N.C.L.में कार्यरत आउटसोर्सिंग कम्पनियों में श्रमिकों शोषण कब होगा बंद !

आउटसोर्सिंग कम्पनियों में श्रमिकों शोषण


सिंगरौली।एन सी एल के कोयला खदानों में कार्यरत आउटसोर्सिंग कम्पनियों में लगभग 20 हजार श्रमिक कार्यरत हैं।मौजूदा समय में आउटसोर्सिंग कम्पनियों में इन श्रमिकों का शोषण होने के कारण कार्यरत श्रमिको की हालत बद से बदतर है।
इन कम्पनियों में उत्तर भारतीयों के साथ अपमान जनक व्यहार करने की बाते खुल कर सामने आरही है।जिससे उत्तर भारतीय श्रमिको में आक्रोश बना हुआ है। श्रमिकों बढ़ते असंतोष पर प्रबन्धन सहित जिम्मेदारों द्वरा समय रहते उचित उपाय नहीं किया जाता तो आने वाले दिनों में असंतुष्ट श्रमिकों के बड़े आंदोलन की सम्भावना से इंकार नही किया जा सकता है।

श्रमिक (बीजीआर) 

संविदाकार श्रमिकों की माने तो उनके साथ श्रम कानून को दरकिनार कर बंधुआ मजदूरों की तरह 8 घण्टे के बजाय 12 घण्टे तक काम कराया जारहा है।विरोध करने पर इन्हें काम से निकाल देने की धमकी दी जाती है।

बताया गया की, जब श्रमिक अपनी जायज मांगो के लिए ये संगठित हो कर कभी अपनी आवाज बुलंद करने का प्रयास करते हैं तो लठैत और स्थानीय पुलिस के सहयोग से इनकी आवाज दबा दी जाती है। 
सूत्रों की माने तो ज्वाइनिंग के समय से ही शोषण शुरू हो जता है,ओपेने वैकेंसी निकालने के बजाय जितने श्रमिकों कि नियुक्ति करना होता है उतने नंबर को कथित नेताओं,स्थानीय प्रशासन में कोटा बनाकर बांट दिया जाता है उनके सिफ़ारिश पर नियुक्ति के लिए,और बिना चढ़ावे के नियुक्ति संभव ही नहीं होता,ऐसे में योग्य बेरोजगार युवा  पीछे रह जता है,श्रमिकों का इस तरह इनका शोषण बदस्तूर जारी रहता है।
श्रमिको के शोषण से कम्पनियो के हो रहे मुनाफे में सभी भागीदार बने हुए है, इनमें राजनेता,श्रमिक नेता,प्रशासनिक अधिकारी,एन सी एल प्रवन्ध,स्थानीय जनप्रतिनिधिगण,आदि सभी सम्मलित है। जो ग़ुलाबी कागज के टुकड़ो के आगे अपनी जमीर बेचते हुए मजदूरों का शोषण कराने में अपना बर्दहस्त दे बराबर के पाप के भागीदार बने हुए हैं।

मिनी रत्न एन सी एल के प्रबन्धन यह सब जानते हुए न जाने क्यो "आँख मूँदे", "कान में तेल डालें", "हाथ पर हाथ धरे" चुप्पी साधे हुए है। 

उपरोक्त समस्याओं के तरफ ध्यानाकर्षण कराते हुए कोयला श्रमिक सभा सम्बद्ध (हिन्द मजदूर सभा) एन सी एल के महामंत्री अशोक कुमार पांडेय ने एक सात सूत्रीय ज्ञापन खडिया परियोजना के महाप्रबंधक को प्रस्तुत किया है।

जिसकी प्रति एनसीएल के सी एम डी सहित कम्पनी के सभी निदेशकों व महाप्रबंधक का0 तथा क्षेत्रीय श्रमायुक्त केंद्रीय इला0,जिलाधिकारी सोनभद्र,पुलिस अधीक्षक सोनभद्र,थाना प्रभारी शक्ति नगर, राष्ट्रीय अध्यक्ष नाथूलाल पांडेय जी एचकेमएफ/एचएमएस तथा के एस एस के संरक्षक के सी शर्मा को भी प्रेषित किया है।

