशन बन चुकी है.
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