सियासी वादों का सेंसेक्स धड़ाम - पंद्रह लाख से पंद्रह सौ पर गिरा

CONGRESS VS BJP


कांग्रेस की सियासी परिपक्वता के आगे अपरिपक्व है भाजपा

वेद शिकोह
सियासत और हुकूमत करने में कांग्रेस का तजुर्बा भाजपा से कहीं ज्यादा है। सियासी चालों में भी कांग्रेस ज्यादा सफल रही है, तभी आजाद भारत के सत्तर साल के इतिहास में कांग्रेस ने तकरीबन साठ वर्ष हुकूमत की तो भाजपा कुल मिलाकर करीब दस वर्ष ही सत्तानशीन रही। 

भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान की चर्चा से निकली बात दूर तक चली गयी। वादे पूरे ना करने पर जनता पिटाई कर देती है। गडकरी के इस हालिया बयान में से किसी ने बगावत की बू महसूस की। किसी ने कहा कि गडकरी भाजपा सरकार के शीर्ष नेतृत्वकर्ता से नाखुश हैं। कोई चर्चा कर रहा है कि भाजपा में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक एंटी लाॅबी तैयार हो रही है। लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा द्वारा जोड़ तोड़ की सरकार बनाने की स्थिति बनी तो पार्टी में तैयार मोदी विरोध लाॅबी नितिन गडकरी को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव रख सकती है। 
गडकरी इस तरह के बयान से नरेंद्र मोदी को कमजोर साबित कर रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी का एक वादा मोदी विरोधियों का तकिया कलाम बना रहा।काला धन वापस लाकर हर भारतीय के बैंक खाते में पंद्रह - पंद्रह लाख आने का वादा अक्सर खिल्ली उड़ाता रहा। इस तरह भाजपा के और तमाम बड़े वादे पूरे नहीं हो सके। वादे ना निभा पाने के दुष्परिणाम का डर विपक्ष दिखाये तो ठीक है। सरकार के ताकतवर मंत्री इस तरह की बात कहें तो ये तो शक होगा ही कि कुछ ना कुछ आंतरिक कलह तो है ही। 
वादे ना निभाने पर जनता पीटती है। गडकरी के इस बयान की चर्चाओं के बीच खबर आ गयी कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले हर गरीब के खाते में हर महीने पंद्रह सौ डालने का वादा करेगी। कांग्रेस परिपक्व है। उसे पता है कि ज्यादा बड़े वादे करने से क्षणिक सत्ता तो मिल सकती है लेकिन वो वादा पूरा ना करने पर सत्ता खिसक जाती है। इसलिए कांग्रेस ने हर किसी को पंद्रह लाख देने का नहीं बल्कि सिर्फ गरीबों को पंद्रह सौ रूपये महीना देने का वादा कर मास्टर स्ट्रोक खेलने का इरादा बना लिया। अभी मध्य प्रदेश में किसानों की कर्ज माफी के वादे ने कांग्रेस को सफलता भी मिली थी। लोकसभा चुनाव की नैया पार करने के लिए गरीबों को पंद्रह सौ देने का वादा सफलता के पंख साबित हो सकता है। 

एक कांग्रेसी नेता कि माने तो कांग्रेस दस- बीस वर्षों के बाद सत्ता से खुद रेस्ट लेना चाहती है। जीएसटी लागू करना कांग्रेस का महत्वाकांक्षी प्लान था। अन आर्गेनाइज सेक्टर में शुरूआत में इसके दुष्परिणाम होने थे। प्रयोग में लाये बिना खामियों का पूरा अंदाज भी नहीं हो सकता था। ये छोटे व्यापारियों को गुस्सा भी दिला सकता था। इसके बाद सबकुछ ठीक और व्यवस्थित भी हो जाना तय था। कांग्रेस के जीएसटी प्लान को लागू करने के शुरुआती कठिन (राजनीति हानिकारक) काम को भाजपा ने शुरू किया। जैसे कि घर में पुताई के लिए भारी सामान उठाने का जटिल काम मजदूर करते है। स्मूथली दीवार पर ब्रश चलाने वाले पेंटर को पुताई का क्रेडिट मिलता है। 

