वाराणसी - खंडित शिवलिंग को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी के 19 सवाल


जीत नारायण सिंह 
वाराणसी बरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा दिनांक 21.12.18 के पत्रकारवार्ता मे बताया गया था कि नाले के किनारे मिले खंडित शिवलिंग विश्वनाथ कॉरिडोर का मलवा नही मलवा गणेश महल क्षेत्र स्थित एक पुराने जर्जर बरामदे एवं मंदिर का है मलवा शिवलिंग की आड़ में धार्मिक सौहार्दय को बिगाड़ना चाहते हैं कुछ लोग।

जिसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी ने दिनांक 22.12.18 को पुनः पत्रकारवार्ता मे बताया कि जनता के समक्ष सही तथ्यों को रखने हेतु स्वामि अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी, पूर्व विधायक अजय राय व आप नेता संजीव सिंह आदि ने बताया कि मलबे में मिले सैंकड़ों शिवलिंगों के सन्दर्भ में जो कहानी काशी की पुलिस ने सुनाई है उसकी आशा हमें पहले से ही थी। इसीलिए हम न्यायिक जांच की मांग कर रहे थे।

कार्यालय वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से जारी प्रेस विज्ञप्ति संख्या 91/2018 दिनांक 21 दिसम्बर 2018 तथा एस.एस.पी. महोदय के इसी सन्दर्भ में सोशल मीडिया पर आई वीडियो क्लिप को देखने के बाद स्वामि अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी पुलिस द्वारा जारी विज्ञप्ति पर निम्न सवाल खड़े किए कहा कि हमारे मन में सवालों के लच्छे उठ खड़े हुए हैं जिन्हें हम क्रमशः आपके सामने रख रहे हैं -

- घटना 19 दिसम्बर 2018 को पूर्वाह्न ही पुलिस के संज्ञान में आ गई थी जब वे मौके से शिवलिंग गाड़ियों में भरकर लंका थाने ले गए थे। 

1- यदि मलबा बताई गई जगह से ही गया था तो फिर इतनी सी जानकारी करने में वह भी इतने संवेदनशील मामले में पुलिस को 50 घण्टे से भी अधिक समय क्यों लगा ?

2- मूर्तियों के लंका थाने पहुंचने पर ही तहसीलदार महोदय द्वारा उनको तत्काल गंगा में विसर्जित करने की कोशिश क्यों की गई ?

3- यदि मूर्तियां बताए गए मन्दिर की ही हैं तो फिर किस आधार पर सरकारी विषेशज्ञ जिसका उल्लेख विशाल सिंह जी द्वारा 20 दिसम्बर 2018 की शाम दिए गए वक्तव्य में है यह कह रहे थे कि मूर्तियां चुनार से लाई गई हैं ?

4- यह कैसे मान लिया जाए कि इतना अन्धेरा था कि मलबा फेंकने वालों को मूर्तियां दिखी ही नहीं पर वे बाकायदा मलबा भरते और उठाते रहे ? 

5- यह भी कैसे समझा जाए कि अँधेरे के कारण मजदूरों को मूर्तियां दिखीं नहीं जबकि एक दो मूर्ति होती तो बात अलग बात थी दो सौ के करीब मूर्तियां मजदूर सामान्यतः बेलचे से मलबा खॅंचिया में भरते हैं कैसे उनके बेलचे में वे आ पाई और उन्हें पता ही न चला जबकि कुछ मूर्तियाँ तो इतनी वजनी हैं कि उन्हें कोई एक व्यक्ति आसानी से उठा ही नहीं सकता।

6- यदि मलबा की जगह में अॅंधेरा था तो मूर्तियां उन्हें खॅंचिया में, गधे की पीठ पर लादते समय या ट्रैक्टर की ट्राली में लोड करते समय दिख जानी चाहिए थी । क्या इन सभी स्थानों में अॅंधेरा था ?

7- स्वयं को उच्चाधिकारी और जिम्मेदार व्यक्ति मानने वाले विशाल सिंह जी ने 20 दिसम्बर 2018 को सायंकाल अर्थात् घटना के प्रकाश में आने के लगभग 30 घण्टे बाद वीडियो वक्तव्य दिया है जिसमें वे कहते दिख रहे हैं कि मूर्तियां सोनारपुरा की दुकान से ली गई और राजनैतिक लाभ के लिए मलबे में फेंकी गई लगती है तो फिर यह गणेश महाल के मन्दिर की कैसे हो गईं क्या विशाल सिंह जी को गलत जानकारी पुलिस द्वारा दी गई थी ? या फिर विशाल सिंह जी अलग से कोई जांच करवा रहे थे ? या फिर उन्होंने कहानी गढ़ने की शुरुआत कर दी थी ?

8- हमने जांच की अवधि में ही दिनांक 20 दिसम्बर 2018 को सायं 5 बजे प्रेस कान्फ्रेन्स करके कुछ सबूत सामने रखे थे। रोहित नगर के मलबे में से जो टाइल्स के टुकड़े मिले थे ठीक उसी पैटर्न के टाइल्स चित्रा सिनेमा के सामने डम्प मलबे से भी उठाये थे और यह भी बताया था कि इसी तरह का टाइल्स दुर्मुख विनायक मन्दिर की तोड़ी जा रही दीवाल के शेष अंग में आज भी लगा है। इतने बड़े सबूत की जांच की अधिकारियों ने क्यों उपेक्षा की ?

