मन का दरवाज़ा तो खोलिए,कामयाबी आपके दर पर खड़ी है

HAAPY NEW YEAR 2019


ब्दुल रशीद 
नए साल के जश्न के मायने क्या? दरअसल यह जिंदगी के सफ़र का वह स्टेशन है जहां साल भर बाद रुक कर अपने जीवन में पुरे साल में घटित तमाम सुखद अनुभव को याद कर जश्न मानते हैं और दुखद अनुभव को भुलाने की कोशिश कर भविष्य में बेहतर करने के लिए संकल्प लेने का दिन है। 

शुभकामनाओं और पार्टियों के बाद जब सभी अपने घर और कार्यस्थल पर स्वाभाविक दिनचर्या में लौटना शुरू करते हैं तब वह साथ ही नए साल पर किए अपने संकल्प को पूरा करने के लिए भी कोशिश शुरू कर देते हैं।अपने जीवन में सकारात्मक सोंच से उत्पन्न बेहतर काम करने के लिए किसी ख़ास मौके का इंतज़ार नहीं होना चाहिए, यह बात सच है,लेकिन किसी ख़ास मौके को और ख़ास बनाने के लिए अपने अंदर से नकारात्मक सोंच को निकाल कर सकारात्मक सोंच को जगह देना पराजय को पराजित कर सफलता के उच्च शिखर पर पहुंचने की कुंजी ही तो है। 

एक तथ्य यह भी है की,नए साल पर लिए गए संकल्प के विषय में किए गए सर्वे बताते हैं कि 90 प्रतिशत लोग अपने संकल्प को पूरा नहीं कर पाते, जबकि थोड़े से बदलाव के बाद आप अपने संकल्प को बहुत आसानी से पूरा कर सकते हैं। 
भेड़ चाल चलने के बजाय आप अपने लक्ष्य का चुनाव अपने को बेहतर और सफल बानने के लिए करें।ऐसा करने से जो बदलाव आएगा वह आपको प्रोत्साहित करेगा और आपका संकल्प पूरा हो जाएगा। दूसरों की देखा देखी जब आप संकल्प करते हैं तो उस संकल्प को पूरा करने से जो बदलाव होगा वह आपके जीवन में सुखद हो ऐसा जरुरी नहीं,तब आप प्रोत्साहित नहीं हो पाते और आपका संकल्प अधूरा रह जाताहै। 
सब करने की चाहत में कुछ नहीं कर पाने के बजाय एक ही वह संकल्प लें जो आप पूरा कर सकें,एक ही दिन में बदलाव के बजाय निरतंर नियमित निश्चित बदलाव का मार्ग चुने। जैसे आप छात्र हैं और आप चाहते हैं इस साल आप बेहतर करना चाहते हैं,इसका यह मतलब नहीं की एक ही दिन में आप पूरा पढ़ लेंगें। आप हर दिन अध्यन के लिए निश्चित समय निर्धारित कर नियमित रूप से परीक्षा आने तक निरंतर पढ़ने का प्रण लें। जैसे-जैसे आपका पाठक्रम पूरा होगा,आपको पढ़ाई के प्रति रूचि बढ़ेगा और धीरे धीरे यह रूचि आपके आदत में शुमार हो जाएगा और आप अपने संकल्प को सफलतापूर्वक पूरा कर पाएंगे। 

जिस तरह बदबू खुशबू से ज्यादा तीव्रता से फैलती है ठीक उसी तरह नकारात्मकता सकारात्मकता से ज्यादा आकर्षित करता है।नकारात्मकता को ढोने वालों के जीवन में जब यह बोझ बढ़ जाता है तब वह सकारात्मकता की ओर लौटना चाहते हैं,ऐसा करने में बहुत कम लोग सफल हो पाते हैं कारण वह अपना समय गंवा चुके होतें हैं, लेकिन जो लौटते हैं उन्हें भी जब सकारात्मकता का सुखद अनुभव होता है तब उन्हें यह अफ़सोस रहता है की उनहोंने अपने जीवन का अमूल्य समय नकारात्मकता में क्यों गंवा दिया।अफ़सोस के बजाय बेहतर है की,इस साल हम ऐसा संकल्प लें जो हमारे जीवन के लिए सुखद हो।
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