नाम ना छापने की शर्त पर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि सबकुछ योजनाबद्ध था। दस वर्ष लगातार मनमोहन सिंह सरकार को एंटीइंकम्बेंसी का शिकार होना था। कांग्रेस रेस्ट के दौरान मजबूत हो रही भाजपा को सत्ता की कुर्सी पर बैठाकर कमजोर करना चाहती थी। मंदिर निर्माण हों,कश्मीर में धारा 370, रोजगार या पंद्रह हजार का वादा पूरा नहीं हो सकेगा कांग्रेस ये जानती थी।अपने जीएसटी जैसे महत्वाकांक्षी प्लान दूसरे से शुरू करवाना चाहती थी, ताकि शुरुआती राजनीति नुकसान वो खुद नहीं उठाये। दूसरा इसे झेले। फिर ये कहे कि जिसकी लाठी उसकी भैस। कांग्रेस ही जीएसटी का प्लान लायी थी। मोदी सरकार ने बीच में गुड़ गोबर कर व्यापारियों को परेशान कर दिया। कांग्रेस नेता दावा करते हैं कि अब हम सरकार बनाने जा रहे हैं। व्यापारियों की लाभकारी देशहित की अपनी इस योजना को स्मूथली ढर्रे पर ले आयेंगे। 
इस बात को तो मानना ही पड़ेगा कि सत्तर साल के आजाद भारत के इतिहास में साठ साल हुकूमत पर काबिज रहने वाली कांग्रेस की सियासत भाजपा से कहीं ज्यादा परिपक्व है।
भारतीय राजनीति पर गौर कीजिए। कांग्रेस की ताकत को वामपंथी ताकतें चुनौती दे रहीं थी। कांग्रेस ने इन्हें कमजोर करने के लिए एक चाल चली। खुद साफ्ट हिन्दुत्व की पहचान के समानांतर कट्टर हिन्दुत्व का माहौल खड़ा करने के लिए भाजपा को राम मंदिर के मुद्दे के साथ अपने बराबर खड़ा करने की ताकत दे दी। जिससे की साफ्ट हिन्दुत्व और कट्टर हिन्दुत्व के बीच वामपंथ कुचल जाये। और फिर वैसा ही हुआ। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सैकड़ों वर्षों से दबे अयोध्या में विवादित ढांचे का ताला खुलवाकर भाजपा को ताकत देकर अपने सामने खड़ा कर दिया। ऐसे में कांग्रेस को चुनौती देने वाली वामपंथी ताकतें खुद बा खुद कमजोर पड़ गयीं। कांग्रेस जानती है कि हुकूमत करने में कांग्रेस और भाजपा का रेश्यो 60-10 ही रहेगा। यानी कोई तीसरी ताकत नहीं रही तो कांग्रेस सत्तर सालों में साठ वर्ष हुकूमत करेगी तो भाजपा के हिस्से में हुकूमत करने के लिए दस साल ही आयेंगे। 

क्योंकि कांग्रेस जानती है कि हिन्दु समाज सनातन धर्म को मानता है। ये धर्म मूल रूप से सोफ्ट है। कट्टरता पर आधारित नहीं है। सनातन धर्म को मानने वाला हिन्दू कभी कभार किसी के बहकावे और भावनाओं के भड़काने से कुछ वक्त के लिए कट्टरता अपना सकते हैं। लेकिन ज्यादा लम्बे समय तक ऐसा नहीं हो सकता। हिन्दु साफ्ट हिन्दु ही रहता है। कांग्रेस के पास साफ्ट हिन्दुत्व और देश की असलियत का भरोसा ही उसे सत्तर वर्षो में साठ साल तक हुकूमत पर काबिज किये रहता है। 

पंद्रह लाख का वादा कट्टर हिन्दुत्व जैसा हवा हवाई है तो पंद्रह सौ साफ्ट हिन्दुत्व जैसा स्थायी यानी टिकाऊ है। 

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