9- हमने यह भी कहा था कि रोहित नगर के मलबे की प्रकृति (पत्थर, ईट और मिट्टी) चित्रा सिनेमा के सामने डम्प कोरिडोर के मलबे से मिलती है तब क्यों नहीं दोनों जगह के मलबे का तुलनात्मक परीक्षण किया गया और इतने बड़े तथ्य की उपेक्षा कर निष्कर्ष सामने रख दिया गया ?

10- गणेश महाल के जिस मकान से मलबा फेंका गया बताया गया है प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि वहां मन्दिर की दीवार पर कोई टाइल्स नहीं लगाए गए थे।

11- गणेश महाल के जिस मकान का मलबा पुलिस की कहानी में फेंका गया बताया गया है वह इतना बड़ा नहीं कि उसमें इतने शिवलिंग स्थापित रहे हों प्रश्न यह है कि आधे बिस्वा के करीब के इस प्लाट में किस तरह इतने शिवलिंग स्थापित रहे हैं ?

12- आज दोपहर हम स्वयं स्थान के निरीक्षण के लिए गए थे। गणेश महाल के लोगों ने भी हमसे बातचीत में बताया कि वहां इतने शिवलिंग स्थापित नहीं थे और इतने शिवलिंग वहां कभी देखे नहीं गए थे तो फिर पुलिस किस आधार पर वहां शिवलिंगों के होने की बात कह रही है ?

13- पुलिस ने अपनी कहानी के समर्थन में कोई सबूत, कोई सी.सी.टी.वी. फुटेज नहीं प्रस्तुत किया है जिससे उनकी कहानी को बल मिलता हो क्यों ?

14- पुलिस ने यह भी नहीं बताया कि रोहित नगर के प्लाट पर कितनी ट्राली मलबा गणेश महाल के उक्त मकान से ले जाया गया और लगभग कितनी ट्राली मलबा अभी भी वहा विद्यमान है इसका आकलन क्यों नहीं किया गया ?

15- गणेश महाल के जिस भवन का मलबा बताया गया उसके मालिकों और मलबा ढोने वाले मजदूरों के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई ? क्योंकि उनके इस कृत्य से बहुत बड़ी अशान्ति फैल सकती थी क्योंकि हिन्दू देवताओं को नीचा दिखाने जैसा काम करके धार्मिक उन्माद ये फैला रहे थे।

16- जिस दिन मलबा रोहित नगर में मिला था उसी दिन श्री विशाल सिंह जी का वक्तव्य आ गया था कि मलबा विश्वनाथ कोरिडोर का नहीं है इस वक्तव्य का आधार क्या था ?

17- जिस गणेश महाल के मकान में से मलबे के साथ शिवलिंग फेंके जाने की कहानी पुलिस द्वारा बताई गई है उसके मालिकों ने तत्काल सामने आकर यह बात क्यों नहीं कही कि ये मूर्तियां हमारे यहां की हैं और मजदूरों की भूल से और अँधेरे के कारण मलबे के साथ चली गई हैं ? सारे शहर में लोग दुःखी होते रहे और इन लोगों ने क्यों स्पष्टता नहीं की ?

18- पुलिस ने कहानी तो खूब बनाई पर जिस व्यक्ति के मकान से इतनी सारी मूर्तियां मलबे में फेंक दी गई हैं न तो उसे गिरफ्तार किया है, न ही उसे प्रस्तुत किया है और न ही उसका कोई बयान जारी किया है क्यों ?

19- जिस व्यक्ति के घर से इतनी बड़ी घटना की गई और जिस ठेकेदार ने संवेदनशील मामले को घटित किया उसके ऊपर अभी तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं ?

जबकि कहा जा रहा है कि बरामदे के मलबे को सुमन मिश्र द्वारा ठेके पर साफ कराया जा रहा था। उक्त मलबे में छत गिरने के कारण तमाम शिवलिंग क्षत-विक्षत हो गये थे जो अन्य पत्थर के टुकडों के साथ मिल जाने के कारण स्पष्ट नहीं हो पा रहे हैं जबकि सच्चाई यह है कि कोई भी मूर्ति छत के गिरने से खरोच तक नहीं आई है। क्षेत्र के लोगों ने बार-बार इस चमत्कार का उल्लेख किया।

पत्रकार वार्ता में प्रमुख रूप से अजय राय पूर्व विधायक, संजीव सिंह आप नेता,विश्व्नाथ मन्दिर महंत परिवार के राजेन्द्र तिवारी, महाराजमणि सनातन जी महाराज, कुवँर सुरेश सिंह, संजय पाण्डेय प्रेस प्रभारी,  अजय पाण्डेय, मृदुल कुमार ओझा आदि लोग प्रमुख रूप से सम्मलित थे।

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