कांग्रेस के मास्टर स्ट्रोक से भाजपा का महल लड़खड़ा जायेगा !

  • कांग्रेस के लिए तीसरी सीट छोड़ेगा सपा-बसपा गठबंधन
वेद शिकोह
चौकीदार पर सामूहिक हमला करके भाजपा का महल लूटने का विपक्षी प्लान आगामी लोकसभा चुनाव की धुरी साबित होगा। भाजपा की विशाल सीप की कीमत उसके मोती मोदी से है। इस सीप की चमक पर ग्रहण लगाने के लिए यूपी में सपा-बसपा के साथ कांग्रेस मास्टर स्ट्रोक मारकर भारतीय राजनीति में भूचाल ला सकती है।

भाजपा के जनाधार का महल तब तक सलामत है जब तक इसका रक्षक सलामत है। ये रक्षक इकलौता चौकीदार है। जो बेहद बलवान है। हजारों की फौज तब तक महफूज है जब तक इसकी लोकप्रियता की ताकत बरकरार है। जैसे किस्सों-कहानियों में राजा की जान तोते मे है वैसे भाजपा की जान लोकप्रियता के महानायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मे है। जिस दिन मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ गिरता साबित कर दिया गया उस दिन भाजपा का महल लड़खड़ा जायेगा। क्योंकि नरेंद्र मोदी भाजपा के महल की नीव हैं। एक बड़े से गुब्बारे की हवा छोटी सी नोक का छिद्र निकाल देता है। तेज दौड़ती गाड़ी के पहिये की हवा निकाल कर अदृश्य नोक गाड़ी की रफ्तार पर विराम लगा देती है।

शक्तिशाली भाजपा को शिकस्त देने के लिए समूचा विपक्ष भाजपा के सीप के मोती मोदी को परास्त करने का मास्टर प्लान तैयार कर रहा है।

आगामी लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को उनकी लोकसभा सीट से हराने के लिए विपक्षी दल आपसी कटुता और प्रतिद्वंता को भुला देने के लिए तैयार हैं। वाराणसी की लोकसभा सीट पर उन्हें कांटे की टक्कर देकर सम्पूर्ण देश में भाजपा को कमजोर साबित करने की रणनीति तैयार की गई है। यदि मोदी वाराणसी के बजाय लखनऊ से चुनाव लड़ते हैं तो प्रियंका गांधी मोदी को लखनऊ से जबरदस्त टक्कर दे सकती हैं। कांग्रेस में लोकप्रियता की क्वीन कहे जाने वाली प्रियंका को जिताने के लिए सपा-बसपा गठबंधन वाराणसी/लखनऊ लोकसभा सीट पर से अपने प्रत्याशी ना उतार कर मास्टर प्लान को अंजाम तक पंहुचायेंग। यानी नरेन्द्र मोदी को उनकी लोकसभा सीट के मुकाबले में समूचे विपक्ष की ताकत के साथ प्रियंका की लोकप्रियता सोने पे सुहागा बनेगी। इस एतिहासिक लड़ाई में सपा-बसपा और कांग्रेस की मिलीभगत प्रधानमंत्री मोदी को हराने के लिए मास्टर स्ट्रोक खेल सकती है। जिस तरह सपा-बसपा ने कांग्रेस के साथ बिना गठबंधन किये रायबरेली और अमेठी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के लिए सीट छोड़ दी है वैसे ही वाराणसी/लखनऊ के लिए गांधी परिवार की तीसरी सदस्य प्रियंका के लिए भी सीट छोड़ दी जायेगी।

विपक्षी पार्टियों के सूत्रों के अनुसार कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन के बीच इस तरह के मास्टर प्लान की खिचड़ी खामोशी से पक रही है। सूत्रों की इस खबर और राजनीति जानकारों के अनुमानों को राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने बल दे दिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रियंका गांधी को कांग्रेस में महासचिव बनाये जाने से एक दिन पहले कहा था कि हम कांग्रेस के साथ सामंजस्य बनाये हुए हैं। जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका को पार्टी का महासचिव बनाये जाने के एलान के दिन कहा कि सपा-बसपा के साथ कांग्रेस का रिश्ता टूटा नहीं है।

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