प्रेषित पत्र में यूनियन के महामंत्री अशोक कुमार पांडेय ने श्रमिको क़े शोषण और उत्पीड़न व हो रही उनके साथ नाइंसाफी का विस्तार से उल्लेख किया है।

जिनमे प्रमुख तौर पर यह उल्लेख किया है कि उक्त कम्पनियो में कार्यरत हजारो श्रमिको को सितंबर 2018 से लागू नया वेतनमान अभी तक ल नही दिया जारहा है।बोनस का बकाया राशि इन्हें सही ढंग से नही मिला है।साल भर में मिलने वाले अवकाश का भुगतान इन्हें नही मिल रहा है।

पांडेय ने यह उल्लेख किया है कि श्रमिकों को उनका हक़ देने के बजाय इनके साथ ओउतेसोर्सिंग  कम्पनी प्रबन्धन व उनके पालतू गुर्गे व लठैत उनका अमानवीय शोषण,उत्पीड़न,उनके साथ दुर्व्यहार कर रहे है,जो अक्षम्य है।

पांडेय ने उपरोक्त स्थिति की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए एनसीएल प्रबन्धन से आग्रह किया है कि वे तत्काल हस्तक्षेप कर इसे बन्द कराए नही तो यूनियन को मजदूर और कोयला उद्योग के हित मे कड़ा कदम उठाना पड़ेगा जिसका जिम्मेदार एनसीएल प्रबन्धन होगा।
पांडेय ने देशव्यापी आंदोलन के दौरान शांतप्रिय ढंग से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत बी.जी.आर के निहत्थे श्रमिको पर रात के अंधेरे में कम्पनी के गुर्गे व पाले हुए लठैतों ने शराब के नशे में प्रशासनिक अमले के साथ पहुच जो नग्न तांडव नृत्य किया,बर्दास्त योग्य नही है।इसका जबाब एनसीएल प्रबन्धन को देना ही होगा।
उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि उपरोक्त समस्याओ से त्रस्त बी जी आर के श्रमिको ने द्वितीय पाली में काम बंद कर दिया था। इसके बाद 5 बजे खडिया परियोजना के क्रमिक विभाग के अधिकारी वहां पहुंचे थे,तब कर्मचारियों ने अपनी समस्या एनसीएल के अधिकारियों को भी बताई।अधिकारियों के आश्वासन पर श्रमिक नेता वहा से वापस चले आये।रात में श्रमिकों के साथ जोर जबरजस्ती की गई और उनके साथ हुए दुर्व्यहार की जांच कराई जाए।

प्रमुख मांग  

1-बढ़े वेतन का बकाया बकाया वेतन एरियर के साथ भुगतान कराया जाय।
2-हाई पावर कमेटी के अनुशंसा पर जारी वेतन में जिसे 21-12-2018 से लेकर अब तक येरियर के साथ भुगतान कराया जाये।
3-उक्त दोनों कम्पनियों ने श्रमिको का सही बोनस नही दिया गया जिसे जांच करा के दिलाया जाए।
4-इन कम्पनियों ने राष्ट्रीय त्योहारों का सही भुगतान नही किया है जिसे जांच कर दिलाया जाए।
5-श्रमिको को वेतन पर्ची नही मिलती उसे चालू कराया जाए।
6-श्रमिको को भविष्य निधि के मद में जो राशि काटी गई हैं उसका विवरण श्रमिको को दिलाया जय।
7-निर्धारित समय से अधिक काम का लिया जाना,उत्तर भारत,दक्षिण भारत के श्रमिकों में भेदभाव कर कार्यस्थल का बातावरण विषाक्त व तनावग्र्स्त बना के रखना,आदि अन्य कई मुद्दों को उल्लेखित कर उसके शीघ्र समाधान कराए जाने की मांग की है।
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